Wednesday, July 15, 2026
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एडिटर इन चीफ
धर्मेन्द्र सिंह

मानसिक बीमारी छिपाने की नहीं, समझने की जरूरत: पाकुड़ आईटीआई में जागरूकता शिविर, अधिकारों और कानूनी सहायता की दी गई विस्तृत जानकारी

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📍 आईटीआई सोनाजोड़ी में आयोजित हुआ विधिक जागरूकता शिविर

पाकुड़। झालसा (JHALSA) रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पाकुड़ के तत्वावधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार दिवाकर पांडेय के निर्देश तथा डालसा सचिव रूपा बंदना किरो के मार्गदर्शन में पाकुड़ प्रखंड के सोनाजोड़ी स्थित आईटीआई संस्थान में नालसा की “मानसिक बीमारी एवं बौद्धिक अक्षमता वाले व्यक्तियों के लिए कानूनी सेवाएं योजना-2024” विषय पर एक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

इस जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में मानसिक बीमारी और बौद्धिक अक्षमता से जुड़े भ्रम और भ्रांतियों को दूर करना, पीड़ित व्यक्तियों के संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना तथा उन्हें उपलब्ध कानूनी सहायता, सरकारी योजनाओं और चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी देना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य लोगों ने भाग लिया।


⚖️ मानसिक एवं बौद्धिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा है योजना का उद्देश्य

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष अशोक कुमार शुक्ला ने कहा कि नालसा की कानूनी सेवाएं योजना-2024 का मुख्य उद्देश्य मानसिक बीमारी एवं बौद्धिक अक्षमता से ग्रसित व्यक्तियों को व्यापक कानूनी सहायता, संरक्षण और न्याय तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना है।

उन्होंने कहा कि ऐसे लोग समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और उन्हें भी सम्मानपूर्वक जीवन जीने का पूरा अधिकार है। यदि किसी व्यक्ति के अधिकारों का हनन होता है तो जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से उन्हें निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने योजना का लाभ लेने की पूरी प्रक्रिया को बिंदुवार समझाते हुए छात्रों से आग्रह किया कि वे जरूरतमंद लोगों तक इस जानकारी को पहुंचाएं।


📚 कानूनी अधिकारों और सरकारी योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी

लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के डिप्टी चीफ मो. नुकुमुद्दीन शेख ने अपने संबोधन में बताया कि मानसिक बीमारी एवं बौद्धिक अक्षमता से ग्रसित व्यक्तियों को केवल उपचार ही नहीं, बल्कि कानूनी सुरक्षा, सामाजिक न्याय और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना भी अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि नालसा योजना ऐसे लोगों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है। साथ ही उन्होंने विभिन्न कानूनी अधिनियमों, पीड़ितों के अधिकारों तथा निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।


👮 मानसिक बीमारी के कारणों और बचाव पर डीएसपी ने किया जागरूक

डीएसपी मुख्यालय उज्जवल कुमार साहा ने मानसिक बीमारी के विभिन्न कारणों पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि जेनेटिक कारण, असंतुलित खान-पान, तनावपूर्ण जीवनशैली, घरेलू हिंसा, दुर्व्यवहार, किसी बड़ी दुर्घटना या सदमे, गर्भावस्था के दौरान आने वाली जटिलताएं तथा नशे का सेवन मानसिक संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे लोगों के प्रति संवेदनशील बनने की आवश्यकता है। उन्हें तिरस्कार नहीं बल्कि सहयोग, समझ, समय पर उपचार और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि मानसिक बीमारी को कलंक न समझें बल्कि इसे भी अन्य बीमारियों की तरह गंभीरता से लें।


🩺 मानसिक बीमारी को पहचानना और समय पर उपचार जरूरी : डॉ. प्रकाश कुमार मुर्मू

डॉ. प्रकाश कुमार मुर्मू ने कहा कि मानसिक बीमारी केवल युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बुजुर्गों में भी यह समस्या तेजी से देखने को मिल रही है। उन्होंने बताया कि बार-बार गुस्सा करना, चिड़चिड़ापन, बिना कारण अत्यधिक बोलना, व्यवहार में अचानक बदलाव और अवसाद जैसी स्थितियां कई बार मानसिक बीमारी के संकेत हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि नशे की लत, अत्यधिक तनाव, सामाजिक अकेलापन और परिवार से दूरी भी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं से अपील की कि यदि उनके आसपास किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो उसे चिकित्सक तक पहुंचाने में सहयोग करें।


🤝 समाज की मुख्यधारा से जोड़ना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी

स्थायी लोक अदालत के सदस्य राजीव कुमार झा ने कहा कि मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और समाज की मुख्यधारा से जोड़ना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि समाज में जागरूकता बढ़ने से ऐसे लोगों के प्रति भेदभाव कम होगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं से अपील की कि वे अपने गांव, मोहल्ले और समाज में इस विषय पर जागरूकता फैलाएं तथा जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं और कानूनी सहायता से जोड़ने में सहयोग करें।


🎓 छात्र-छात्राओं को सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए किया प्रेरित

कार्यक्रम के अंत में आईटीआई के प्रभारी प्राचार्य सुरेश कुमार दास ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी मजबूत करते हैं।

उन्होंने छात्र-छात्राओं से आग्रह किया कि वे मानसिक एवं बौद्धिक अक्षमता से ग्रसित असहाय लोगों की सहायता के लिए हमेशा आगे आएं और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं।


🎤 प्रभावी संचालन और बड़ी संख्या में रही सहभागिता

कार्यक्रम का सफल संचालन इंडियन नेशनल एसोसिएशन के अध्यक्ष जेड एच विश्वास ने किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य, कानूनी अधिकार, सामाजिक जागरूकता और सरकारी योजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की।

इस अवसर पर लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के सहायक गंगाराम टुडू, सुनील कुमार देहरी, साधु चरण बोईपाय, बिपीन कुमार श्रीवास्तव, विजय कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता नसरुद्दीन शेख, पारा लीगल वॉलंटियर्स पिंकी मंडल, मोकमाउल शेख, नीरज कुमार राउत, प्रेमलता हांसदा, अर्पिता मंडल सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


🌟 मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक समाज ही बनेगा सशक्त समाज

कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मानसिक बीमारी कोई अभिशाप नहीं, बल्कि एक चिकित्सकीय स्थिति है, जिसका समय पर उपचार, सही मार्गदर्शन और कानूनी संरक्षण के माध्यम से प्रभावी समाधान संभव है। ऐसे जागरूकता शिविर समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने, भेदभाव को समाप्त करने और जरूरतमंद लोगों तक न्याय एवं अधिकार पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की यह पहल न केवल कानूनी जागरूकता बढ़ाने का कार्य कर रही है, बल्कि एक संवेदनशील, समावेशी और जागरूक समाज के निर्माण की दिशा में भी सार्थक कदम साबित हो रही है।

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