नब्बे दिवसीय विधिक जागरूकता अभियान के तहत आयोजन
पाकुड़। जिले में झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ के तत्वाधान में नब्बे दिवसीय आउटरीच सह विधिक जागरूकता अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़, शेष नाथ सिंह के निर्देश पर और सचिव अजय कुमार गुड़िया के मार्गदर्शन में पाकुड़ प्रखंड के नबीनगर पंचायत में प्रभात फेरी निकालकर ग्रामीणों को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।
बाल विवाह, बाल श्रम और डायन प्रथा पर विशेष जागरूकता
कार्यक्रम के दौरान पीएलवी (पैरा लीगल वॉलंटियर) चंद्रशेखर घोष ने बाल विवाह, बाल श्रम और डायन प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाई। उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि निर्धारित उम्र से पहले होने वाला विवाह गैरकानूनी है और यह बच्चों के भविष्य, उनके स्वास्थ्य और समाज के विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। बाल विवाह के कारण बच्चे शिक्षा और रोजगार के अवसरों से वंचित हो जाते हैं, जिससे उनके भविष्य में कई प्रकार की कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं।
बाल श्रम पर चर्चा करते हुए बताया गया कि नाबालिग बच्चों से काम करवाना न केवल अवैध है, बल्कि उनके मानसिक और शारीरिक विकास को भी बाधित करता है। डायन प्रथा पर बोलते हुए कहा गया कि यह समाज में महिलाओं के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देती है और इस तरह की प्रथाओं को समाप्त करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।
निशुल्क कानूनी सहायता और सरकारी योजनाओं की जानकारी
पाकुड़ के अन्य प्रखंडों में भी विधिक जागरूकता अभियान के तहत पीएलवी मल्लिका सरकार, मोलिता कुमारी और जयंती कुमारी समेत अन्य विधिक कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों को जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा दी जाने वाली निशुल्क कानूनी सहायता और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की। लोगों को बताया गया कि कानूनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क कर सकते हैं और उन्हें मुफ्त में कानूनी परामर्श और सहायता दी जाएगी।
अभियान का उद्देश्य और सामाजिक प्रभाव
नब्बे दिवसीय आउटरीच सह विधिक जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के हाशिए पर रह रहे लोगों को कानूनी अधिकारों की जानकारी देना और उन्हें सामाजिक कुरीतियों से बचाना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे लोगों को कानूनी जागरूकता प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपने अधिकारों को समझ सकें और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता प्राप्त कर सकें।
जागरूकता अभियान से ग्रामीणों में उत्साह
इस अभियान के तहत गांवों में प्रभात फेरी, नुक्कड़ नाटक और संवाद सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे लोग कानून और अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं। ग्रामीणों ने भी इस पहल का स्वागत किया और कहा कि ऐसे जागरूकता अभियान से समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा और कमजोर वर्गों को न्याय प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के इस अभियान से सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने और न्याय को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास किया जा रहा है।