फाइलेरिया से बचाव के लिए विशेष अभियान
पाकुड़। भारत सरकार द्वारा फाइलेरिया रोग के उन्मूलन और बचाव के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को इस गंभीर बीमारी से बचाना और इसके संक्रमण को पूरी तरह समाप्त करना है। इसी के तहत 10 फरवरी से 25 फरवरी तक पूरे देश में फाइलेरिया से बचाव हेतु दवा खिलाई जा रही है। इस अभियान के तहत विद्यालयों और घर-घर जाकर डी.ई.सी. एवं ऑलवेंडाजोल की निशुल्क दवा दी जा रही है ताकि लोग इस बीमारी से सुरक्षित रह सकें।
संत पॉल विद्यालय में दवा वितरण
अभियान के अंतर्गत सोमवार को स्थानीय संत पॉल विद्यालय, धनुषपूजा, पाकुड़ में सभी बच्चों को फाइलेरिया एवं कृमि से बचाव हेतु दवा खिलाई गई। यह कार्य एएनएम सबीना मरांडी और रूमी मंडल के नेतृत्व में किया गया। बच्चों को डी.ई.सी. और ऑलवेंडाजोल की दवा निर्धारित मात्रा में दी गई ताकि वे किसी भी संभावित संक्रमण से सुरक्षित रह सकें।
फाइलेरिया: एक गंभीर लेकिन बचाव योग्य बीमारी
इस अवसर पर संत पॉल विद्यालय के निदेशक गाब्रियल मुर्मू ने फाइलेरिया के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया एक मच्छर जनित बीमारी है, जो संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलती है। इस बीमारी का सबसे बड़ा प्रभाव हाथ-पैरों में सूजन के रूप में देखा जाता है, जिसे आमतौर पर ‘हाथी पांव’ कहा जाता है। उन्होंने बताया कि एक बार यह बीमारी हो जाने के बाद इसका इलाज बेहद कठिन हो जाता है और इससे व्यक्ति को जीवनभर संघर्ष करना पड़ता है।
फाइलेरिया के संक्रमण को पहचानने में लगभग 10 वर्ष का समय लग सकता है, और तब तक रोगी की स्थिति गंभीर हो जाती है। इसलिए इस बीमारी से बचाव के लिए दवा का सेवन अत्यंत आवश्यक है। अगर लोग पहले से ही यह दवा ले लें, तो मच्छर के काटने के बावजूद वे इस संक्रमण से बच सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हर साल इस दवा का सेवन करने से इस घातक बीमारी से पूरी तरह बचा जा सकता है।
बच्चों और शिक्षकों में जागरूकता
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के प्राचार्या सुनीता हांसदा, उप प्राचार्या बिनीता हेंब्रम सहित अन्य शिक्षक एवं स्टाफ उपस्थित थे। उन्होंने बच्चों को फाइलेरिया और कृमि संक्रमण से बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान छात्रों को बताया गया कि स्वच्छता बनाए रखना, नियमित रूप से दवा लेना और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना इस बीमारी से बचने के सबसे प्रभावी तरीके हैं।
फाइलेरिया उन्मूलन में जनसहभागिता जरूरी
फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को सफल बनाने के लिए जनसहभागिता बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लगातार लोगों को इस बीमारी और इसके बचाव के प्रति जागरूक कर रहे हैं। लोगों से अपील की गई कि वे स्वयं भी यह दवा लें और अपने परिवार तथा समुदाय के अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें। यदि समाज के हर व्यक्ति को इस बीमारी के बारे में जानकारी होगी और वे समय पर दवा लेंगे, तो आने वाले वर्षों में भारत को फाइलेरिया मुक्त बनाया जा सकता है।
इस अभियान से सैकड़ों बच्चों और नागरिकों को लाभ मिल रहा है, और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति इस बीमारी के प्रभाव में न आए। सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से इस अभियान को सफल बनाने की पूरी कोशिश की जा रही है ताकि समाज के हर वर्ग को स्वस्थ और सुरक्षित रखा जा सके।