रेलवे फाटक के पास घायल मिला नंदी
पाकुड़। रेलवे फाटक के समीप एक छोटे नंदी को किसी अज्ञात वाहन या व्यक्ति द्वारा गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। सोमवार दोपहर करीब 12 बजे सत्य सनातन संस्था के कोषाध्यक्ष एवं गौ सेवक दल के प्रमुख अमर ठाकुर ने जब नंदी को घायल अवस्था में तड़पते देखा तो वे बेहद व्यथित हो गए। उन्होंने तुरंत संस्था के अध्यक्ष रंजित कुमार चौबे को इस घटना की जानकारी दी और आवश्यक मदद की गुहार लगाई।
संस्था के सदस्यों ने तुरंत की पहल
घटना की गंभीरता को देखते हुए अध्यक्ष रंजित कुमार चौबे ने जिला अध्यक्ष हर्ष भगत के साथ घटनास्थल पर पहुंचकर घायल नंदी की स्थिति का जायजा लिया। मौके पर पहुंचकर देखा गया कि नंदी को गंभीर चोट लगी थी और वह लहूलुहान अवस्था में तड़प रहा था। स्थिति को देखते हुए संस्था के सदस्यों ने तत्काल नंदी के उपचार और रेस्क्यू की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया।
1962 हेल्पलाइन को दी गई सूचना
पशु चिकित्सा सहायता के लिए संस्था के अध्यक्ष ने तुरंत 1962 हेल्पलाइन पर सूचना दी। सूचना देने के 15 मिनट के भीतर 1962 की टीम मौके पर पहुंच गई। संस्था के सदस्यों के सहयोग से गंभीर रूप से घायल नंदी का रेस्क्यू किया गया और उसे आवश्यक चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराई गई।
संस्था के सदस्यों ने निभाई अहम भूमिका
रेस्क्यू अभियान में संस्था के दीपक राज गुप्ता, धीरज राज गुप्ता और अरुण सिंह सहित अन्य सदस्य भी सक्रिय रूप से मौजूद रहे। सभी ने मिलकर नंदी की देखभाल और चिकित्सा सहायता दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सत्य सनातन संस्था के सदस्यों की तत्परता और समर्पण ने एक नंदी की जान बचाने में मदद की, जिससे स्थानीय लोगों में संस्था के प्रति सराहना और विश्वास बढ़ा।
पशु सेवा को लेकर जागरूकता जरूरी
इस घटना ने एक बार फिर सड़क पर घूमने वाले मवेशियों की सुरक्षा और पशु कल्याण के प्रति समाज की जिम्मेदारी को उजागर किया है। संस्था के सदस्यों ने अपील की कि यदि कोई भी व्यक्ति सड़क पर किसी घायल पशु को देखता है, तो उसे तुरंत 1962 हेल्पलाइन पर सूचना देनी चाहिए। समय पर मिली चिकित्सा सहायता से ऐसे बेजुबान जानवरों की जान बचाई जा सकती है।
स्थानीय लोगों ने की संस्था की सराहना
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने सत्य सनातन संस्था के इस त्वरित प्रयास की सराहना की। संस्था के सदस्यों ने यह भी कहा कि वे पशु सेवा और गौ रक्षा के लिए हमेशा तत्पर हैं और भविष्य में भी जरूरतमंद पशुओं की सहायता करते रहेंगे। इस तरह की पहल से समाज में पशु कल्याण को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और दुर्घटनाओं का शिकार होने वाले मवेशियों को समय पर उपचार मिल सकेगा।