झालसा के निर्देश पर पाकुड़ जेल में आयोजित हुआ विशेष जागरूकता शिविर
पाकुड़। समाज में बढ़ रही सामाजिक कुप्रथाओं, कानूनी अनभिज्ञता और अपराध के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) पाकुड़ की ओर से पाकुड़ मंडल कारा में विशेष विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम झालसा रांची के निर्देशानुसार आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य बंदियों को कानून की जानकारी देकर उन्हें जागरूक एवं सशक्त बनाना था।
कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडेय के निर्देश तथा डालसा सचिव रूपा बंदना किरो के मार्गदर्शन में किया गया। शिविर के दौरान बंदियों को कानून, उनके अधिकारों तथा समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ जागरूक किया गया।
नब्बे दिवसीय गहन विधिक जागरूकता अभियान के तहत हुआ आयोजन
यह कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा चलाए जा रहे नब्बे दिवसीय गहन विधिक जागरूकता अभियान के तहत आयोजित किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक कानूनी जानकारी पहुंचाना तथा लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना है।
शिविर में लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के चीफ सुबोध कुमार दफादार एवं डिप्टी चीफ संजीव कुमार मंडल ने संयुक्त रूप से बंदियों को कानून से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि कई बार कानून की जानकारी नहीं होने के कारण लोग अपराध, शोषण और सामाजिक कुप्रथाओं का शिकार हो जाते हैं।
डर, अशिक्षा और गरीबी से जन्म लेती हैं सामाजिक कुप्रथाएं
जागरूकता शिविर को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि समाज में फैली कई कुप्रथाओं की जड़ डर, सामाजिक दबाव, अशिक्षा और गरीबी होती है। जब तक इन समस्याओं को दूर नहीं किया जाएगा, तब तक दहेज प्रथा, बाल विवाह, बाल श्रम और डायन प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों को पूरी तरह समाप्त करना कठिन होगा।
उन्होंने कहा कि समाज को जागरूक बनाना और लोगों को शिक्षित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि लोग अपने अधिकारों और कानून की जानकारी रखेंगे, तो वे न केवल स्वयं को बल्कि अपने परिवार और पूरे समाज को भी सुरक्षित और सशक्त बना सकेंगे।
बाल विवाह, दहेज और बाल श्रम के खिलाफ कानून की दी गई जानकारी
शिविर में बंदियों को बताया गया कि बाल विवाह, दहेज प्रथा और बाल श्रम जैसे मामलों में कानून के तहत कड़ी सजा का प्रावधान है। वक्ताओं ने कहा कि इन कुप्रथाओं के खिलाफ सरकार लगातार अभियान चला रही है और समाज के लोगों की भागीदारी से ही इन बुराइयों को खत्म किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि कानूनी शिक्षा भी बेहद जरूरी है। कानून की जानकारी लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करती है और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का साहस देती है।
जागरूक नागरिक बनकर समाज को किया जा सकता है सशक्त
कार्यक्रम के दौरान बंदियों को यह भी समझाया गया कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यदि लोग जागरूक बनेंगे और कानून का पालन करेंगे तो समाज में अपराध और कुरीतियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
वक्ताओं ने कहा कि जागरूक नागरिक ही एक मजबूत और स्वस्थ समाज की नींव रखते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को कानून की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए।
कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारी और पैरा लीगल वॉलिंटियर्स रहे मौजूद
इस अवसर पर जेल प्रशासन के अधिकारी, पैरा लीगल वॉलिंटियर्स सायेम अली एवं मरियम पिंकी किस्कू सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर बंदियों को जागरूक करने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में सार्थक पहल करने पर बल दिया।


