🏛️ विशेष मध्यस्था अभियान का प्रभाव
पाकुड़। झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में चल रहे विशेष मध्यस्था अभियान के दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। इस अभियान की निगरानी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ शेष नाथ सिंह की अध्यक्षता में की जा रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम लगातार सामने आ रहे हैं।
👨⚖️ कुटुंब न्यायालय में वर्षों पुराना विवाद सुलझा
अभियान के तहत प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के समक्ष मूल भरण-पोषण वाद संख्या 77/2025 की सुनवाई हुई। यह मामला सामनुर खातून बनाम टिंकू शेख से संबंधित था, जो लंबे समय से अलग-अलग रह रहे थे। वर्षों पुराने मतभेदों और दूरियों को मिटाते हुए न्यायालय ने दोनों को फिर से एक मंच पर लाया।
❤️ मध्यस्था से दूरियां घटीं, दंपति ने साथ रहने का लिया निर्णय
न्यायालय में हुई खुली और संवेदनशील मध्यस्था के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी। रजनीकांत पाठक के धैर्यपूर्ण मार्गदर्शन, सतत संवाद और सकारात्मक प्रयासों के परिणामस्वरूप दंपति ने एक साथ रहने का निर्णय लिया। सबसे महत्वपूर्ण बात, दोनों ने अपनी सात वर्ष की बेटी के भविष्य को देखते हुए आपसी सहमति से घर-परिवार को फिर से बसाने का संकल्प लिया।
👨👩👧 बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए समझौता
मध्यस्था के दौरान न्यायाधीश ने दंपति को समझाते हुए कहा कि बच्चों का भविष्य, माता-पिता की एकता और परस्पर सम्मान में ही सुरक्षित है। उन्होंने दंपति को सलाह दी कि वे आपस में मिल-जुलकर रहें, छोटे-छोटे मतभेदों को बातचीत के माध्यम से सुलझाएं और खुशी-खुशी परिवार के साथ जीवन बिताएं।
📌 अधिवक्ताओं व कोर्ट कर्मियों की उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण समझौते और सकारात्मक परिणाम के साक्षी कोर्ट कर्मी एवं संबंधित अधिवक्ता भी रहे। सभी ने न्यायालय के इस प्रयास को सराहा, जिससे एक परिवार पुनः एकजुट हो सका।
यह सफलता न केवल न्यायालय की दक्षता और संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि मध्यस्था जैसी प्रक्रिया परिवारों को टूटने से बचाकर उन्हें एक नई शुरुआत दे सकती है।


