Friday, August 14, 2026
HomePakurरथ मेला में घूम रही थी एक टीम... लोगों को बता रही...
एडिटर इन चीफ
धर्मेन्द्र सिंह

रथ मेला में घूम रही थी एक टीम… लोगों को बता रही थी ऐसा अधिकार, जिसे जानना हर नागरिक के लिए जरूरी है

देश प्रहरी की खबरें अब Google news पर

क्लिक करें

पाकुड़। भगवान श्री जगन्नाथ की रथ यात्रा के उल्लास से सराबोर पाकुड़ का ऐतिहासिक रथ मेला… चारों ओर श्रद्धालुओं की अपार भीड़, मंदिरों में गूंजते भक्ति गीत, मेले की रंग-बिरंगी दुकानें, बच्चों की खिलखिलाहट, झूलों की रौनक और “जय जगन्नाथ” के जयघोष से गूंजता वातावरण। इसी उत्सवी माहौल के बीच एक ऐसा दृश्य भी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा था, जहाँ न कोई मंच था और न ही औपचारिक सभा, बल्कि लोगों के बीच जाकर उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा था।

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा), रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पाकुड़ ने रथ मेला परिसर में एक विशेष विधिक जागरूकता अभियान चलाया। यह अभियान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ दिवाकर पांडेय के निर्देश तथा डालसा सचिव रूपा बंदना किरो के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।

जब मेले की भीड़ के बीच पहुंची जागरूकता की टोली

रथ मेला अपने पूरे शबाब पर था। दूर-दराज़ के गांवों से आए श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन के साथ मेले का आनंद ले रहे थे। कोई परिवार के साथ खरीदारी कर रहा था, कोई बच्चों को झूला झुला रहा था तो कोई प्रसाद और मिठाइयों की दुकानों पर रुका हुआ था। इसी बीच डालसा के पैरा लीगल वॉलंटियर्स लोगों के बीच पहुंचते, मुस्कुराकर उनका अभिवादन करते और उनसे पूछते—“क्या आपको पता है कि सरकार जरूरतमंद लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराती है?”

यह सवाल सुनकर कई लोग रुक गए। किसी ने उत्सुकता से जानकारी ली, तो किसी ने अपने निजी कानूनी सवाल पूछे। देखते ही देखते मेले का एक कोना कानूनी जागरूकता का केंद्र बन गया।

घर-घर नहीं, भीड़-भीड़ तक पहुंची न्याय की जानकारी

अभियान में कमला राय गांगुली, पिंकी मंडल, याकूब अली, रानी साहा एवं नीरज कुमार राउत ने पूरे मेले में घूम-घूमकर लोगों को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति आर्थिक रूप से कमजोर है या कानून के तहत पात्र श्रेणी में आता है, तो उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है।

उन्होंने लोगों को यह भी समझाया कि न्याय केवल संपन्न लोगों का अधिकार नहीं है, बल्कि हर नागरिक को समान रूप से न्याय पाने का अधिकार प्राप्त है।

हर हाथ में पहुंची जागरूकता पुस्तिका

मेले में चलते-चलते स्वयंसेवक लोगों को नालसा की विभिन्न योजनाओं से संबंधित पर्चे और पुस्तिकाएं भी दे रहे थे। कोई युवक उसे पढ़ते हुए अपने मित्रों को जानकारी दे रहा था, तो कई बुजुर्ग बड़े ध्यान से स्वयंसेवकों की बातें सुन रहे थे। महिलाओं ने भी घरेलू विवाद, संपत्ति, सरकारी योजनाओं और कानूनी सहायता से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका स्वयंसेवकों ने सरल भाषा में उत्तर दिया।

पूरे अभियान के दौरान यह प्रयास किया गया कि कानून की कठिन भाषा को आसान शब्दों में लोगों तक पहुंचाया जाए, ताकि हर व्यक्ति अपने अधिकारों को समझ सके।

“15100”—एक नंबर जो बन सकता है आपकी मदद का सहारा

जागरूकता अभियान के दौरान लोगों को बताया गया कि यदि भविष्य में किसी भी प्रकार की कानूनी समस्या सामने आए, तो वे नालसा के टोल फ्री नंबर 15100 पर संपर्क कर सकते हैं। चाहे मामला घरेलू हिंसा का हो, भूमि विवाद का, मजदूरी से जुड़े अधिकारों का, महिला सुरक्षा का या किसी अन्य कानूनी सहायता का—जिला विधिक सेवा प्राधिकार हर पात्र व्यक्ति को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए तत्पर है।

कानून ही नहीं, सरकारी योजनाओं तक भी पहुंचाते हैं पैरा लीगल वॉलंटियर्स

स्वयंसेवकों ने लोगों को यह भी बताया कि उनकी भूमिका केवल कानूनी सलाह देने तक सीमित नहीं है। वे जरूरतमंद लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, आवेदन प्रक्रिया समझाने और प्रशासन तक उनकी समस्याएं पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों से आए कई लोगों ने इस जानकारी को उपयोगी बताते हुए कहा कि उन्हें पहली बार पता चला कि बिना किसी शुल्क के भी कानूनी सहायता प्राप्त की जा सकती है।

आस्था के मेले में जागरूकता का अनूठा संदेश

रथ मेला जहां एक ओर धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, वहीं दूसरी ओर यह अभियान लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने का माध्यम भी बना। मेले में उमड़ी हजारों की भीड़ के बीच जब पैरा लीगल वॉलंटियर्स लोगों से सीधे संवाद कर रहे थे, तब यह महसूस हो रहा था कि न्याय केवल न्यायालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे आम नागरिक तक पहुंचाना भी उतना ही आवश्यक है।

इस जनजागरूकता अभियान ने यह संदेश दिया कि जब नागरिक अपने अधिकारों को जानेंगे, तभी वे उनका सही उपयोग कर पाएंगे। रथ मेला के जीवंत और उत्साहपूर्ण वातावरण में चलाया गया यह अभियान न केवल लोगों के लिए उपयोगी साबित हुआ, बल्कि यह भी दिखा गया कि आस्था के उत्सव के साथ यदि जागरूकता का संदेश जुड़ जाए, तो समाज और अधिक सशक्त बन सकता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments