Sunday, June 21, 2026
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एडिटर इन चीफ
धर्मेन्द्र सिंह

⚖️🧘‍♂️ व्यवहार न्यायालय परिसर में योग का संदेश, न्यायिक पदाधिकारियों ने कहा— स्वस्थ शरीर में ही बसता है स्वस्थ मन

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर व्यवहार न्यायालय में विशेष कार्यक्रम का आयोजन

पाकुड़। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा), रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पाकुड़ के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर व्यवहार न्यायालय परिसर में एक विशेष योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार कुमार क्रांति प्रसाद ने की।

इस अवसर पर न्यायिक पदाधिकारियों, न्यायालय कर्मियों, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के सदस्यों तथा पारा लीगल वॉलंटियर्स ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए योग के महत्व को समझा और इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार कुमार क्रांति प्रसाद, प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक, डालसा सचिव रूपा बंदना किरो, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विशाल मांझी, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी सदिश उज्ज्वल बेक, प्रभारी न्यायाधीश विजय कुमार दास तथा लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के चीफ सुबोध कुमार दफादार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के संदेश के साथ हुई, जहां उपस्थित लोगों को योग के माध्यम से बेहतर जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर दिया गया जोर

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, अनियमित दिनचर्या और बदलती जीवनशैली के कारण लोगों को अनेक शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में योग एक प्रभावी और सरल उपाय के रूप में सामने आया है।

न्यायिक पदाधिकारियों ने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने की एक वैज्ञानिक पद्धति है। नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को स्वस्थ, ऊर्जावान और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से प्रतिदिन योग करने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की।

योग प्रशिक्षक ने बताए योग के अनेक लाभ

कार्यक्रम के दौरान योग प्रशिक्षक महादेव घोष ने उपस्थित लोगों को विभिन्न प्रकार के योगासन और प्राणायाम का अभ्यास कराया। उन्होंने योग के वैज्ञानिक महत्व, इसके स्वास्थ्य लाभ और नियमित अभ्यास से होने वाले सकारात्मक प्रभावों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि प्रतिदिन मात्र 45 मिनट योग करने से व्यक्ति अनेक प्रकार की बीमारियों से बच सकता है। योग शरीर को लचीला बनाता है, मानसिक तनाव कम करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

विभिन्न योगासनों का कराया गया अभ्यास

योग प्रशिक्षक द्वारा प्रतिभागियों को कई महत्वपूर्ण योगासनों का अभ्यास कराया गया। इनमें ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भद्रासन, वक्रासन, मकरासन, भुजंगासन तथा सेतुबंधासन सहित अन्य योगासन शामिल रहे।

प्रत्येक योगासन की विधि, उसके लाभ और अभ्यास के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह और एकाग्रता के साथ योगाभ्यास किया तथा प्रशिक्षक के निर्देशों का पालन करते हुए विभिन्न आसनों का अभ्यास किया।

‘स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का वास’ का दिया गया संदेश

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है। यदि व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ रहेगा तो वह मानसिक रूप से भी सशक्त रहेगा और अपने कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संपादित कर सकेगा।

वक्ताओं ने कहा कि योग केवल रोगों से बचाव का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को तनावमुक्त, अनुशासित और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को योग को अपनी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए।

नियमित योग करने का लिया गया सामूहिक संकल्प

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के इस विशेष अवसर पर उपस्थित सभी न्यायिक पदाधिकारियों, न्यायालय कर्मियों, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के सदस्यों एवं पारा लीगल वॉलंटियर्स ने नियमित योग करने का सामूहिक संकल्प लिया।

सभी ने यह संकल्प दोहराया कि वे स्वयं भी योग को अपनाएंगे और समाज के अन्य लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे, ताकि एक स्वस्थ, सकारात्मक और तनावमुक्त समाज का निर्माण किया जा सके।

न्यायालय परिसर में योगमय वातावरण का हुआ निर्माण

पूरे कार्यक्रम के दौरान व्यवहार न्यायालय परिसर योगमय वातावरण से सराबोर रहा। योगाभ्यास के माध्यम से स्वास्थ्य, अनुशासन और आत्मिक शांति का संदेश दिया गया। कार्यक्रम ने यह साबित किया कि योग केवल एक दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि बेहतर और संतुलित जीवन जीने की जीवनशैली है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल स्वास्थ्य जागरूकता का माध्यम बना, बल्कि न्यायिक परिवार के बीच एकता, सकारात्मकता और स्वस्थ जीवन के प्रति प्रतिबद्धता का भी प्रतीक बनकर उभरा।

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