जब सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, एक विचार का होता है…
पाकुड़। हर पेशे की अपनी पहचान होती है, लेकिन चिकित्सा एक ऐसा दायित्व है, जहां किसी की मुस्कान, किसी परिवार की उम्मीद और किसी जिंदगी की वापसी डॉक्टर के निर्णय और समर्पण पर निर्भर करती है। ऐसे ही समर्पित चिकित्सकों के योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर O2 Hospital द्वारा एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
इस समारोह में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के उन चिकित्सकों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने चिकित्सा सेवा को केवल आजीविका नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम बनाया है।
डॉ. देवकांत ठाकुर को मिला सम्मान, वर्षों की सेवा को मिली नई पहचान
सम्मान समारोह के दौरान डॉ. देवकांत ठाकुर को चिकित्सा क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान, मरीजों के प्रति समर्पित सेवा और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के लिए स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) प्रदान कर सम्मानित किया गया।
यह सम्मान केवल मंच पर मिली एक ट्रॉफी नहीं था, बल्कि उन अनगिनत मरीजों के विश्वास की सार्वजनिक स्वीकृति थी, जिनके लिए एक डॉक्टर सिर्फ इलाज करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि मुश्किल समय में सबसे बड़ा सहारा होता है।
डॉ. बिधान चंद्र राय की विरासत को किया गया नमन
कार्यक्रम भारत के महान चिकित्सक, शिक्षाविद् और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र राय की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। उनके सम्मान में प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को पूरे देश में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है।
यह दिन केवल डॉक्टरों को शुभकामनाएं देने का अवसर नहीं, बल्कि यह समझने का भी दिन है कि स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी वही लोग हैं, जो हर परिस्थिति में मरीज के जीवन को प्राथमिकता देते हैं।
‘यह सम्मान मेरा नहीं, मेरे मरीजों के विश्वास का है’
सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. देवकांत ठाकुर ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके अकेले की नहीं है। उन्होंने इस सम्मान को अपने सभी मरीजों, शुभचिंतकों और सहयोगियों के विश्वास, सहयोग और स्नेह को समर्पित किया।
उन्होंने O2 Hospital के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार का सम्मान हर चिकित्सक को और अधिक जिम्मेदारी और समर्पण के साथ समाज की सेवा करने की प्रेरणा देता है। साथ ही उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि भविष्य में भी उन्हें मानव सेवा के इस पवित्र दायित्व को पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाने की शक्ति मिलती रहे।
सीख की बात | सम्मान का सबसे बड़ा अर्थ
हर पुरस्कार सफलता का प्रमाण जरूर होता है, लेकिन वास्तविक सम्मान तब मिलता है, जब आपके काम की पहचान लोगों के विश्वास से बनती है। एक डॉक्टर की सबसे बड़ी उपलब्धि उसकी दीवार पर टंगा सम्मान-पत्र नहीं, बल्कि वह मरीज होता है जो स्वस्थ होकर मुस्कुराते हुए कहता है—“डॉक्टर साहब, अब मैं ठीक हूँ।”
यही संदेश राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस भी देता है कि पेशा चाहे कोई भी हो, यदि उसमें ईमानदारी, संवेदनशीलता और सेवा का भाव जुड़ जाए, तो वही कार्य समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है।


