Saturday, August 30, 2025
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पाकुड़ में गणपति महोत्सव का तीसरा दिवस बना सांस्कृतिक रंगों से सराबोर

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नृत्य प्रतियोगिता का अंतिम महा मुकाबला रहा बेहद रोमांचक

सार्वजनिक गणेश पूजा समिति रेलवे मैदान पाकुड़ में आयोजित 27वें गणपति महोत्सव का तीसरा दिवस पूरी तरह से सांस्कृतिक उत्सव को समर्पित रहा। देर रात तक चली नृत्य प्रतियोगिता का अंतिम महा मुकाबला दर्शकों के लिए बेहद खास साबित हुआ। इस दौरान मंच पर जब प्रतिभागियों ने अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन किया तो पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साह से गूंज उठा।

मुख्य अतिथि बने युवा समाजसेवी अजहर इस्लाम

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में युवा समाजसेवी एवं जनप्रिय नेता अजहर इस्लाम शामिल हुए। उनके आगमन से कार्यक्रम का उत्साह और भी बढ़ गया। प्रतियोगिता में निर्णायक मंडली के रूप में संजु जयसवाल और संगीतज्ञ शंकरलाल साह मौजूद रहे, जिन्होंने कठिन मुकाबलों के बीच निर्णय दिया। वहीं, मंच संचालन की जिम्मेदारी कैलाश मध्यान्ह ने अपने अद्भुत और मनमोहक अंदाज़ में निभाई।

43 टीमों में से 16 प्रतिभागी पहुंचे अंतिम दौर में

इस भव्य प्रतियोगिता में कुल 43 टीमों ने अपनी जगह बनाई थी। कई घंटों तक चले चयन दौर के बाद 16 प्रतिभागियों ने फाइनल मुकाबले तक का सफर तय किया। फाइनल तक का यह सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा और दर्शक भी अपने पसंदीदा कलाकारों को चीयर करते हुए लगातार जोश से भरे दिखाई दिए।

युगल नृत्य में सुमन और दिया बने विजेता

युगल नृत्य प्रतियोगिता में पहला स्थान सुमन और दिया की जोड़ी ने अपने शानदार प्रदर्शन से हासिल किया। दूसरा स्थान अकरो और रोशन ने पाया, जबकि तीसरा स्थान अनिशा और रिया ने अपने नाम किया। इन प्रतिभागियों की तालमेल और कला ने निर्णायकों के साथ-साथ दर्शकों का भी दिल जीत लिया।

समूह नृत्य में स्ट्रीट डांस ग्रुप का दबदबा

समूह नृत्य प्रतियोगिता में स्ट्रीट डांस ग्रुप ने पहला स्थान प्राप्त कर अपना दबदबा कायम रखा। वहीं, दूसरा स्थान एस एन डांस ग्रुप को मिला और तीसरे स्थान पर बी2 डांस ग्रुप ने अपनी जगह बनाई। समूह नृत्य के दौरान प्रस्तुतियों में तालमेल और ऊर्जा देखने लायक थी, जिसने पूरे पंडाल का माहौल जीवंत कर दिया।

जूनियर और सीनियर वर्ग में भी प्रतिभाओं ने बिखेरी चमक

जूनियर नृत्य प्रतियोगिता में पहला स्थान आयशा खातून (मुरारोई) ने जीता। दूसरा स्थान अमाया तिवारी को मिला, जबकि तीसरे स्थान पर तनीषा साहा रहीं। वहीं, सीनियर वर्ग में शंकर भगत (मालदा) ने पहला स्थान प्राप्त किया। दूसरा स्थान जय प्रमाणिक (मुरारोई, पश्चिम बंगाल) ने हासिल किया और तीसरा स्थान सोनु बसफेयर (मुर्शिदाबाद) को मिला।

निर्णायक मंडली के लिए कठिन रहा निर्णय

प्रतियोगिता का स्तर इतना ऊंचा था कि निर्णायक मंडली के लिए निर्णय लेना आसान नहीं था। देर रात तक चले मुकाबले में हर प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मैदान में बैठे लोग लगातार उत्साह से तालियां बजाते रहे और प्रतियोगियों का हौसला बढ़ाते रहे।

लोकल फोर वोकल को मिला बढ़ावा

सांस्कृतिक माहौल को और जीवंत बनाने के लिए स्थानीय गायकों ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं। नील मंडल और मधुसुदन मंडल ने अपने मधुर गीतों से श्रोताओं का मन मोह लिया। इस पहल का उद्देश्य था लोकल फोर वोकल को प्रोत्साहित करना, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को मंच और पहचान मिल सके।

विजेताओं को किया गया सम्मानित

विजयी प्रतिभागियों को सम्मानित करने के लिए विशेष अतिथियों ने मंच संभाला। युवा समाजसेवी अजहर इस्लाम, ईआरएमयू अध्यक्ष अखिलेश कुमार चौबे, सचिव संजय कुमार ओझा, प्रभात खबर के ब्यूरो चीफ रमेश भगत, कनिय अभियंता (संकेत) रणधीर कुमार और निर्णायक शंकर लाल शाह ने विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।

समाज को जोड़ने का माध्यम बना गणेश महोत्सव

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अजहर इस्लाम ने कहा कि पिछले 27 वर्षों से लगातार आयोजित गणेश पूजा ने समाज को एकजुट करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन को भव्य बनाने में गणेश पूजा समिति और खासतौर पर हिसाबी राय का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने आगे कहा कि भगवान गणेश केवल पूज्य ही नहीं, बल्कि जीवन दर्शक भी हैं।

आयोजकों और कार्यकर्ताओं की रही अहम भूमिका

इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में समिति के संस्थापक हिसाबी राय, अध्यक्ष अनिकेत गोस्वामी, सचिव अजीत मंगल, तनमय पोद्दार, राणा शुक्ला, संजय कुमार राय, पिंटू हाजरा, ओमप्रकाश नाथ, लाल्टू भौमिक, अविनाश पंडित, मनीष कुमार सिंह, अमन भगत, अंकित शर्मा, अंशु राज, बिट्टू राय, अंकित मंडल, निर्भय सिंह, जितेश राजा, रवि पटवा, सादेकुल आलम, रतुल दे, अभिषेक कुमार, मोनी सिंह, रंजीत राम, दिनेश, नितिन मंडल, संजय मंडल सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


यह आयोजन न केवल भक्ति और आस्था का संगम बना बल्कि स्थानीय संस्कृति और प्रतिभा को भी प्रोत्साहित करने का माध्यम साबित हुआ।

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