चार दिनों के उल्लास भरे महोत्सव का समापन
पाकुड़ रेलवे मैदान में आयोजित 27वें गणपति महोत्सव का समापन बीती रात धूमधाम के साथ हुआ। भगवान गणपति बप्पा की प्रतिमा के विसर्जन के साथ महोत्सव का पटाक्षेप हुआ। इस वर्ष का आयोजन पूरे चार दिनों तक हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। चार दिनों तक पूरा मैदान “गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया” के जयकारों से गूंजता रहा।
कलाकारों ने बांधा समा
इस वर्ष के महोत्सव में न सिर्फ पाकुड़ बल्कि पड़ोसी राज्यों बंगाल और बिहार से आए कलाकारों ने भी अपनी कला का अद्भुत प्रदर्शन किया। रंगारंग कार्यक्रमों ने हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नृत्य, संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से लेकर पारंपरिक झांकियों तक ने पूरे आयोजन को भव्य बना दिया।
🔹 स्थानीय दर्शक रंजीता देवी ने कहा – “हम हर साल यहां आते हैं, लेकिन इस बार के कार्यक्रमों ने तो मन मोह लिया। बाहर से आए कलाकारों ने ऐसा माहौल बना दिया जैसे हम किसी बड़े शहर के कार्यक्रम में हों।”
अंतिम दिन डांडिया और मटका फोड़ प्रतियोगिता
चौथे और अंतिम दिन महोत्सव का आकर्षण रहा डांडिया नृत्य और मटका फोड़ प्रतियोगिता। इसमें न केवल समिति के सदस्य बल्कि स्थानीय लोगों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता में अजीत कुमार मंडल ने मटका फोड़ कर विजय हासिल की और पुरस्कार अपने नाम किया।
🔹 एक युवा प्रतिभागी आकाश मंडल ने खुशी जताते हुए कहा – “मटका फोड़ प्रतियोगिता में भाग लेकर बहुत आनंद आया। यह सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, बल्कि हम सबके बीच आपसी भाईचारे को और मजबूत करने का अवसर है।”
शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब
प्रतिमा विसर्जन से पूर्व भगवान गणेश की विशालकाय प्रतिमा को ट्रैक्टर पर सजाकर पूरे नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस शोभायात्रा में भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। समिति के सदस्य डांडिया करते हुए नाचते-गाते आगे बढ़ रहे थे। वहीं, चारों ओर से जल फव्वारे इस यात्रा को और भी आकर्षक बना रहे थे।
🔹 श्रद्धालु सुरेश शर्मा ने भावुक होकर कहा – “जब बप्पा नगर भ्रमण पर जाते हैं तो ऐसा लगता है मानो पूरा शहर ही उनका परिवार बन गया हो। हर ओर सिर्फ भक्ति और आनंद का माहौल था।”
प्रशासन की मुस्तैदी
विसर्जन यात्रा के दौरान पुलिस प्रशासन भी पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात रहा। जगह-जगह सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद थी ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालते हुए मार्ग को सुगम बनाते नजर आए।
मनसा मंदिर तालाब में हुआ विसर्जन
शोभायात्रा अंततः बागतीपाड़ा स्थित मनसा मंदिर तालाब तक पहुंची। यहां विधिवत पूजन-अर्चन के बाद भगवान गणपति की प्रतिमा और उनके वाहन मुशकराज का विसर्जन किया गया। विसर्जन के समय समिति के कार्यकर्ता और श्रद्धालु बेहद भावुक हो उठे। कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
🔹 विसर्जन के क्षणों पर उपस्थित श्रद्धालु रीता साहा ने कहा – “हर साल जब बप्पा विदा होते हैं तो दिल भारी हो जाता है। लेकिन इस विश्वास के साथ विदाई देते हैं कि अगले साल और भी धूमधाम से उनका स्वागत करेंगे।”
भावुक विदाई और अगले वर्ष का आह्वान
विदाई के क्षणों में सभी भक्त एक स्वर में “आच्छे बोछोर आबार हौबे” और “गणपति बप्पा मोरया” के नारे लगाते रहे। श्रद्धालु अगले वर्ष गणपति बप्पा के पुनः आगमन की कामना करते हुए भाव-विभोर दिखे। सभी ने प्रार्थना की कि बप्पा जल्द ही फिर आएं और उनके जीवन को सुख-समृद्धि से भर दें।
समिति के योगदान को मिला सराहना
पूरे आयोजन को सफल बनाने में सार्वजनिक गणेश पूजा समिति, रेलवे मैदान पाकुड़ की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसमें संस्थापक हिसाबी राय, अध्यक्ष अनिकेत गोस्वामी, संरक्षक संजय कुमार ओझा, सचिव अजीत मंडल, तनमय पोद्दार, राणा शुक्ला, संजय कुमार राय, ओमप्रकाश नाथ, पिन्टू हाजरा, अविनाश पंडित, मनीष कुमार सिंह, अमन भगत, अंकित शर्मा, अंशु राज, अंकित मंडल, निर्भय सिंह, जितेश राजा, रवि पटवा, बिट्टू राय, रतुल दे, अभिषेक कुमार, मोनी सिंह, रंजीत राम, बूबाई रजक, नितिन मंडल, संजय मंडल समेत अनेक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका रही।
28वें वर्ष की ओर कदम
27वें वर्ष का यह भव्य आयोजन अब इतिहास बन चुका है। लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह ने यह संकेत दे दिया कि आने वाला 28वां गणपति महोत्सव और भी भव्य, और भी अद्भुत होगा।