पाकुड़ जिले में वन अपराध के खिलाफ चल रही मुहिम में वन विभाग ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। दिनांक 03 अप्रैल, 2025 को रात्रि 07:15 बजे गश्ती के दौरान एक महिंद्रा ट्रैक्टर और उस पर लदी ताजा कटी मिश्रित लकड़ी को बिना परिवहन अनुज्ञा पत्र के पकड़ा गया। यह घटना भटिंडा से कनकपुर मुख्य पथ पर हुई, जहां थाना प्रभारी महेशपुर ने इस अवैध गतिविधि को रंगे हाथों पकड़ा। हालांकि, चालक अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। इस कार्रवाई से क्षेत्र में सक्रिय वन माफिया के खिलाफ वन विभाग की सख्ती एक बार फिर जाहिर हुई है।
घटना का विवरण: ट्रैक्टर और लकड़ी की जब्ती
रात्रि गश्ती के दौरान पकड़े गए इस महिंद्रा ट्रैक्टर का चेसिस नंबर ES3A85D320R52800, सीरियल नंबर 41918792, और इंजन नंबर Mahindra-06505439C1 DG054A UI दर्ज किया गया। ट्रैक्टर पर लदी 30 अदद मिश्रित लकड़ी बिना किसी वैधानिक अनुमति के परिवहन की जा रही थी। सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और विधिवत रूप से ट्रैक्टर (नंबर JH17G6154) और बिना नंबर वाली ट्रॉली सहित लकड़ी को जब्त कर लिया। जब्त सामग्री को पहले थाना परिसर महेशपुर लाया गया, जहां इसे सुरक्षा के लिए रखा गया। इसके बाद, दिनांक 04 अप्रैल, 2025 को ट्रैक्टर, ट्रॉली और लकड़ी को पाकुड़ वन प्रक्षेत्र कार्यालय परिसर में सुरक्षित रखा गया।
अपराधी की पहचान में चुनौती: फर्जी नंबर का खुलासा
जब्त किए गए ट्रैक्टर पर अंकित निबंधन संख्या JH17G6154 की जांच मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए की गई तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। यह नंबर ट्रैक्टर का नहीं, बल्कि एक मोटरसाइकिल का निकला। इस खुलासे से साफ हो गया कि अपराधी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी नंबर का इस्तेमाल किया था। नतीजतन, तत्काल किसी भी अपराधी का नाम प्रकाश में नहीं आ सका। वन विभाग ने इसे एक सुनियोजित साजिश के तौर पर देखते हुए मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने वन माफिया की चालाकी और उनके अपराध के तरीकों को उजागर किया है।
कानूनी कार्रवाई: भारतीय वन अधिनियम के तहत कार्रवाई
इस अवैध परिवहन को भारतीय वन अधिनियम, 1927 (बिहार संशोधन अधिनियम 9/1990) की धारा-41 और 42 के साथ-साथ झारखंड वनोपज (अभिवहन का विनियमन) नियमावली, 2020 की धारा 18(घ) का उल्लंघन माना गया। इसके तहत धारा-52(क) के आधार पर जब्ती की कार्रवाई की गई। अज्ञात अपराधी के खिलाफ यह कार्रवाई वन विभाग की सख्त नीति का हिस्सा है। विभाग ने स्पष्ट किया कि इस मामले की जांच जारी है और दोषियों को जल्द से जल्द कानून के दायरे में लाया जाएगा। यह कदम वन संपदा की लूट को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
वन माफिया के खिलाफ अभियान: छापेमारी तेज
पाकुड़ में वन माफिया के खिलाफ वन विभाग ने अपनी कमर कस ली है। इस घटना के बाद क्षेत्र में लगातार छापेमारी और गश्ती को तेज कर दिया गया है। विभाग का लक्ष्य इन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजना है। गश्ती दल की कमान रामचंद्र पासवान, वन क्षेत्र पदाधिकारी, पाकुड़ ने संभाली है। उनके नेतृत्व में नंद कुमार दास (वनपाल), संजीव कर्मकार, बचन यादव, और गृहरक्षक सुजीत पांडे व किशन यादव सहित अन्य वनकर्मी इस अभियान में शामिल हैं। यह टीम दिन-रात क्षेत्र में सक्रिय रहकर वन अपराध को रोकने के लिए प्रयासरत है।
वन विभाग की प्रतिबद्धता: जंगल की सुरक्षा पहली प्राथमिकता
यह घटना पाकुड़ में वन माफिया की बढ़ती गतिविधियों का संकेत है, लेकिन वन विभाग ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि जंगल और उसकी संपदा की रक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है। इस कार्रवाई के जरिए विभाग ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वन अपराध करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। जांच के दौरान अगर कोई सुराग मिलता है, तो अपराधियों को तुरंत गिरफ्तार कर सख्त सजा दिलाई जाएगी।
आगे की राह: जांच और सतर्कता
फिलहाल इस मामले में जांच जारी है। वन विभाग ट्रैक्टर के मालिक और चालक की पहचान के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। साथ ही, क्षेत्र में गश्ती को और सघन किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। यह कार्रवाई न केवल वन माफिया के लिए एक चेतावनी है, बल्कि आम जनता के लिए भी यह संदेश है कि वन संपदा की सुरक्षा में सभी की भागीदारी जरूरी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की उम्मीद है।