अभियान की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
पाकुड़। नालसा, नई दिल्ली एवं झालसा, रांची के निर्देशानुसार चलाए जा रहे “मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” अभियान के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ के तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण और मानवीय पहल देखने को मिली। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य विवादों का शांतिपूर्ण समाधान, परिवारों को टूटने से बचाना और न्यायालयों पर बढ़ते बोझ को कम करना है।
कार्यक्रम का नेतृत्व और मार्गदर्शन
यह संपूर्ण मध्यस्थता प्रक्रिया प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ – कुमार क्रांति प्रसाद की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
कार्यक्रम को सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार – रूपा बंदना किरो के सतत मार्गदर्शन में प्रभावी रूप से संचालित किया गया, जिससे मध्यस्थता की प्रक्रिया संवेदनशील, निष्पक्ष और परिणामोन्मुखी बनी रही।
दो महत्वपूर्ण मामलों का सफल समाधान
अभियान के अंतर्गत आज दो पारिवारिक मामलों का सफल सुलह-समझौता कराया गया। दोनों ही मामले पाकुड़ व्यवहार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय में लंबित मूल भरण-पोषण वाद से संबंधित थे।
पहला मामला – मूल भरण पोषण वाद संख्या 322/2025 – सूकतारा खातून बनाम जमीरुल शेख
दूसरा मामला – मूल भरण पोषण वाद संख्या 170/2025 – रेशमा खातून बनाम कोबीर हुसैन
छोटे बच्चों से जुड़ा भावनात्मक पक्ष
दूसरे मामले में दंपति के दो छोटे पुत्र हैं— पहला पुत्र तीन वर्ष छह माह का तथा दूसरा पुत्र दो वर्ष का है।
इन मामलों में वर्षों से पति-पत्नी अलग-अलग रह रहे थे, जिससे न केवल दंपति बल्कि मासूम बच्चों का भविष्य भी प्रभावित हो रहा था।
प्रधान न्यायाधीश की निर्णायक भूमिका
प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय – रजनीकांत पाठक के अथक प्रयास, संवेदनशील दृष्टिकोण और संवाद कौशल के माध्यम से दोनों मामलों में पति-पत्नी के बीच चल रहे आपसी मतभेदों को समाप्त किया गया।
लगातार संवाद, विश्वास बहाली और भावनात्मक समझ के जरिए दोनों पक्षों को एक-दूसरे की बात सुनने और समझने का अवसर मिला।
साथ रहने का संकल्प और नई शुरुआत
मध्यस्थता के बाद दोनों मामलों में पति-पत्नी ने पुराने मतभेद भुलाकर पुनः एक साथ रहने की सहमति दी।
दोनों पक्षों ने यह संकल्प लिया कि वे एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करेंगे, सौहार्दपूर्ण पारिवारिक जीवन व्यतीत करेंगे, तथा भविष्य में किसी भी प्रकार के वाद-विवाद से बचते हुए मिल-जुलकर रहेंगे।
टूटते रिश्तों को जोड़ने में मध्यस्थता की भूमिका
इस सफल पहल से यह स्पष्ट हुआ कि मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0 अभियान टूटते परिवारों को जोड़ने में एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है।
इन मामलों में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, मध्यस्थता अभियान, तथा दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही, जिनके सहयोग से घर में फिर से खुशियाँ लौट सकीं।
परिवार के लिए दिया गया प्रेरक संदेश
इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय – रजनीकांत पाठक ने दंपतियों को संदेश देते हुए कहा कि
संवाद, धैर्य और आपसी सम्मान ही किसी भी परिवार की सबसे बड़ी पूँजी है।
उन्होंने सभी को मतभेदों से बचकर, परिवार और समाज के साथ मिल-जुलकर जीवन जीने की प्रेरणा दी।
उपस्थित लोग और समापन
इस महत्वपूर्ण अवसर पर दोनों दंपतियों के परिजन, अधिवक्ता, तथा न्यायालय कर्मी उपस्थित रहे। सभी ने इस सफल मध्यस्थता को मानवीय न्याय की मिसाल बताते हुए सराहना की।
यह आयोजन यह साबित करता है कि कानून केवल दंड का माध्यम नहीं, बल्कि समझौते, करुणा और सामाजिक समरसता का भी सशक्त साधन है।


