पाकुड़। आज के डिजिटल दौर में एक छोटी-सी लापरवाही किसी व्यक्ति की जीवनभर की मेहनत की कमाई को पलभर में खत्म कर सकती है। सिर्फ एक अनजान कॉल, एक फर्जी लिंक, एक OTP या एक QR Code स्कैन करना आपको साइबर अपराधियों के जाल में फंसा सकता है। इन्हीं बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा), रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पाकुड़ की ओर से पाकुड़ प्रखंड के अंजना अपग्रेड +2 विद्यालय, अंजना में साइबर फ्रॉड एवं विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के साथ-साथ आम नागरिकों को ऑनलाइन ठगी के नए-नए तरीकों से अवगत कराना तथा उन्हें सतर्क एवं सुरक्षित रहने के लिए प्रेरित करना था।
साइबर अपराधियों की चाल समझिए, तभी रहेंगे सुरक्षित
कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडेय के निर्देश पर आयोजित हुआ, जिसमें डालसा सचिव रूपा बंदना किरो मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि आज के समय में साइबर अपराधी लोगों की कम जानकारी, जल्दबाजी और विश्वास का फायदा उठाकर उन्हें अपना शिकार बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि अपराधी कभी बैंक अधिकारी, कभी सरकारी कर्मचारी, कभी KYC अपडेट, तो कभी पुरस्कार जीतने का झांसा देकर लोगों से उनकी गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते हैं। एक बार यदि किसी व्यक्ति ने OTP, ATM PIN, UPI PIN या बैंक संबंधी जानकारी साझा कर दी, तो उसका बैंक खाता कुछ ही मिनटों में खाली हो सकता है।
फर्जी कॉल, लिंक और OTP से रहें सावधान
रूपा बंदना किरो ने विद्यार्थियों को विस्तार से बताया कि वर्तमान समय में साइबर अपराधी अनेक नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- फर्जी बैंक कॉल
- OTP साझा कराने की कोशिश
- KYC अपडेट के नाम पर धोखाधड़ी
- अनजान लिंक भेजकर मोबाइल हैक करना
- फर्जी निवेश योजनाएं
- लॉटरी जीतने का झांसा
- सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग
जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
उन्होंने सभी विद्यार्थियों से अपील की कि किसी भी अनजान कॉल, SMS, WhatsApp मैसेज, ई-मेल अथवा सोशल मीडिया लिंक पर बिना जांचे-परखे विश्वास न करें। यदि कोई व्यक्ति बैंक या सरकारी अधिकारी बनकर जानकारी मांगता है तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
थाना प्रभारी ने बताए साइबर ठगों के नए हथकंडे
कार्यक्रम में उपस्थित थाना प्रभारी गौरव कुमार ने विद्यार्थियों को बताया कि साइबर अपराधी लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं। अब वे केवल बैंक कॉल ही नहीं बल्कि ऑनलाइन गेमिंग एप, फर्जी निवेश योजनाएं, PM किसान योजना का लाभ, सरकारी सब्सिडी, नौकरी दिलाने, इनाम जीतने जैसे अनेक प्रलोभन देकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आजकल UPI, QR Code, ऑनलाइन शॉपिंग, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल पेमेंट से जुड़ी ठगी के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक को किसी भी ऑनलाइन लेन-देन से पहले पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।
‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए अपराधों से भी रहें सतर्क
स्थायी लोक अदालत के सदस्य राजीव कुमार झा ने विद्यार्थियों को एक नए प्रकार के साइबर अपराध “डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest)” के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अपराधी खुद को CBI, पुलिस, ED, आयकर विभाग अथवा अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल करते हैं और उन्हें डराकर पैसे ट्रांसफर कराने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी नागरिक को इस प्रकार “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती। यदि ऐसा कोई कॉल आए तो घबराने की बजाय तुरंत संबंधित पुलिस अथवा साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।
यदि साइबर ठगी हो जाए तो तुरंत करें यह काम
लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के डिप्टी चीफ मो. नुकुमुद्दीन शेख ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है तो उसे बिल्कुल भी समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करनी चाहिए। समय रहते शिकायत दर्ज होने पर कई मामलों में ठगी गई राशि को वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है।
विद्यालय ने विद्यार्थियों से किया जागरूकता फैलाने का आग्रह
विद्यालय के प्राचार्य पवन कुमार ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल स्वयं ही सतर्क न रहें, बल्कि अपने माता-पिता, रिश्तेदारों, मित्रों और आसपास के लोगों को भी साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करें।
उन्होंने कहा कि आज के समय में जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। यदि प्रत्येक व्यक्ति सावधानी बरते तो साइबर अपराधों की घटनाओं में काफी कमी लाई जा सकती है।
मोबाइल का सही उपयोग और माता-पिता के सम्मान का भी दिया संदेश
कार्यक्रम में पीसीआई-यूनिसेफ के डीपीसी मो. अनीश ने विद्यार्थियों को पेरेंटिंग सेशन के माध्यम से जीवन मूल्यों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने माता-पिता का सम्मान करने, उनकी बात मानने, पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने और एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन आधुनिक जीवन का महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन इसका गलत उपयोग कई समस्याओं को जन्म देता है। इसलिए मोबाइल का इस्तेमाल जिम्मेदारी और सावधानी के साथ करना चाहिए तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि से दूर रहना चाहिए।
बाल विवाह रोकने और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की भी दी गई जानकारी
कार्यक्रम के दौरान केवल साइबर सुरक्षा ही नहीं बल्कि बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई पर भी चर्चा की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और इसके गंभीर सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणाम होते हैं।
यदि किसी भी बच्चे के साथ कोई समस्या हो या कहीं बाल विवाह की जानकारी मिले तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना देने की अपील की गई, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे जनप्रतिनिधि, शिक्षक और छात्र
कार्यक्रम का संचालन इंडियन नेशनल एसोसिएशन के अध्यक्ष जेड एच विश्वास ने किया।
इस अवसर पर पंचायत के मुखिया मो. सलीम, सद्दाम हुसैन, स्वरूप कुमार, वीणा कुमारी, जावेद आलम, वसीमा खातून, नसरुद्दीन शेख, सपन परमाणु, जाकिर हुसैन, हक साहब, विद्यार्थी नेहा परवीन, साहिल, सम्मूल नाज, पारा लीगल वॉलिंटियर्स मो. सायेम अली, मोकमाउल शेख, मैनुल शेख, याकूब अली, नीरज कुमार राउत सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
संदेश: सतर्क रहें, सुरक्षित रहें
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी हथियार जागरूकता है। किसी भी अनजान कॉल, OTP, QR Code, फर्जी लिंक, KYC अपडेट, लॉटरी, निवेश योजना या बैंक संबंधी संदेश पर बिना सत्यापन विश्वास न करें। थोड़ी-सी सावधानी न केवल आपकी मेहनत की कमाई बचा सकती है, बल्कि आपको मानसिक और आर्थिक नुकसान से भी सुरक्षित रख सकती है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार का यह जागरूकता अभियान विद्यार्थियों और आम लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ, जिसने सभी को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने का व्यवहारिक संदेश दिया।


