बाल विवाह, साइबर अपराध, सड़क सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार पर दी गई जानकारी
पाकुड़: झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा), रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पाकुड़ के तत्वावधान में 90 दिवसीय आउटरीच कार्यक्रम के तहत हरिणडंगा पूर्वी मध्य विद्यालय समेत अन्य विद्यालयों में विधिक जागरूकता अभियान चलाया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़, शेष नाथ सिंह के निर्देशानुसार किया गया।
इस जागरूकता अभियान का आयोजन अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सह प्रभारी सचिव, डालसा, विशाल मांझी के मार्गदर्शन में किया गया। इस दौरान पैरा लीगल वॉलंटियर्स (पीएलवी) कमला राय गांगुली, अमूल्य रत्न रविदास और एजारूल शेख ने संयुक्त रूप से बाल विवाह, साइबर अपराध, सड़क सुरक्षा, डायन प्रथा और शिक्षा के अधिकार से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों को जागरूक किया।
बाल विवाह के दुष्परिणामों पर दी गई जानकारी
कार्यक्रम के दौरान बाल विवाह की गंभीरता और इसके दुष्परिणामों पर विशेष चर्चा की गई। पीएलवी ने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के की शादी गैरकानूनी है। उन्होंने बाल विवाह से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्परिणामों पर भी प्रकाश डाला।
इसके साथ ही, बच्चों को कानूनी अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई, जिससे वे किसी भी प्रकार के अन्याय और शोषण के खिलाफ आवाज उठा सकें।
साइबर अपराध से बचाव के लिए दिए गए महत्वपूर्ण सुझाव
आज के डिजिटल युग में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, इसको ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम में विद्यार्थियों और अभिभावकों को साइबर अपराध के खतरों और उससे बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया गया।
पीएलवी ने ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया के दुरुपयोग, फिशिंग, हैकिंग और साइबर बुलिंग जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि अज्ञात लिंक पर क्लिक करने से बचें, पासवर्ड साझा न करें, सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से बातचीत से बचें और साइबर अपराध से संबंधित किसी भी समस्या पर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।
सड़क सुरक्षा के नियमों पर जागरूकता अभियान
कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा नियमों पर भी विशेष रूप से चर्चा की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि ट्रैफिक नियमों का पालन न करने से सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि हो रही है। पीएलवी ने हेलमेट और सीट बेल्ट पहनने, ट्रैफिक सिग्नल का पालन करने, मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करने और निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाने जैसे नियमों का पालन करने की अपील की।
उन्होंने बताया कि बिना लाइसेंस के वाहन चलाना कानूनन अपराध है और इसके लिए दंड का प्रावधान है। उन्होंने विद्यार्थियों को ट्रैफिक नियमों का पालन करने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।
डायन प्रथा उन्मूलन पर जागरूकता अभियान
कुछ क्षेत्रों में अब भी डायन प्रथा जैसी सामाजिक कुरीति प्रचलित है, जिसे समाप्त करने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि डायन प्रथा कानूनन अपराध है और इसके तहत दोषियों को सख्त सजा दी जाती है।
पीएलवी ने बताया कि डायन प्रथा (प्रतिषेध) अधिनियम, 2001 के तहत किसी महिला को डायन कहना, प्रताड़ित करना या हिंसा करना गंभीर अपराध है। उन्होंने बच्चों को समझाया कि अंधविश्वास के चक्कर में न पड़ें और यदि कहीं ऐसा कोई मामला सामने आए, तो तुरंत पुलिस या जिला प्रशासन को सूचित करें।
शिक्षा के अधिकार पर विस्तृत जानकारी
शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है। इस संदर्भ में पीएलवी ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act, 2009) के तहत मिलने वाले निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के प्रावधानों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को मुफ्त शिक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है। अगर किसी बच्चे को स्कूल से बाहर रखा जाता है या फीस की मांग की जाती है, तो इसकी शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी या विधिक सेवा प्राधिकरण में की जा सकती है।
अन्य प्रखंडों में भी चला जागरूकता अभियान
अन्य प्रखंडों में भी जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के द्वारा जागरूकता अभियान चलाया गया। पीएलवी जयंती कुमारी और चंदन रविदास ने लोगों को जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ से मिलने वाली निशुल्क कानूनी सहायता के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि गरीब, वंचित, पीड़ित और जरूरतमंद लोगों को कानूनी सहायता निःशुल्क प्रदान की जाती है। यदि किसी व्यक्ति को न्याय पाने में कठिनाई हो रही हो, तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर सकता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा चलाए गए इस 90 दिवसीय आउटरीच कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनता को उनके कानूनी अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी देना था।
इस जागरूकता अभियान के जरिए विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों को बाल विवाह, साइबर अपराध, सड़क सुरक्षा, डायन प्रथा उन्मूलन और शिक्षा के अधिकार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं।
इसके अलावा, निशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त करने के तरीकों पर भी विशेष जानकारी दी गई, जिससे जरूरतमंद लोग अपने अधिकारों की रक्षा कर सकें और न्याय प्राप्त कर सकें।
इस अभियान से लोगों में कानूनी जागरूकता बढ़ेगी और समाज में व्याप्त कुरीतियों व अपराधों को रोकने में मदद मिलेगी।