🏛️ राष्ट्रीय लोक अदालत सह विधिक सेवा कार्यक्रम का भव्य वर्चुअल उद्घाटन
इस वर्ष की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत सह राज्य स्तरीय विधिक सेवा सह सशक्तिकरण कार्यक्रम का भव्य वर्चुअल उद्घाटन 14 मार्च 2026, शनिवार को किया गया। यह उद्घाटन कार्यक्रम सिदगोड़ा टाउन हॉल, जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) से आयोजित किया गया, जिसमें झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के कार्यकारी अध्यक्ष प्रशासनिक न्यायाधीश, जमशेदपुर न्यायपालिका जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर झारखंड उच्च न्यायालय के अन्य माननीय न्यायाधीशों और कई गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति भी रही। कार्यक्रम का उद्देश्य आम जनता को सुलभ, त्वरित और सस्ता न्याय उपलब्ध कराना तथा विधिक जागरूकता को बढ़ावा देना था।
💻 पाकुड़ व्यवहार न्यायालय से वर्चुअल माध्यम से जुड़ा कार्यक्रम
इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम से पाकुड़ व्यवहार न्यायालय स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल से भी अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। यहां से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए।
कार्यक्रम में न्यायपालिका के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक, अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संजीत कुमार चंद्र, डालसा सचिव रूपा बंदना किरो, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विशाल मांझी तथा अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी सदिश उज्जवल बेक शामिल रहे। सभी अधिकारियों ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में भाग लेकर इसकी सफलता में अपनी सहभागिता निभाई।
⚖️ मामलों के निस्तारण के लिए आठ बेंचों का गठन
राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों का त्वरित और सौहार्दपूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए कुल आठ बेंचों का गठन किया गया था। इन बेंचों के माध्यम से विभिन्न प्रकार के मामलों को सुलह और समझौते के आधार पर निपटाने की प्रक्रिया अपनाई गई।
लोक अदालत में विशेष रूप से पारिवारिक विवाद (तलाक और भरण-पोषण), बैंक ऋण से संबंधित मामले, चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना दावा मामले तथा सुलहनीय आपराधिक मामले जैसे विवादों को प्राथमिकता के आधार पर लिया गया। इन मामलों को आपसी सहमति और समझौते के जरिए सुलझाने का प्रयास किया गया ताकि दोनों पक्षों को शीघ्र न्याय मिल सके।
📊 16 हजार से अधिक मामलों का हुआ सफल निष्पादन
इस राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार कुल 16 हजार 279 वादों का सफल निष्पादन किया गया। यह निस्तारण पूरी तरह आपसी सहमति और सुलह समझौते के आधार पर किया गया, जिससे कई लंबित मामलों का समाधान एक ही दिन में संभव हो सका।
इतनी बड़ी संख्या में मामलों के निपटारे से न केवल न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम हुआ, बल्कि आम लोगों को भी त्वरित न्याय प्राप्त करने का अवसर मिला।
8 करोड़ 64 लाख से अधिक राशि का हुआ समझौता
लोक अदालत के दौरान मामलों के समाधान के साथ-साथ आर्थिक समझौते भी बड़ी संख्या में हुए। कुल मिलाकर लगभग 8 करोड़ 64 लाख 10 हजार 482 रुपये की राशि का समझौता कराया गया।
यह राशि विभिन्न मामलों के मुआवजा, बैंक ऋण निपटान और अन्य विवादों के समाधान के रूप में तय की गई। इससे संबंधित पक्षों को आर्थिक राहत मिलने के साथ-साथ लंबे समय से चले आ रहे विवादों का भी समाधान हो गया।
👥 अधिकारियों और आम लोगों की रही बड़ी भागीदारी
इस अवसर पर न्यायिक अधिकारियों के साथ-साथ विभागीय अधिकारी, वादी-प्रतिवादी, पैरा लीगल वॉलिंटियर्स और आम नागरिकों की भी बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। सभी ने मिलकर इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पैरा लीगल वॉलिंटियर्स ने लोगों को लोक अदालत की प्रक्रिया, उसके लाभ और सुलह-समझौते के महत्व के बारे में जानकारी दी, जिससे अधिक से अधिक लोग इस व्यवस्था का लाभ उठा सकें।
🌟 सुलभ और त्वरित न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लोगों को सरल, सस्ता और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। इस पहल के माध्यम से न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम होती है, बल्कि लोगों के बीच आपसी समझौते और सौहार्दपूर्ण समाधान को भी बढ़ावा मिलता है।
पाकुड़ में आयोजित इस राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक बार फिर यह साबित किया कि सहयोग और आपसी सहमति से बड़े से बड़े विवाद भी आसानी से सुलझाए जा सकते हैं, जिससे समाज में न्याय और विश्वास की भावना मजबूत होती है।


