[ad_1]
चंद्रमा के करीब पहुंचने पर लैंडिंग से पहले यह तीन से सात दिन के समय में सही जगह का चुनाव करेगा, जहां पर प्रॉब को उतारा जाएगा। NDTV के अनुसार, यह चंद्रमा के साउथ पोल एरिया में उतारा जाएगा। रॉसकॉसमॉस की ओर से अधिकारी एलेग्जेंडर ब्लॉकिन ने कहा कि इतिहास में पहली बार ऐसा होने जा रहा है जब चांद के साउथ पोल पर प्रॉब लैंडिंग करवाई जाएगी। इससे पहले जिसने भी चांद पर पहुंचने की कोशिश की है, वे सभी इक्वेटर यानि भूमध्य जोन में उतरे हैं। रूसी अंतरिक्ष एजेंसी का अंदाजा है कि चांद पर प्रॉब 21 अगस्त के आसपास उतरेगा।
लैंडिंग के बाद यह स्पेसक्राफ्ट चांद पर लगभग 1 साल तक रहेगा। इस यात्रा के दौरान यह चांद की सतह से सैम्पल इकट्ठा करेगा, वहां की मिट्टी की जांच करेगा। उसके बाद इस पर लम्बा वैज्ञानिक शोध किया जाएगा। यूक्रेन के साथ युद्ध के चलते रूसी स्पेस एजेंसी रॉसकॉसमॉस को पश्चिमी देशों ने स्पेस प्रोग्रामों में भागीदारी से अलग कर दिया था। उसके बाद रूस का यह पहला चंद्र अभियान है। रूस के स्पेस एक्सपर्ट विटाली लीग्रोव के अनुसार यह मिशन अपनी तरह का पहला है जिसमें किसी खगोलीय पिंड पर कोई डिवाइस लॉन्च की जाएगी।
रिपोर्ट के अनुसार, यह मिशन रूस के स्पेस सेक्टर के लिए बहुत मायने रखता है। वर्तमान में रूसी अंतरिक्ष क्षेत्र फंड की कमी से जूझ रहा है। साथ ही अमेरिका और चीन से रूस को कड़ी चुनौती का सामना भी करना पड़ रहा है। इसके अलावा एलन मस्क की स्पेस एक्स भी रूस को अंतरिक्ष में चुनौती दे रही है।
जहां तक भारत के तीसरे मून मिशन की बात है, चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की नई तस्वीर खींची है। चंद्रयान-3 में लगे लैंडर इमेजर कैमरा ने पृथ्वी को भी कैमरे में कैद किया है। 14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से चंद्रयान-3 मिशन को लॉन्च किया गया था। इसरो इस मिशन में अभी तक सफल रही है। योजना के अनुसार, 23 अगस्त को चंद्रयान-3 चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश करेगा।
लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।
संबंधित ख़बरें
[ad_2]
Source link