पाकुड़। भगवान श्री सत्य साईं बाबा के शताब्दी वर्ष महोत्सव के अवसर पर निकाली जा रही श्री सत्य साईं प्रेम प्रवाहिनी रथ यात्रा का सोमवार की शाम छोटी अलीगंज, पाकुड़ में अत्यंत भव्य, श्रद्धामय और ऐतिहासिक स्वागत किया गया। जैसे ही रथ नगर की सीमा में प्रवेश किया, वैसे ही वातावरण “जय साईं राम” के जयघोष, भजन-कीर्तन, वैदिक मंत्रोच्चारण और भक्ति रस से सराबोर हो उठा। सबसे खास बात यह रही कि मूसलाधार बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह तनिक भी कम नहीं हुआ। लोग भीगते रहे, लेकिन भगवान के दर्शन और रथ यात्रा में शामिल होने का उत्साह उनके चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा था।
बारिश के बीच उमड़ा आस्था का जनसैलाब
शाम करीब 4 बजे जैसे ही श्री सत्य साईं प्रेम प्रवाहिनी रथ छोटी अलीगंज पहुँचा, पूरा इलाका साईंमय हो गया। बच्चे, युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और आसपास के गांवों से आए श्रद्धालु रथ के स्वागत के लिए पहले से ही सड़क किनारे खड़े थे। अचानक शुरू हुई तेज बारिश भी लोगों के कदम नहीं रोक सकी। श्रद्धालु हाथों में फूल, ध्वज और आरती की थाल लेकर भगवान के स्वागत में जुटे रहे।
रथ के दर्शन के लिए लोगों में इतनी उत्सुकता थी कि सड़कें श्रद्धालुओं से भर गईं। कई परिवार अपने छोटे बच्चों को कंधे पर बैठाकर भगवान के दर्शन करा रहे थे। श्रद्धालुओं की आंखों में आस्था और चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी।
भजन-कीर्तन और जयघोष से गूंज उठा पूरा शहर
रथ यात्रा के नगर भ्रमण के दौरान पूरा वातावरण “जय साईं राम”, “साईं बाबा की जय” तथा अन्य धार्मिक उद्घोषों से गूंजता रहा। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर रथ का अभिनंदन किया। महिलाओं की भजन मंडलियों ने मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।
रथ के आगे-आगे श्रद्धालु नृत्य करते हुए चल रहे थे, जबकि पीछे हजारों भक्त भगवान के नाम का स्मरण करते हुए आगे बढ़ रहे थे। कई श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बताया।
साईं सेंटर में हुआ दिव्य पूजन और आरती
नगर भ्रमण के उपरांत रथ यात्रा का अंतिम पड़ाव साईं सेंटर, छोटी अलीगंज में हुआ। यहां भगवान श्री सत्य साईं बाबा की प्रतिमा एवं रथ का वैदिक मंत्रोच्चारण, पूजन-अर्चन और भजन-कीर्तन के साथ भव्य स्वागत किया गया।
पूरे परिसर में दीपों की रोशनी, अगरबत्ती की सुगंध और भक्तों की सामूहिक प्रार्थना ने ऐसा आध्यात्मिक वातावरण बना दिया, जिसे देखकर हर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठा। रात्रि 8 बजे भगवान को विधिवत भोग अर्पित किया गया तथा उसके बाद भव्य आरती संपन्न हुई। आरती के समय उपस्थित श्रद्धालुओं ने एक स्वर में भगवान से विश्व शांति, मानव कल्याण और सर्वजन सुखाय की प्रार्थना की।
प्रेम, सेवा और मानवता का संदेश लेकर निकली है रथ यात्रा
इस अवसर पर श्री सत्य साईं सेवा संगठन, पाकुड़ के पूर्व जिला अध्यक्ष एवं सह राज्य मेडिकल कोऑर्डिनेटर, झारखंड डॉ. देवकांत ठाकुर ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए रथ यात्रा की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि श्री सत्य साईं प्रेम प्रवाहिनी रथ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि प्रेम, सेवा, करुणा, मानव एकता और सार्वभौमिक बंधुत्व का संदेश लेकर समाज के बीच पहुंच रही है। इसका उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को मानव सेवा के लिए प्रेरित करना और समाज में प्रेम तथा भाईचारे की भावना को मजबूत करना है।
‘Love All – Serve All’ को जीवन का मंत्र बनाने का आह्वान
डॉ. देवकांत ठाकुर ने कहा कि भगवान श्री सत्य साईं बाबा ने हमेशा मानवता की सेवा को सर्वोच्च धर्म बताया। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से बाबा के अमर संदेश “Love All – Serve All” तथा “Help Ever – Hurt Never” को अपने जीवन में अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के एक-दूसरे से प्रेम करे और निस्वार्थ सेवा का भाव अपनाए, तो समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारा स्वतः स्थापित हो जाएगा। यही इस रथ यात्रा का मूल उद्देश्य भी है।
नारायण सेवा और प्रसाद वितरण ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा
धार्मिक कार्यक्रम के समापन के बाद श्रद्धालुओं के बीच नारायण सेवा का आयोजन किया गया। सभी उपस्थित भक्तों को प्रेमपूर्वक महाप्रसाद वितरित किया गया। श्रद्धालुओं ने इसे भगवान का आशीर्वाद मानकर श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया।
कार्यक्रम के दौरान सेवा कार्यों में लगे स्वयंसेवकों ने अत्यंत अनुशासित और समर्पित भाव से अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। बारिश के बावजूद सेवा का क्रम कहीं भी बाधित नहीं हुआ।
सैकड़ों साईं भक्तों के सहयोग से सफल हुआ आयोजन
इस भव्य धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में रवि ठाकुर (कन्वीनर), उत्तम कुमार दास सोरेन, ॐ कुमार, अजीत राय, आशा देवी, लेखिका कुमारी, अंकित कुमार, योगेश पासवान, सदानन्द ठाकुर, सूरज गुप्ता सहित सैकड़ों साईं भक्तों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
स्वयंसेवकों ने रथ यात्रा की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के स्वागत, भजन-कीर्तन, पूजन, प्रसाद वितरण तथा नारायण सेवा जैसे सभी कार्यों को अत्यंत व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया।
विश्व शांति की प्रार्थना के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम का समापन भगवान श्री सत्य साईं बाबा के जयघोष, सामूहिक प्रार्थना तथा विश्व शांति की मंगलकामना के साथ हुआ। श्रद्धालु अपने साथ केवल भगवान के दर्शन की स्मृतियां ही नहीं, बल्कि प्रेम, सेवा, करुणा, मानवता और विश्व बंधुत्व का अमूल्य संदेश भी लेकर अपने घर लौटे।
श्री सत्य साईं प्रेम प्रवाहिनी रथ यात्रा ने यह संदेश एक बार फिर सशक्त रूप से दिया कि सच्ची भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं होती, बल्कि प्रेम, सेवा और मानव कल्याण के कार्यों में ही ईश्वर का वास्तविक स्वरूप दिखाई देता है। यही कारण रहा कि तेज बारिश भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकी और पाकुड़ ने एक बार फिर भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक एकता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।


