डिजिटल दुनिया में सिर्फ स्मार्टफोन चलाना काफी नहीं, अपने डिजिटल राइट्स और साइबर सेफ्टी को समझना भी जरूरी—विधिक जागरूकता शिविर में युवाओं को मिली कानून की अहम जानकारी
पाकुड़। आज की दुनिया में एक क्लिक सिर्फ स्क्रीन पर दिखाई देने वाली एक छोटी-सी गतिविधि नहीं है। यही क्लिक किसी के लिए नई जानकारी का दरवाजा खोल सकता है, तो कभी एक गलत लिंक पूरी डिजिटल सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। एक OTP शेयर करना, किसी अनजान लिंक पर क्लिक करना या बिना सोचे निजी जानकारी ऑनलाइन पोस्ट करना कभी-कभी जिंदगी पर लंबे समय तक असर डाल सकता है।
इसी डिजिटल दौर की चुनौतियों और कानूनी अधिकारों से युवाओं को परिचित कराने के उद्देश्य से झालसा, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ के तत्वावधान में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन एंडेवर एकेडमी, पाकुड़ प्रखंड में किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडेय के निर्देश तथा सचिव रूपा बंदना किरो के मार्गदर्शन में अगस्त माह के दौरान चलाए जा रहे जागृति योजना 2025 के तहत किया गया।
शिविर का फोकस युवाओं को केवल कानून की धाराएं बताने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्हें Legal Literacy, Cyber Safety, Digital Privacy, Constitutional Rights और Access to Justice जैसे विषयों से जोड़ना भी रहा।
डिजिटल फुटप्रिंट समझना भी कानूनी जागरूकता का हिस्सा
कार्यक्रम में लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के डिप्टी चीफ मो. नुकुमुद्दीन शेख ने युवाओं को मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य, संविधान के अनुच्छेद, विभिन्न कानूनी प्रावधानों और अपराध के लिए निर्धारित सजा की जानकारी दी।
उन्होंने युवाओं को समझाया कि कानून केवल अदालत और कानूनी किताबों तक सीमित विषय नहीं है। रोजमर्रा की जिंदगी में लिए गए फैसले भी कानून से जुड़े होते हैं।
खासकर डिजिटल युग में युवाओं के लिए Digital Footprint को समझना जरूरी है। सोशल मीडिया पर किया गया पोस्ट, शेयर की गई फोटो, कमेंट, चैट या ऑनलाइन गतिविधि डिजिटल स्पेस में रिकॉर्ड छोड़ सकती है। इसलिए किसी भी कंटेंट को पोस्ट या शेयर करने से पहले उसकी विश्वसनीयता और संभावित कानूनी प्रभाव को समझना जरूरी है।
OTP, पासवर्ड और प्राइवेसी—छोटी लापरवाही बन सकती है बड़ा खतरा
शिविर में Cyber Law और Digital Security को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में सामने रखा गया। युवाओं को ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग लिंक, फर्जी प्रोफाइल, साइबर ठगी और निजी जानकारी के दुरुपयोग जैसे खतरों के प्रति सतर्क रहने का संदेश दिया गया।
डिजिटल दुनिया में किसी अनजान व्यक्ति को OTP, Password, PIN या बैंकिंग डिटेल्स साझा करना कितना जोखिमपूर्ण हो सकता है, इस तरह के विषयों पर भी जागरूकता की जरूरत बताई गई।
युवाओं को यह संदेश दिया गया कि इंटरनेट पर सुविधा जितनी बढ़ी है, जोखिम भी उतने ही तेजी से बढ़े हैं। इसलिए Cyber Awareness ही Cyber Security की पहली दीवार है।
“अपने अधिकारों के लिए कानूनी तौर पर मजबूत होना जरूरी”
एंडेवर एकेडमी के शिक्षक मो. समीर अहमद ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि अपने अधिकारों के लिए कानूनी तौर पर मजबूत होना जरूरी है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे न केवल खुद अपने अधिकारों को समझें, बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी उनके अधिकारों और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि जागरूक युवा समाज की उन कुरीतियों के खिलाफ आवाज बन सकते हैं, जो विकास की राह में बाधा बनती हैं। युवाओं की जागरूकता ही समाज को नई दिशा देने की ताकत रखती है।
“दो गुब्बारों की सीख” से समझाया माता-पिता और बच्चों का संवाद
कार्यक्रम में PCI-UNICEF के जिला कार्यक्रम समन्वयक मो. अनीश अंसारी ने “दो गुब्बारों की सीख” के माध्यम से माता-पिता और बच्चों के बीच सकारात्मक संवाद एवं बेहतर समझ का संदेश दिया।
उन्होंने उदाहरण के माध्यम से समझाया कि बच्चे के मन और मस्तिष्क में जिस प्रकार के विचार, व्यवहार और अनुभव भरे जाते हैं, उनका प्रभाव आगे चलकर उसके व्यक्तित्व और व्यवहार में दिखाई देता है।
डिजिटल युग में यह संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि आज बच्चों और युवाओं का बड़ा हिस्सा Social Media, Short Video Platforms, Online Gaming और Digital Content के संपर्क में रहता है। ऐसे में माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद केवल पारिवारिक संबंधों का विषय नहीं, बल्कि डिजिटल सुरक्षा और मानसिक विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण पहलू भी है।
नशे से दूरी, भविष्य से नजदीकी
मो. अनीश अंसारी ने युवाओं को नशामुक्ति को लेकर भी कई अहम जानकारियां दीं। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
युवाओं को यह समझने की जरूरत है कि किसी भी समाज का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी की दिशा पर निर्भर करता है। यदि युवा अपनी ऊर्जा को शिक्षा, कौशल, तकनीक और रचनात्मक गतिविधियों में लगाएंगे, तो वही ऊर्जा समाज के विकास का इंजन बन सकती है।
कानून की जानकारी यानी अपने भविष्य की सुरक्षा
कार्यक्रम में DPC-PCI-UNICEF से जुड़े मो. अनीस अंसारी, एंडेवर एकेडमी के प्रिंस प्रकाश एवं उदय कुमार तथा पैरा लीगल वॉलंटियर नीरज कुमार राउत की भी सक्रिय भूमिका रही।
शिविर में युवाओं को संवैधानिक अधिकार, कानूनी साक्षरता, साइबर कानून, डिजिटल सुरक्षा, बुनियादी कानूनी अधिकार, अपराध रोकथाम और जिला विधिक सेवा प्राधिकार से मिलने वाली निःशुल्क कानूनी सेवाओं की जानकारी दी गई।
इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
आज के डिजिटल युग में असली स्मार्टनेस क्या है?
स्मार्टफोन चलाना, सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना या नई टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करना आधुनिक होने की निशानी हो सकती है, लेकिन अपने डिजिटल अधिकारों, ऑनलाइन प्राइवेसी और साइबर कानून की जानकारी रखना असली डिजिटल स्मार्टनेस है।
क्योंकि इंटरनेट पर किया गया हर क्लिक हमेशा सिर्फ एक क्लिक नहीं रहता। कभी वह Digital Footprint बन जाता है, कभी किसी स्कैम का दरवाजा खोल देता है और कभी अनजाने में कानूनी परेशानी की वजह बन सकता है।
इसलिए युवाओं के लिए सबसे जरूरी संदेश यही है—
“क्लिक करने से पहले सोचिए, शेयर करने से पहले जांचिए और अपने अधिकारों के लिए कानून को जानिए।”
यही जागरूकता एक सुरक्षित डिजिटल नागरिक और जिम्मेदार समाज की नींव बन सकती है।


