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गुलशन सिंह/बक्सर. सदर प्रखंड के जासो गांव की रहने वाली विधवा महिला कुंवर जहां बेगम किराने की दुकान और सिलाई मशीन चलाकर न केवल आत्मनिर्भर बनी है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए मिसाल पेश की है. कुंवर जहां बेगम का परिवार बेहद गरीब था. पति मो. मुख्तार अंसारी राजमिस्त्री का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते थे. लेकिन आठ साल पूर्व पति की आकस्मिक निधन से अचानक कुंवर जहां बेगम का परिवार असहाय हो गया और बच्चे भी पिता के प्यार से महरूम हो गए.
पति के गुजरने के बाद विपरीत परिस्थितियों में भी तीन मासूम बच्चों को अकेले संभालना और घर खर्च चलाना बेगम के लिए मुश्किल हो रहा था. जिसके बाद इस विधवा ने आस पड़ोस के घरों में बर्तन साफ कर जीवन-यापन करने लगी. हालांकि, इसी बीच बेगम को जीवन ज्योति जीविका महिला ग्राम संगठन द्वारा सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत दस हजार रुपए सहयोग राशि मुहैया कराई. इस राशि की मदद से किराना दुकान खोल ली. वही, गांव के प्रतिनिधियों ने इंदिरा आवास योजना से झोपड़ी के जगह विधवा का पक्का घर बनवा दिया. समय बीतने के साथ दुकान से आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ. वही, कुंवर जहां बेगम ने बताया कि उनके जीवन में जीविका ने बड़ा परिवर्तन लाया है.
दुकान के साथ कपड़े सिलने का भी काम करती हैं
कुंवर जहां बेगम ने 10 हजार रुपए से डेढ़ साल पूर्व किराना दुकान शुरू की थी, फिर जीविका से 20 हजार लोन लेकर सिलाई मशीन खरीदकर कपड़े सिलने लगी. वहीं, समय मिलने पर गांव-गांव घूमकर फेरी का काम भी करती है. बेगम ने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं, जो सरकारी विद्यालय में पढ़ाई करते है. महिला ने बताया कि महीने में 10-15 हजार रुपए बचत कर लेती है. आत्मनिर्भर बनने के बाद जीवन में काफी बदलाव आया है. पहले जहां दो वक्त के लिए रोटी जुटाना मुश्किल होता था. वहीं, अब स्थिति सुधर गई है.
जीविका के जिला प्रबंधक प्रवीण कुमार ने बताया कि सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत समाज में अत्यंत निर्धन परिवार का चयन कर उन्हें स्वरोजगार करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है. उसी का उदाहरण कुंवर जहां बेगम है जो सतत जीविकोपार्जन योजना का लाभ लेकर स्वावलंबी बनी है.
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Tags: Buxar news, Jharkhand news, Local18, Women Empowerment
FIRST PUBLISHED : July 16, 2023, 15:31 IST
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