Saturday, July 4, 2026
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एडिटर इन चीफ
धर्मेन्द्र सिंह

पाकुड़िया की छात्राओं ने लिया अंधविश्वास और बाल विवाह के खिलाफ संकल्प, 90 दिवसीय विधिक जागरूकता अभियान में कानून की मिली विस्तृत जानकारी

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📍पाकुड़िया: छात्राओं को कानून से जोड़ने की अनूठी पहल

पाकुड़। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा), रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पाकुड़ के तत्वावधान में 90 दिवसीय गहन विधिक जागरूकता एवं जनसंपर्क अभियान के तहत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, पाकुड़िया में एक व्यापक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार दिवाकर पांडेय के निर्देश तथा डालसा सचिव बंदना किरो के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। शिविर का उद्देश्य छात्राओं को उनके संवैधानिक अधिकारों, कानूनी सुरक्षा, महिला अधिकारों तथा समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध जागरूक बनाना था।

⚖️ कानून की जानकारी देकर जागरूक समाज बनाने पर दिया गया जोर

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि कानून की जानकारी ही नागरिकों की सबसे बड़ी शक्ति है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों से परिचित हो जाए तो समाज में होने वाले अनेक अपराधों और सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। छात्राओं से कहा गया कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार तथा समाज को भी कानूनी अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करें।

🚫 डायन प्रथा को बताया अमानवीय और दंडनीय अपराध

शिविर में लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के डिप्टी चीफ मो. नुकुमुद्दीन शेख ने डायन प्रथा जैसी सामाजिक कुरीति पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम के तहत किसी महिला को डायन कहना, उसके साथ मारपीट करना, मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना देना, सामाजिक रूप से अपमानित करना अथवा किसी भी प्रकार की हिंसक घटना को अंजाम देना गंभीर अपराध है, जिसके लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने छात्राओं को समझाया कि बीमारी, दुर्घटना या किसी भी प्रकार की प्राकृतिक घटना का संबंध डायन प्रथा से नहीं होता। ऐसे मामलों में ओझा-गुनी के चक्कर में पड़ने के बजाय प्रशिक्षित डॉक्टर से इलाज कराना ही सही और वैज्ञानिक उपाय है।

👩 महिलाओं को बनाया जाता है निशाना, अंधविश्वास से बचने की अपील

मो. नुकुमुद्दीन शेख ने कहा कि समाज में अक्सर महिलाओं, विशेषकर विधवा, अकेली रहने वाली महिलाओं अथवा संपत्ति की मालिक महिलाओं को निजी रंजिश, जमीन हड़पने या व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण डायन बताकर प्रताड़ित किया जाता है। यह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि मानवाधिकारों का भी गंभीर उल्लंघन है।

उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे अंधविश्वास, झूठी अफवाहों और सामाजिक कुरीतियों से दूर रहें तथा अपने आसपास भी लोगों को जागरूक करें, ताकि समाज को भय और अज्ञानता से मुक्त बनाया जा सके।

✋ छात्राओं ने ली शपथ, ‘न किसी को डायन कहेंगे, न कहने देंगे’

कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक क्षण तब आया, जब उपस्थित सभी छात्राओं, शिक्षिकाओं और प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे न स्वयं किसी महिला को डायन कहेंगे और न ही किसी अन्य व्यक्ति को ऐसा करने देंगे। साथ ही यदि कहीं इस प्रकार की घटना सामने आती है तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को सूचना देंगे।

इस शपथ के माध्यम से छात्राओं को सामाजिक जिम्मेदारी निभाने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया गया।

👧 बाल विवाह, दहेज और बाल श्रम कानूनों की दी गई विस्तृत जानकारी

शिविर में पैनल अधिवक्ता मीनू टुडू ने बाल विवाह, दहेज प्रथा तथा बाल श्रम जैसे गंभीर सामाजिक अपराधों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, दहेज निषेध अधिनियम तथा बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) कानून के तहत इन अपराधों के लिए कठोर कानूनी सजा का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने छात्राओं को समझाया कि शिक्षा ही बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाप्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। यदि कहीं बाल विवाह की सूचना मिले तो तत्काल संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकार को इसकी जानकारी दें।

🤝 बाल विवाह रोकने का लिया सामूहिक संकल्प

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी छात्राओं, शिक्षकों एवं अन्य प्रतिभागियों ने बाल विवाह के खिलाफ सामूहिक संकल्प लिया। सभी ने यह प्रण किया कि वे अपने आसपास होने वाले बाल विवाह को रोकने का प्रयास करेंगे तथा समाज में शिक्षा, समानता और महिला सम्मान को बढ़ावा देंगे।

📞 निःशुल्क कानूनी सहायता और नालसा योजनाओं की दी जानकारी

शिविर में छात्राओं को जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (नालसा) की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं तथा कानूनी अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

छात्राओं को बताया गया कि किसी भी प्रकार की कानूनी समस्या, महिला उत्पीड़न, बाल अधिकारों के उल्लंघन अथवा अन्य विधिक सहायता की आवश्यकता होने पर वे नालसा के टोल फ्री नंबर 15100 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा अपने क्षेत्र के पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLV) से भी निःशुल्क कानूनी मार्गदर्शन और सहायता प्राप्त की जा सकती है।

🏫 शिक्षिकाओं एवं पीएलवी की रही सक्रिय भागीदारी

इस जागरूकता कार्यक्रम में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, पाकुड़िया की वार्डेन असुन्ता मुर्मू, राखी चौधरी, विद्यालय की अन्य शिक्षिकाएं, पैरा लीगल वॉलंटियर्स प्रियंका झा, किंगसुक नाग, सीमा साहा, मल्लिका सरकार सहित बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। सभी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग दिया और छात्राओं को कानूनी रूप से जागरूक एवं आत्मनिर्भर बनाने के इस अभियान की सराहना की।

🌟 जागरूक छात्राएं ही सुरक्षित और सशक्त समाज की आधारशिला

कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि कानूनी जागरूकता केवल कानून जानने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में न्याय, समानता, महिला सम्मान, बाल अधिकारों की सुरक्षा और अंधविश्वास मुक्त वातावरण स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। ऐसी पहलें छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग नागरिक बनने के लिए प्रेरित करती हैं।

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