📌 कार्यक्रम का आयोजन और उद्देश्य
पाकुड़ में झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ के तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मंडलकारा (जेल) पाकुड़ में जेल अदालत सह चिकित्सीय जांच शिविर का आयोजन किया गया। यह आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष के निर्देश पर तथा सचिव रूपा बंदना किरो की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विचाराधीन बंदियों को त्वरित न्याय, कानूनी सहायता और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना था, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें।
⚖️ बंदियों को दी गई कानूनी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान सचिव रूपा बंदना किरो ने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों, मुफ्त कानूनी सहायता तथा प्ली-बार्गेनिंग (Plea Bargaining) जैसे महत्वपूर्ण प्रावधानों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक बंदी को न्याय पाने का पूरा अधिकार है और इसके लिए सरकार द्वारा निःशुल्क अधिवक्ता (वकील) उपलब्ध कराया जाता है।
इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक रूप से कमजोर बंदी भी अपने मामलों की प्रभावी पैरवी कर सकें और न्याय से वंचित न रहें।
📚 त्वरित न्याय और कानूनी सहायता पर जोर
इस शिविर के माध्यम से बंदियों को उनके लंबित मामलों (Pending Cases) की स्थिति से अवगत कराया गया। साथ ही उन्हें यह भी बताया गया कि किस प्रकार वे लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) के माध्यम से सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम में यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि न्याय में देरी को कम करने और बंदियों को शीघ्र राहत दिलाने के लिए इस तरह के आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
🤝 मध्यस्थता और विवाद समाधान की जानकारी
लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के डिप्टी चीफ संजीव कुमार मंडल एवं सहायक अज़फर हुसैन विश्वास ने संयुक्त रूप से बंदियों को मध्यस्थता (Mediation) के माध्यम से मामलों के समाधान की प्रक्रिया समझाई।
उन्होंने बताया कि कई मामलों को आपसी सहमति से जल्दी सुलझाया जा सकता है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है तथा बंदियों को शीघ्र राहत मिलती है।
🩺 स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन
कानूनी सहायता के साथ-साथ इस कार्यक्रम में मेडिकल कैंप का भी आयोजन किया गया, जिसमें बंदियों के स्वास्थ्य की जांच की गई।
डॉक्टर एस. के. झा द्वारा बंदियों की स्वास्थ्य स्थिति का परीक्षण किया गया और आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिया गया। इस पहल का उद्देश्य बंदियों को उनके स्वास्थ्य संबंधी अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा प्रदान करना था।
🗣️ बंदियों की समस्याएं सुनी गईं
कार्यक्रम के दौरान बंदियों को अपनी व्यक्तिगत समस्याएं और कानूनी मुद्दे रखने का अवसर दिया गया। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके समाधान के लिए उचित मार्गदर्शन दिया।
इससे बंदियों में विश्वास और जागरूकता बढ़ी तथा उन्हें न्याय प्रणाली के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण मिला।
👥 कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख लोग
इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ की सचिव रूपा बंदना किरो, डॉक्टर एस. के. झा, डिप्टी चीफ मो. नुकुमुद्दीन शेख, संजीव कुमार मंडल, अज़फर हुसैन विश्वास, जेल के प्रशासनिक अधिकारी तथा अन्य संबंधित कर्मी उपस्थित रहे।
सभी ने मिलकर इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बंदियों के अधिकारों की दिशा में सार्थक पहल
यह आयोजन बंदियों के अधिकारों की रक्षा, त्वरित न्याय और स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक सराहनीय कदम साबित हुआ। ऐसे कार्यक्रम न केवल बंदियों को कानूनी रूप से सशक्त बनाते हैं, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में भी मदद करते हैं।
इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि न्याय प्रणाली केवल दंड तक सीमित नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास पर भी जोर देती है।


