पाकुड़। जिंदगी में कई बार ऐसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जब हमें यह तो महसूस होता है कि हमारे साथ कुछ गलत हो रहा है, लेकिन यह पता नहीं होता कि उसके खिलाफ आवाज कहां उठाएं और कानून का सहारा कैसे लें। किसी युवा के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो सकती है। अधिकारों की जानकारी का अभाव कई बार व्यक्ति को उस जगह भी चुप करा देता है, जहां कानून उसकी आवाज बन सकता है।
इसी खामोशी को जागरूकता की आवाज देने की एक पहल पाकुड़ में की गई। झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पाकुड़ के तत्वावधान में सोमवार को पाकुड़ प्रखंड परिसर स्थित माय भारत युवा केंद्र में युवा विधिक सहायता माह के तहत विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडेय के निर्देश पर तथा डालसा सचिव रूपा बंदना किरो के मार्गदर्शन में हुआ। इसका केंद्रबिंदु केवल कानून की धाराओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि युवाओं को यह समझाना था कि अपने अधिकारों को जानना, उन्हें सुरक्षित रखने की दिशा में पहला कदम है।
कानून की किताब से निकलकर जिंदगी तक पहुंची बात
कार्यक्रम का उद्घाटन डालसा के पैरा लीगल वॉलंटियर कमला राय गांगुली, एएमपी के जिला प्रभारी डॉ. अजीजुर रहमान, माय भारत केंद्र के सहायक मो. नूर आलम, एंडेवर एकेडमी युवा क्लब की सचिव जयश्री सिंह और इंडियन नेशनल एसोसिएशन के अध्यक्ष जेड. एच. विश्वास ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
पैरा लीगल वॉलंटियर कमला राय गांगुली ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी के लिए कानूनी साक्षरता केवल एक अतिरिक्त जानकारी नहीं, बल्कि समय की आवश्यकता है। युवाओं को यह पता होना चाहिए कि कानून उन्हें कौन-कौन से अधिकार देता है और किसी कानूनी परेशानी की स्थिति में वे सहायता कहां से प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि युवा विधिक सहायता माह के माध्यम से कानूनी साक्षरता को बढ़ावा देने, कानून के साथ संघर्ष में फंसे किशोरों के अधिकारों की रक्षा करने और युवाओं को विधिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में युवाओं को यह भी जानकारी दी गई कि जरूरत पड़ने पर उन्हें सरल प्रक्रिया के माध्यम से नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। यानी आर्थिक कठिनाई किसी व्यक्ति को न्याय की राह से वंचित करने का कारण नहीं बननी चाहिए।
जब अधिकार पता हों तो डर कम होता है
कई युवा शिक्षा, रोजगार और भविष्य की चिंता के बीच अपने अधिकारों और कानूनी सुरक्षा को लेकर अनजान रह जाते हैं। वक्ताओं ने इसी पहलू पर जोर देते हुए कहा कि जागरूकता व्यक्ति को केवल अपने अधिकार मांगना नहीं सिखाती, बल्कि उसे अपनी जिम्मेदारियों को समझने का विवेक भी देती है।
इंडियन नेशनल एसोसिएशन के अध्यक्ष जेड. एच. विश्वास ने कहा कि शिक्षित युवा ही समाज को आगे ले जाने की वास्तविक ताकत हैं। खेल हो, स्वास्थ्य हो, रोजगार हो या सामाजिक विकास—हर क्षेत्र में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उनके संदेश का सार यही रहा कि युवा केवल अपने भविष्य के निर्माता नहीं, बल्कि समाज के भविष्य के भी निर्माता हैं।
नशे की गिरफ्त से बची युवा शक्ति ही बनाएगी मजबूत समाज
कार्यक्रम में युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से भी आगाह किया गया। एएमपी के जिला प्रभारी डॉ. अजीजुर रहमान ने युवाओं से नशे से दूर रहने और शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए अपने मौलिक अधिकारों और अपने हक के प्रति जागरूक रहना जरूरी है। नशे की लत केवल एक व्यक्ति की जिंदगी को प्रभावित नहीं करती, बल्कि उसके परिवार और समाज पर भी इसका असर पड़ता है।
यही वजह है कि युवा पीढ़ी को सही दिशा देना केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।
शिक्षा सिर्फ नौकरी तक पहुंचने का रास्ता नहीं
कार्यक्रम में शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम न मानकर व्यक्तित्व और विवेक के निर्माण का आधार बताया गया। माय भारत युवा केंद्र के सहायक मो. नूर आलम तथा एंडेवर एकेडमी के अध्यक्ष प्रिंस प्रकाश और सचिव जयश्री सिंह ने युवाओं को शारीरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत बनने के साथ शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ने और अपनी ऊर्जा को रचनात्मक दिशा में लगाने के लिए प्रेरित किया।
गांवों से आए युवाओं तक पहुंचा जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता फजर शेख, एंडेवर एकेडमी युवा क्लब के उदय कुमार, पैरा लीगल वॉलंटियर नीरज कुमार राउत समेत ग्रामीण क्षेत्रों से आए युवा शामिल हुए।
कार्यक्रम का व्यापक संदेश यही रहा कि कानून से अनजान रहना व्यक्ति को कमजोर कर सकता है, जबकि कानून की समझ उसे अपने अधिकारों के प्रति सजग नागरिक बनाती है।
आज का युवा यदि यह जानता है कि उसके अधिकार क्या हैं, कानूनी परेशानी में सहायता कहां मिलेगी, नशे से खुद को कैसे बचाना है और शिक्षा को अपने भविष्य की ताकत कैसे बनाना है, तो वह केवल अपने जीवन की दिशा नहीं बदलता—बल्कि समाज के बदलते कल की नींव भी रखता है।
क्योंकि बदलाव की शुरुआत हमेशा किसी बड़े मंच से नहीं होती। कई बार वह उस क्षण से शुरू होती है, जब एक युवा पहली बार यह जानता है—“मेरे अधिकार क्या हैं और मेरे लिए कानून क्या कर सकता है।”


