पाकुड़। जब आस्था दीप बनकर जलती है, तो वातावरण में केवल उजाला नहीं फैलता, बल्कि मन के भीतर भी विश्वास की एक नई लौ प्रज्वलित होती है। जब विघ्नहर्ता भगवान गणपति का आगमन होता है, तो भक्तों के हृदय में श्रद्धा, उल्लास और मंगलकामना का भाव स्वयं जाग उठता है। इसी आध्यात्मिक अनुभूति और भक्ति के रंग में पाकुड़ एक बार फिर रंगने को तैयार है। रेलवे मैदान में इस वर्ष विघ्नहर्ता बाबा गणपति महोत्सव का 28वां वर्ष भव्यता और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा।
महोत्सव की तैयारियों को लेकर सार्वजनिक गणेश पूजा समिति, रेलवे मैदान पाकुड़ की बैठक मंगलवार को पाकुड़ रेलवे स्टेशन परिसर स्थित संकट मोचन महावीर मंदिर सत्संग भवन में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता राणा शुक्ला ने की। इस दौरान समिति के संस्थापक हिसाबी राय, अखिलेश कुमार चौबे एवं संजय कुमार ओझा प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
बैठक में पिछले वर्ष आयोजित गणपति महोत्सव की समीक्षा की गई और इस वर्ष के आयोजन को और अधिक भव्य, आकर्षक एवं भक्तिमय बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यकर्ताओं ने आयोजन से जुड़े सुझाव रखे, जिन्हें लेकर समिति ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। इस बार धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी विशेष स्थान दिया जाएगा, ताकि महोत्सव में भक्ति के साथ कला और संस्कृति की भी अनुपम छटा देखने को मिले।
14 सितंबर को होगा मंगलमूर्ति का आगमन
समिति के संस्थापक हिसाबी राय ने बताया कि 28वां गणपति महोत्सव 14 से 17 सितंबर 2026 तक रेलवे मैदान, पाकुड़ में आयोजित होगा। 14 सितंबर की सुबह विधिवत कलश स्थापना और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के साथ महोत्सव का शुभारंभ होगा।
वह क्षण श्रद्धालुओं के लिए विशेष होगा, जब मंत्रोच्चार के बीच मंगलमूर्ति भगवान गणेश की आराधना होगी और पूरा वातावरण ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष से गूंज उठेगा। माना जाता है कि प्रथम पूज्य गणेश का स्मरण जहां होता है, वहां शुभता स्वयं अपने कदम रखती है और विघ्नों का नाश होकर मंगल का मार्ग प्रशस्त होता है।
महाआरती के बाद सजेगी सांस्कृतिक संध्या
15 सितंबर की संध्या बाबा गणपति की भव्य महाआरती के बाद सांस्कृतिक संध्या-सह-नृत्य प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। भक्ति के दीपों और आरती की लौ के बीच जब गणपति बप्पा की महाआरती होगी, तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठेगा। इसके बाद संगीत, नृत्य और संस्कृति के रंगों से सजी शाम श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी।
नृत्य प्रतियोगिता के सफल प्रतिभागियों का चयन कर उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ उनकी प्रतिभा को मंच प्रदान करना भी है।
केवल पूजा नहीं, संस्कार और एकता का उत्सव
पूजा के मार्गदर्शक अखिलेश कुमार चौबे ने कहा कि भगवान गणपति विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता हैं। किसी भी शुभ कार्य का आरंभ प्रथम पूज्य भगवान गणेश की आराधना के बिना अधूरा माना जाता है। उन्होंने कहा कि गणपति महोत्सव केवल पूजा-पाठ तक सीमित आयोजन नहीं है, बल्कि यह समाज को एक सूत्र में बांधने, आपसी प्रेम और भाईचारे को मजबूत करने तथा नई पीढ़ी को धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का अवसर भी है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से पूरे भक्तिभाव के साथ महोत्सव में शामिल होने और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने की अपील की।
मटका फोड़ से डांडिया तक, उत्सव का दिखेगा रंग
महोत्सव के अंतिम दिन 17 सितंबर को दोपहर में मटका फोड़ एवं डांडिया कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके बाद बाबा गणपति की प्रतिमा का भव्य नगर भ्रमण कराया जाएगा। भक्तों की भीड़ और जयघोष के बीच बाबा गणपति नगर की गलियों से गुजरेंगे और अंततः बागतीपाड़ा स्थित मनसा मंदिर तालाब में विधिवत विसर्जन किया जाएगा।
विसर्जन का वह क्षण भावनाओं से भरा होगा। चार दिनों तक जिन गणपति बप्पा की पूजा में भक्तों ने अपना मन अर्पित किया होगा, उन्हें विदाई देते समय आंखों में श्रद्धा के आंसू और हृदय में अगले वर्ष पुनः आगमन की प्रतीक्षा होगी। “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयघोष के साथ भक्त विघ्नहर्ता से सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मांगेंगे।
नई कार्यकारिणी का हुआ गठन
महोत्सव के सफल संचालन के लिए बैठक में पुरानी पूजा समिति को भंग कर नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसमें संयोजक संजय कुमार ओझा, अध्यक्ष अविनाश पंडित, कार्यकारी अध्यक्ष मुन्ना रविदास, उपाध्यक्ष पिंटू हजार एवं नितिन कुमार मंडल, सचिव अजीत मंडल, संयुक्त सचिव संजय कुमार राय, सह सचिव राज चौधरी एवं निर्भय सिंह, कोषाध्यक्ष तन्मय पोद्दार तथा व्यवस्था प्रमुख अंकित मंडल को सर्वसम्मति से जिम्मेदारी सौंपी गई।
बैठक के दौरान अखिलेश कुमार चौबे, संजय कुमार ओझा, शंकरलाल साह, कैलाश मध्यान एवं लाल्टू भौमिक ने आयोजन की तैयारियों और व्यवस्थाओं को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
इस अवसर पर बिट्टू राय, अमन भगत, कंवर राय, बुबाय रजक, रणजीत राम, विजय राय, आदित्य सिंह, ज्वाला सिंह, सादेकुल आलम, मिथिलेश मंडल, जितेश रजक, भक्ति पूजन प्रसाद, राका राय, संजय मंडल, जय राजवीर, उजय राय सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
अंत में सभापति राणा शुक्ला ने सभी कार्यकर्ताओं एवं उपस्थित सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए बैठक समाप्ति की घोषणा की। समिति ने शहरवासियों और श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में महोत्सव में शामिल होकर बाबा गणपति का आशीर्वाद लेने तथा आयोजन को सफल बनाने की अपील की।
इस बार पाकुड़ का रेलवे मैदान केवल सजावट और रोशनी से नहीं, बल्कि श्रद्धा, संस्कार और भक्ति के उजास से जगमगाएगा। जहां विघ्नहर्ता विराजेंगे, वहां निश्चित ही मंगल का आशीष बरसेगा और चार दिनों तक पूरा वातावरण भक्ति, संस्कृति और उत्सव के उस दिव्य संगम का साक्षी बनेगा, जहां हर हृदय से बस एक ही स्वर निकलेगा—“गणपति बप्पा मोरया।”


