Tuesday, March 31, 2026
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एडिटर इन चीफ
धर्मेन्द्र सिंह

अगस्त के पहले सप्ताह में धान रोपनी करते किसान रखे इस बात का खास ख्याल

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शशिकांत ओझा/पलामू. जिला हमेशा से सूखा प्रभावित जिला रहा है. वर्ष 2022 में पलामू के किसान सूखा की मार झेल चुके है. वहीं इस वर्ष जून और जुलाई महीने में सामान्य से काफी कम वर्षा से किसान परेशान हो गए थे. क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में लगे वर्षापात मापन यंत्र में जून महीने में जहां 80 एमएल वर्षा और जुलाई के महीने में 70 एमएल ही वर्षा दर्ज किया गया है. जिससे पलामू के किसान काफी परेशान हो गए थे. अगस्त महीने शुरू होते ही मौसम ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला दिया है. सभी किसान धान रोपने की तैयारी में लग गए है. वहीं कुछ किसान धान की रोपाई भी कर चुके है.

क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक प्रमोद कुमार ने लोकल 18 को बताया की वर्षा नहीं होने से किसान काफी परेशान थे. वहीं बुधवार को 55 एमएल वर्षा होने से किसानों के लिए खुशी की खबर है. टड़ीहन के साथ किसान धान की रोपाई कर सकते हैं. अगस्त के पहले सप्ताह में बेहतर वर्षा के संकेत है. वहीं जिन किसानों का बिचड़ा ज्यादा दिन का हो गया है. उनके फसल प्रभावित न हो इसके लिए वो एक साथ 2 से 4 बिचड़े को एक साथ लगाए. इससे फसल बरबाद होने के कम चांस बनेंगे. हालाकि पुराना बिचड़ा होने से किसान के फसल तो प्रभावित होगा ही मगर इस विधि से किसान के फसल कम खराब होंगे. साथ हीं किसान घास पर काबू कर पाए तो उनका फसल अच्छा हो सकेगा.

धान की कर सकते है सीधी बुआई
उन्होंने बताया की किसान भाई धान की सीधी बुआई भी कर सकते है. जो धान 90 से 120 दिन के अंदर तैयार होता है. ऐसे धान की बुआई किसान करे.तो कम वर्षा में हीं उनकी फसल तैयार हो जायेगी. विश्व के अन्य देशों के मुकाबले भारत में धान की बुआई 10त्न होती है. 90त्न जो अन्य देशों में धान की बुआई करने की विधि सीधी बुआई ही है. क्योंकि धान की खेती करने में ज्यादा खर्च होता है और उत्पादन भी कम होता है. अगर किसान घास की समस्या को नियंत्रण कर लेते है तो रोपा की तुलना में फसल बेहतर हो सकता है. इसके लिए रासायनिक या अन्य विधि का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

टांड़ वाली फसल के लिए वरदान
उन्होंने बताया की टांड़ वाली फसलों बेहतर वर्षा हो चुकी है. इस वर्षा से मक्का, तिल, अरहर, और अन्य फसल बेहतर तैयार हो सकता है. वही मक्का के फॉल आर्मी वॉर्म किट ज्यादा देखने को मिलता है. जो की मक्के के फसल को नष्ट कर देता है. ये किट दो से तीन दिनों में फसल को बरबाद कर देते है. तो इसके लिए कोराजन या अमामेक्टिबेजो दावा को 0.6 से 0.8 एम एल प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करे तो फसल का बचाव किया जा सकता है.

Tags: Agriculture, Jharkhand news, Local18, Palamu news

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