पाकुड़। भगवान श्री जगन्नाथ की पावन रथ यात्रा केवल आस्था और भक्ति का उत्सव ही नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानवता के आदर्शों को आत्मसात करने का भी एक दिव्य अवसर है। इसी आध्यात्मिक भावना को चरितार्थ करते हुए श्री सत्य साईं सेवा समिति, छोटी अलीगंज, पाकुड़ द्वारा भगवान श्री सत्य साईं बाबा की असीम कृपा एवं दिव्य प्रेरणा से रथ यात्रा के शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं एवं यात्रियों के लिए निःशुल्क शीतल जल सेवा शिविर का भव्य आयोजन किया गया।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी समिति ने अपनी सेवा परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सिद्धू-कान्हू मोड़, पाकुड़ के समीप सेवा शिविर स्थापित किया, जहाँ रथ यात्रा में शामिल हजारों श्रद्धालुओं, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों एवं राहगीरों को प्रेम, विनम्रता और समर्पण के साथ शीतल जल उपलब्ध कराया गया। तेज धूप और उमस भरे मौसम के बीच यह सेवा श्रद्धालुओं के लिए किसी अमृत से कम नहीं थी।
भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण में हुआ सेवा कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्णतः आध्यात्मिक वातावरण में किया गया। सर्वप्रथम भगवान श्री सत्य साईं बाबा के पावन चित्र के समक्ष ॐकार उच्चारण, गायत्री मंत्र का सामूहिक पाठ एवं दीप प्रज्वलन कर विश्व कल्याण और मानव सेवा की मंगलकामना की गई। पूरे वातावरण में भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो गया।
इसके पश्चात सभी स्वयंसेवकों ने भगवान श्री सत्य साईं बाबा के संदेश “Love All, Serve All” तथा “मानव सेवा ही माधव सेवा है” को जीवन में उतारते हुए पूरे उत्साह और समर्पण के साथ सेवा कार्य प्रारंभ किया। स्वयंसेवक श्रद्धालुओं के बीच लगातार शीतल जल वितरित करते रहे और हर व्यक्ति का मुस्कान के साथ स्वागत किया।
सेवा ही सबसे बड़ा धर्म: साईं संगठन की प्रेरणादायी पहल
श्री सत्य साईं सेवा संगठन का मूल उद्देश्य बिना किसी भेदभाव के मानवता की सेवा करना है। संगठन वर्षों से समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, रक्तदान, चिकित्सा शिविर, आपदा राहत और विभिन्न जनसेवा कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों की निस्वार्थ सेवा करता आ रहा है।
रथ यात्रा जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में शीतल जल सेवा का आयोजन केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि भगवान के प्रति सच्ची भक्ति और मानवता के प्रति समर्पण का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। समिति के सदस्यों का कहना था कि जब किसी प्यासे व्यक्ति को पानी पिलाया जाता है तो वही ईश्वर की सच्ची पूजा बन जाती है।
हजारों श्रद्धालुओं ने प्राप्त की सेवा, स्वयंसेवकों का दिखा अनुकरणीय समर्पण
रथ यात्रा में उमड़े श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच समिति के स्वयंसेवक पूरी व्यवस्था के साथ लगातार सेवा में जुटे रहे। जल वितरण के दौरान अनुशासन, स्वच्छता और विनम्र व्यवहार का विशेष ध्यान रखा गया। श्रद्धालुओं ने भी समिति की इस निस्वार्थ सेवा की मुक्तकंठ से सराहना की और स्वयंसेवकों को आशीर्वाद दिया।
सेवा शिविर में आने वाले अनेक श्रद्धालुओं ने कहा कि धार्मिक आयोजनों में इस प्रकार की सेवा समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और इससे सेवा संस्कृति को नई ऊर्जा मिलती है।
अनेक साईं भक्तों एवं स्वयंसेवकों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
इस पुनीत सेवा यज्ञ को सफल बनाने में समिति के अनेक पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों एवं साईं भक्तों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। प्रमुख रूप से रवि ठाकुर (कन्वीनर), उत्तम कुमार दास सोरेन (पूर्व कन्वीनर), पवित्र दास, दुलाल घोष, नवो चंद्र साधु, रिकी कुमार, कोयल झा, सोमा झा, आशा देवी, अजीत राय, निशा कुमारी, आरती कुमारी, अपूर्व कर्मकार सहित बाल विकास के बच्चों, बाल विकास एल्युमिनाई तथा बड़ी संख्या में साईं भक्तों ने पूरे उत्साह एवं समर्पण के साथ अपनी सेवाएं प्रदान कीं।
सभी स्वयंसेवकों ने बिना किसी थकान की परवाह किए श्रद्धालुओं को शीतल जल उपलब्ध कराया। उनके चेहरे पर सेवा का आनंद और भगवान के प्रति समर्पण स्पष्ट दिखाई दे रहा था।
डॉ. देवकांत ठाकुर ने भी सेवा कार्य में दिया सक्रिय योगदान
इस अवसर पर श्री सत्य साईं सेवा संगठन, पाकुड़ के पूर्व जिला अध्यक्ष एवं राज्य मेडिकल कोऑर्डिनेटर, झारखंड डॉ. देवकांत ठाकुर भी उपस्थित रहे। उन्होंने स्वयं सेवा शिविर का निरीक्षण किया और स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन करते हुए सेवा कार्य में सक्रिय योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि भगवान श्री सत्य साईं बाबा ने सदैव मानव सेवा को ईश्वर सेवा का सर्वोच्च माध्यम बताया है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में निस्वार्थ सेवा का भाव अपनाए तो समाज में प्रेम, करुणा, भाईचारा और सद्भावना स्वतः स्थापित हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सेवा का वास्तविक अर्थ केवल सहायता करना नहीं, बल्कि प्रत्येक मानव में ईश्वर का दर्शन करते हुए प्रेमपूर्वक उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति करना है।
समाज को मिला सेवा और सद्भाव का संदेश
इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि धार्मिक पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज में सहयोग, सेवा, प्रेम और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का भी अवसर प्रदान करते हैं। श्री सत्य साईं सेवा समिति द्वारा आयोजित यह शीतल जल सेवा शिविर न केवल श्रद्धालुओं के लिए राहत का केंद्र बना, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि सच्ची भक्ति वही है, जो मानवता की सेवा के रूप में प्रकट हो।
कार्यक्रम के समापन पर सभी स्वयंसेवकों ने भविष्य में भी इसी प्रकार जनकल्याण एवं सेवा के कार्यों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन के दौरान भगवान श्री सत्य साईं बाबा के प्रेरणादायी संदेश—
“मानव सेवा ही माधव सेवा है”
“Love All, Serve All”
की भावना प्रत्येक स्वयंसेवक के व्यवहार और सेवा कार्य में स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
इस प्रेरणादायी सेवा आयोजन ने रथ यात्रा की आध्यात्मिक गरिमा को और अधिक बढ़ाते हुए यह संदेश दिया कि जब भक्ति के साथ सेवा जुड़ जाती है, तब वही कार्य समाज के लिए प्रेरणा और मानवता के लिए सबसे बड़ी पूजा बन जाता है। श्रद्धालुओं ने समिति की इस सराहनीय पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे सामाजिक एवं आध्यात्मिक सेवा का अनुकरणीय उदाहरण बताया।


