📌 राष्ट्रीय अभियान के तहत पाकुड़ में प्रभावी पहल
“मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” अभियान के अंतर्गत आज जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ के तत्वावधान में तीन महत्वपूर्ण पारिवारिक मामलों का सफलतापूर्वक मध्यस्थता के माध्यम से निपटारा किया गया। यह पहल नालसा, नई दिल्ली तथा झालसा, रांची के निर्देशानुसार संचालित की जा रही है। अभियान का उद्देश्य लंबित पारिवारिक विवादों को आपसी सहमति से सुलझाकर समाज में सौहार्द एवं पारिवारिक एकता को मजबूत करना है।
इस विशेष पहल का संचालन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ दिवाकर पांडे के निर्देश पर किया जा रहा है। उनके मार्गदर्शन में यह अभियान जिले में सकारात्मक परिणाम दे रहा है।
⚖️ कुटुंब न्यायालय में चल रहे मामलों का हुआ समाधान
आज जिन मामलों में सुलह-समझौता कराया गया, वे सभी पाकुड़ व्यवहार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय में लंबित थे। पहला मामला मूल भरण-पोषण वाद संख्या 316/2025, आयेशा खातून बनाम जयनाल शेख से संबंधित था। इस दंपति के तीन पुत्र और एक पुत्री हैं। पारिवारिक मतभेद के कारण दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था।
दूसरा मामला मूल भरण-पोषण वाद संख्या 4/2026, मरियम खातून बनाम आसिकुल शेख का था, जिनका एक पुत्र है। पारिवारिक असहमति के चलते यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था।
तीसरा मामला मूल भरण-पोषण वाद संख्या 47/2025 का था, जिसमें दंपति वर्षों से अलग रह रहे थे। लंबे समय से चला आ रहा यह विवाद भी मध्यस्थता के माध्यम से सुलझा लिया गया।
🤝 प्रधान न्यायाधीश के प्रयास से मिटे आपसी मतभेद
इन सभी मामलों में प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के अथक प्रयासों से पति-पत्नी के बीच चल रहे आपसी मतभेद को समाप्त किया गया। मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों को संवाद के माध्यम से अपनी बात रखने का अवसर दिया गया।
सकारात्मक वातावरण में हुई वार्ता के बाद दोनों वादों में दंपतियों ने पुराने विवादों को भुलाकर पुनः एक साथ रहने की सहमति जताई। उन्होंने भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न करने तथा पारिवारिक जीवन को प्रेम और विश्वास के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
🏠 टूटते परिवार को मिला नया जीवन
मध्यस्थता प्रक्रिया के माध्यम से जो परिवार बिखरने की कगार पर थे, वे पुनः एक सूत्र में बंध गए। इस पहल से न केवल दंपतियों के जीवन में स्थिरता आई, बल्कि बच्चों के भविष्य को भी सुरक्षित दिशा मिली। यह पहल समाज में पारिवारिक एकता और सामाजिक समरसता की मिसाल बनकर सामने आई है।
इस सफल मध्यस्थता में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सक्रिय भूमिका रही। साथ ही दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने समझदारी और संवेदनशीलता के साथ पक्षकारों को समझाने का कार्य किया।
📢 परिवार को साथ लेकर चलने का दिया संदेश
मौके पर उपस्थित दंपतियों को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश रजनीकांत पाठक ने आपसी सम्मान, संवाद और धैर्य के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि परिवार समाज की मूल इकाई है और इसे टूटने से बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने दंपतियों को सलाह दी कि वे एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें, मतभेद होने पर बातचीत से समाधान निकालें और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को प्राथमिकता दें।
🏛️ प्रशासनिक निगरानी में चल रहा अभियान
यह अभियान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ दिवाकर पांडे के निर्देश पर संचालित किया जा रहा है तथा इसकी निगरानी डालसा सचिव रूपा बंदना किरो के देखरेख में की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक मामलों का समाधान न्यायालय के बाहर आपसी सहमति से किया जाए, जिससे समय और संसाधनों की बचत हो सके।
👥 अधिवक्ताओं और परिजनों की रही उपस्थिति
मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान दंपतियों के परिजन तथा दोनों पक्षों के अधिवक्ता उपस्थित रहे। इस अवसर पर अधिवक्ता प्रोसेनजीत चौबे, मधुसूदन पाल, अब्दुल हन्नान एवं मो बोजले अहमद भी मौजूद थे। सभी ने मिलकर सकारात्मक वातावरण बनाने में सहयोग दिया।
🌟 समाज में बढ़ रहा मध्यस्थता का महत्व
“मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” अभियान यह साबित कर रहा है कि संवाद और समझदारी से जटिल पारिवारिक विवादों का समाधान संभव है। यह पहल न केवल न्यायिक प्रक्रिया को सरल बना रही है, बल्कि समाज में सौहार्द और स्थिरता को भी बढ़ावा दे रही है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की इस सफल पहल से यह स्पष्ट है कि यदि सही मार्गदर्शन और संवेदनशील प्रयास किए जाएं, तो टूटते रिश्तों को फिर से जोड़ा जा सकता है और घरों में खुशियां लौटाई जा सकती हैं।


