Sunday, June 21, 2026
HomePakur⚖️🏥 मंडल कारा में लगी जेल अदालत, बंदियों को मिली कानूनी राहत...
एडिटर इन चीफ
धर्मेन्द्र सिंह

⚖️🏥 मंडल कारा में लगी जेल अदालत, बंदियों को मिली कानूनी राहत की जानकारी और स्वास्थ्य जांच की सुविधा

देश प्रहरी की खबरें अब Google news पर

क्लिक करें

झालसा के निर्देश पर मंडल कारा में आयोजित हुआ विशेष शिविर

पाकुड़। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा), रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पाकुड़ के तत्वावधान में मंडल कारा, पाकुड़ में जेल अदालत सह चिकित्सीय जांच शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ कुमार क्रांति प्रसाद के निर्देश पर आयोजित किया गया, जिसमें बंदियों को कानूनी अधिकारों की जानकारी देने के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य की भी जांच की गई।

कार्यक्रम का उद्देश्य जेल में निरुद्ध बंदियों को न्यायिक प्रक्रियाओं, निःशुल्क कानूनी सहायता तथा स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं के प्रति जागरूक करना था, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग होकर उपलब्ध कानूनी प्रावधानों का लाभ उठा सकें।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर डालसा सचिव रूपा बंदना किरो, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) कुमार गौरव, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के चीफ सुबोध कुमार दफादार, डिप्टी चीफ मो. नुकुमुद्दीन शेख, संजीव कुमार मंडल तथा एलएडीसीएस के सहायक गंगाराम टुडू ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

कार्यक्रम में जेल प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक, मेडिकल टीम के सदस्य तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कर्मी भी उपस्थित रहे।

बंदियों को दी गई कानून और अधिकारों की महत्वपूर्ण जानकारी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डालसा सचिव रूपा बंदना किरो ने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों और न्यायिक प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को न्याय प्राप्त करने का अधिकार है और विधिक सेवा प्राधिकार का उद्देश्य समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद वर्गों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है।

उन्होंने बंदियों को विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि न्यायिक प्रक्रिया की सही जानकारी होने से वे अपने मामलों का बेहतर ढंग से सामना कर सकते हैं और उपलब्ध कानूनी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।

प्ली बार्गेनिंग के महत्व पर दिया गया विशेष जोर

कार्यक्रम के दौरान प्ली बार्गेनिंग (Plea Bargaining) विषय पर विशेष रूप से चर्चा की गई। सचिव रूपा बंदना किरो ने बंदियों को बताया कि छोटे और सुलहनीय अपराधों के मामलों में प्ली बार्गेनिंग एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था है, जिसके तहत अभियुक्त स्वेच्छा से अपना दोष स्वीकार कर न्यायालय से राहत प्राप्त कर सकता है।

उन्होंने बताया कि प्ली बार्गेनिंग के माध्यम से सजा में कमी, वादों का त्वरित निपटारा, जेल से शीघ्र रिहाई तथा समय और संसाधनों की बचत जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं प्राप्त हो सकती हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी विस्तार से बताया कि किन-किन मामलों में प्ली बार्गेनिंग लागू होती है और इसके लिए आवेदन करने की प्रक्रिया क्या है।

एसडीपीओ ने बंदियों से जाना लंबित मामलों का हाल

कार्यक्रम के दौरान अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी कुमार गौरव ने भी बंदियों से संवाद स्थापित किया। उन्होंने जेल में निरुद्ध बंदियों से उनके लंबित मामलों की जानकारी ली और उनसे जुड़ी समस्याओं को सुना।

उन्होंने बंदियों को आश्वस्त किया कि उनके मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए आवश्यक स्तर पर पहल की जाएगी। साथ ही उन्होंने कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति विश्वास बनाए रखने की अपील की।

निःशुल्क कानूनी सहायता और जमानत कानून की दी गई जानकारी

इस अवसर पर लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के डिप्टी चीफ मो. नुकुमुद्दीन शेख तथा संजीव कुमार मंडल ने संयुक्त रूप से बंदियों को निःशुल्क कानूनी सहायता योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद व्यक्तियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने जमानत संबंधी महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों, अधिकारों तथा प्रक्रिया की भी जानकारी दी, जिससे बंदियों को अपने मामलों को समझने में सहायता मिल सके।

चिकित्सीय जांच शिविर में हुई स्वास्थ्य की जांच

कार्यक्रम के दूसरे चरण में चिकित्सीय जांच शिविर का आयोजन किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा जेल में निरुद्ध बंदियों की स्वास्थ्य जांच की गई। इस दौरान ब्लड प्रेशर (बीपी), शुगर स्तर सहित अन्य आवश्यक स्वास्थ्य परीक्षण किए गए।

चिकित्सकों ने बंदियों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को सुना और आवश्यक परामर्श प्रदान किया। गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित बंदियों के लिए आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी चर्चा की गई।

स्वास्थ्य और न्याय दोनों पर दिया गया समान महत्व

इस विशेष शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें बंदियों के लिए कानूनी जागरूकता और स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों पहलुओं पर समान रूप से ध्यान दिया गया। एक ओर उन्हें न्यायिक प्रक्रियाओं और कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई, वहीं दूसरी ओर उनके स्वास्थ्य की जांच कर बेहतर जीवन और उपचार की दिशा में प्रयास किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम बंदियों के पुनर्वास, जागरूकता और मानसिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में सहायक होते हैं।

बंदियों के हित में लगातार जारी हैं जागरूकता कार्यक्रम

जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा समय-समय पर जेलों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य बंदियों को उनके अधिकारों, कानूनी सुविधाओं और सरकारी योजनाओं की जानकारी देना होता है। मंडल कारा, पाकुड़ में आयोजित यह जेल अदालत सह चिकित्सीय जांच शिविर भी इसी श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता एवं स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि बंदियों को न्यायिक सहायता, स्वास्थ्य सुविधाएं और आवश्यक मार्गदर्शन समय पर उपलब्ध कराया जा सके।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments