लोक अदालत का आयोजन और उद्देश्य
झालसा, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ के तत्वावधान में पाकुड़ व्यवहार न्यायालय परिसर में मासिक लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। इस लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लंबित मामलों का त्वरित, सरल और आपसी समझौते के माध्यम से निष्पादन करना था, ताकि आम जनता को त्वरित न्याय मिल सके और न्यायालयों पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके।
अध्यक्षता और मार्गदर्शन
इस मासिक लोक अदालत की अध्यक्षता प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ – कुमार क्रांति प्रसाद द्वारा की गई।
कार्यक्रम का संचालन और मार्गदर्शन सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार – रूपा बंदना किरो के नेतृत्व में किया गया, जिनके निर्देशन में लोक अदालत की पूरी प्रक्रिया सुव्यवस्थित और प्रभावी रही।
नौ बेंचों का गठन
मासिक लोक अदालत को सफल बनाने के लिए कुल नौ बेंचों का गठन किया गया। इन बेंचों में विभिन्न प्रकृति के मामलों की सुनवाई की गई, जिसमें दीवानी, आपराधिक, बैंक ऋण, मोटर दुर्घटना दावा (MACT) सहित अन्य मामलों को शामिल किया गया। बेंचों ने आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से मामलों के समाधान पर विशेष जोर दिया।
43 मामलों का सफल निष्पादन
लोक अदालत के दौरान कुल 43 वादों का सफल निष्पादन किया गया। इनमें यूनियन बैंक से संबंधित दो मामलों का भी समाधान हुआ, जिनमें 51,000 रुपये की आपसी समझौते के आधार पर निपटारा कराया गया। इससे संबंधित पक्षों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिली और समय एवं धन की बचत हुई।
एमएसीटी मामलों में मुआवजा वितरण
इस मासिक लोक अदालत की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) से जुड़े मामलों का निपटारा रहा।
इस दौरान एमएसीटी से संबंधित तीन मामलों में कुल 24 लाख 50 हजार रुपये की राशि के चेक पीड़ितों एवं दावेदारों को वितरित किए गए। यह पहल पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक राहत का बड़ा सहारा बनी।
न्यायिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
मासिक लोक अदालत के इस कार्यक्रम में डालसा सचिव – रूपा बंदना किरो, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी – विशाल मांझी, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी – सदिश उज्जवल बेक, प्रभारी न्यायाधीश – विजय कुमार दास
सहित अनेक न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, वादी एवं प्रतिवादी उपस्थित रहे। सभी ने लोक अदालत की प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता निभाई।
लोक अदालत की उपयोगिता और प्रभाव
लोक अदालत के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि आपसी सहमति, संवाद और समझौते के जरिए कानूनी विवादों का शीघ्र समाधान संभव है। इससे न केवल न्यायालयों का बोझ कम होता है, बल्कि आम नागरिकों को सुलभ, सस्ता और त्वरित न्याय भी प्राप्त होता है।
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि लोक अदालत न्याय प्रणाली का एक प्रभावी विकल्प है, जो न्याय को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मासिक लोक अदालत ने एक बार फिर साबित किया कि न्याय केवल फैसलों में नहीं, बल्कि सहमति और समाधान में भी निहित है।


