📍 डॉन बॉस्को स्कूल में आयोजित छात्र सम्मेलन में युवाओं को बताया राष्ट्र निर्माण का आधार
पाकुड़। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 125वें स्मरण पर्व के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा एवं भारतीय जनता युवा मोर्चा की ओर से डॉन बॉस्को स्कूल, पाकुड़ में संयुक्त रूप से छात्र सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों, उनके संघर्षमय जीवन तथा भारत की एकता एवं अखंडता के लिए दिए गए योगदान से अवगत कराना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और राष्ट्र सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
🎓 शिक्षण संस्थान बना राष्ट्रवादी विचारों का मंच
सम्मेलन में डॉन बॉस्को स्कूल के निदेशक शिव शंकर दुबे की गरिमामयी उपस्थिति रही। वहीं कार्यक्रम को संबोधित करने वालों में पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष अमृत पांडेय, महिला मोर्चा की प्राची चौधरी, भाजयुमो जिलाध्यक्ष दीपक साहा, पवन भगत एवं निधि गुप्ता शामिल रहे। सभी वक्ताओं ने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारियों और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
🗣️ डॉ. मुखर्जी का जीवन राष्ट्र समर्पण की मिसाल : अमृत पांडेय
अपने संबोधन में अमृत पांडेय ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्र की अखंडता, सांस्कृतिक स्वाभिमान, राष्ट्रीय एकता और जनसेवा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ऐसे दूरदर्शी राष्ट्रनायक थे, जिन्होंने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर देशहित को सर्वोच्च स्थान दिया। उनके विचार आज भी युवाओं को ईमानदारी, राष्ट्रभक्ति और समाज सेवा की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश के विकास में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। यदि युवा अपने इतिहास, संस्कृति और राष्ट्र के महान व्यक्तित्वों के जीवन से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ें, तो भारत विश्व मंच पर और अधिक सशक्त बन सकता है।
🗺️ देश के विभाजन के समय निभाई ऐतिहासिक भूमिका
अमृत पांडेय ने कहा कि देश के विभाजन के दौरान जब राजनीतिक परिस्थितियां अत्यंत चुनौतीपूर्ण थीं, तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका दृढ़ नेतृत्व और राष्ट्रहित के प्रति अटूट समर्पण उस समय देश की एकता को बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ। उन्होंने कहा कि इतिहास में ऐसे व्यक्तित्व विरले ही होते हैं, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करते।
🏔️ जम्मू-कश्मीर के लिए संघर्ष बना राष्ट्रीय एकता का प्रतीक
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सबसे बड़ा लक्ष्य एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत करना था। इसी सोच के तहत उन्होंने जम्मू-कश्मीर में लागू विशेष व्यवस्था का विरोध किया और देश में समान संवैधानिक व्यवस्था की वकालत की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे।” इसी विचारधारा के साथ उन्होंने जम्मू-कश्मीर की यात्रा की, जहां उन्हें गिरफ्तार कर नजरबंद कर दिया गया।
🕊️ बलिदान जिसने इतिहास में अमिट पहचान बनाई
अमृत पांडेय ने कहा कि नजरबंदी के दौरान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का निधन हो गया। उनका बलिदान केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने अपने जीवन की अंतिम सांस तक देश की एकता और अखंडता के लिए संघर्ष किया। उनका त्याग आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा।
📜 अनुच्छेद 370 और 35(ए) हटना बताया ऐतिहासिक निर्णय
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 एवं 35(ए) को समाप्त किया जाना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के लंबे संघर्ष और उनके सपनों को साकार करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम था। उन्होंने इसे उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताते हुए कहा कि इस निर्णय ने भारत की अखंडता को और अधिक मजबूती प्रदान की।
🌟 युवाओं को दिया जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश
सम्मेलन में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी विद्यार्थियों को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और देश के प्रति जिम्मेदार नागरिक तैयार करने का सबसे सशक्त माध्यम है। विद्यार्थियों से सामाजिक समरसता, अनुशासन, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ जीवन में आगे बढ़ने का आह्वान किया गया।
🤝 राष्ट्र सेवा का लिया संकल्प, देशभक्ति के संदेश के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित विद्यार्थियों ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों पर चलने, राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत बनाने तथा समाज के प्रति अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने का संकल्प लिया। पूरे सम्मेलन के दौरान राष्ट्रभक्ति का उत्साहपूर्ण माहौल बना रहा। आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं में राष्ट्रीय चेतना जागृत करने और उन्हें सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


