पाकुड़। कभी-कभी किसी की जिंदगी बचाने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, सिर्फ एक सही वक्त पर लिए गए छोटे से फैसले की जरूरत होती है। पाकुड़ में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जहां एक फोन कॉल के बाद कुछ ही मिनटों में लिए गए फैसले ने एक जरूरतमंद मरीज और उसके परिवार के लिए उम्मीद की नई किरण जगा दी।
रक्तदान के क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहने वाली संस्था इंसानियत फाउंडेशन के सदस्यों की पहल एक बार फिर मानवता की मिसाल बनकर सामने आई है। संस्था के प्रयास से एक जरूरतमंद मरीज के लिए समय पर रक्त की व्यवस्था हो सकी। इस नेक काम में चांचकी निवासी एवं मिठाई दुकानदार मुरतूज आलम ने बिना किसी देरी के रक्तदान कर मानवता का संदेश दिया।
अस्पताल में चल रहा था इलाज, डॉक्टर ने बताया इमरजेंसी
जानकारी के अनुसार मोहनपुर निवासी जोसिम अंसारी का इलाज सदर अस्पताल सोनाजोड़ी में चल रहा है। इलाज के दौरान चिकित्सक ने मरीज को आपात स्थिति में रक्त चढ़ाने की आवश्यकता बताई। डॉक्टर की ओर से इमरजेंसी में खून चढ़ाने की जानकारी मिलने के बाद मरीज के परिजनों के सामने रक्त की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया।
इसी बीच इसकी जानकारी इंसानियत फाउंडेशन के सचिव बानिज शेख को मिली। जरूरत की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने तत्काल रक्त की व्यवस्था के लिए प्रयास शुरू किया।
एक फोन कॉल… और मुरतूज ने नहीं किया इंतजार
रक्त की आवश्यकता की जानकारी मिलने के बाद संस्था के सचिव बानिज शेख ने अपने मित्र मुरतूज आलम से संपर्क किया। मुरतूज चांचकी में मिठाई की दुकान चलाते हैं।
फोन पर जब उन्हें मरीज के लिए B पॉजिटिव रक्त की तत्काल आवश्यकता के बारे में बताया गया तो उन्होंने बिना किसी देरी के रक्तदान करने का फैसला लिया। उन्होंने यह नहीं पूछा कि मरीज कौन है, परिवार कौन है या उनका उससे क्या रिश्ता है। जरूरत की खबर मिली और उन्होंने इंसानियत को सबसे ऊपर रखते हुए रक्तदान के लिए कदम बढ़ा दिया।
मुरतूज आलम तत्काल पाकुड़ ब्लड बैंक पहुंचे और B पॉजिटिव रक्तदान किया।
उनका यह कदम उस परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ, जो उस समय अपने मरीज के इलाज को लेकर चिंता और परेशानी के दौर से गुजर रहा था।
न कोई स्वार्थ, न कोई पहचान… सिर्फ इंसानियत
रक्तदान की इस घटना की सबसे खास बात यही रही कि रक्तदाता और मरीज के बीच कोई व्यक्तिगत रिश्ता नहीं था। फिर भी एक इंसान की जिंदगी बचाने की जरूरत ने दूसरे इंसान को आगे आने के लिए प्रेरित किया।
यही भावना रक्तदान को महज एक सामाजिक गतिविधि से कहीं अधिक बना देती है। रक्त किसी फैक्ट्री में तैयार नहीं होता और न ही इसे किसी दुकान से खरीदा जा सकता है। जरूरत के समय किसी स्वस्थ व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान ही किसी मरीज के लिए जीवन की उम्मीद बन सकता है।
मुरतूज आलम का यह कदम इसी मानवीय भावना को सामने लाता है कि समाज में आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं, जो किसी अनजान व्यक्ति की मदद के लिए भी बिना देर किए आगे आने को तैयार हैं।
परिजनों ने दी दिल से दुआ
रक्त की व्यवस्था होने के बाद मरीज के परिजनों ने रक्तदाता मुरतूज आलम और इंसानियत फाउंडेशन के प्रति आभार व्यक्त किया। परिजनों ने इस मदद के लिए ढेरों दुआएं दीं और कहा कि मुश्किल समय में मिली यह सहायता उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रही।
एक परिवार के लिए जब अपने किसी सदस्य का जीवन संकट में होता है, तब समय पर मिला रक्त सिर्फ रक्त की एक यूनिट नहीं होता, बल्कि वह उम्मीद, भरोसा और जीवन की एक नई संभावना लेकर आता है।
इंसानियत फाउंडेशन लगातार कर रहा रक्तदान के लिए प्रेरित
पाकुड़ जिले में इंसानियत फाउंडेशन रक्तदान के क्षेत्र में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। संस्था के सदस्य जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की व्यवस्था करने और लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने का कार्य करते रहे हैं।
संस्था का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों तक समय पर रक्त पहुंचाना और समाज में स्वैच्छिक रक्तदान की भावना को मजबूत करना है। संस्था से जुड़े सदस्यों का मानना है कि रक्तदान किसी एक व्यक्ति की मदद भर नहीं है, बल्कि यह समाज में मानवता और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करने का माध्यम भी है।
ऐसी पहल उन लोगों के लिए भी प्रेरणा बनती है, जो रक्तदान करना चाहते हैं लेकिन किसी जरूरतमंद तक सही समय पर पहुंच नहीं पाते।
ब्लड बैंक कर्मियों की भी रही मौजूदगी
रक्तदान के दौरान पाकुड़ ब्लड बैंक के कर्मचारी नवीन कुमार एवं पीयूष दास भी मौजूद रहे। निर्धारित प्रक्रिया के तहत मुरतूज आलम ने रक्तदान किया।
एक ओर अस्पताल में मरीज के इलाज की प्रक्रिया चल रही थी, वहीं दूसरी ओर रक्तदाता ने समय पर ब्लड बैंक पहुंचकर अपनी जिम्मेदारी निभाई। इन दोनों प्रयासों के बीच रक्त की व्यवस्था संभव हुई और मरीज के परिवार को राहत मिली।
एक यूनिट रक्त, लेकिन किसी परिवार के लिए पूरी उम्मीद
रक्तदान को अक्सर सिर्फ एक यूनिट रक्त देने के रूप में देखा जाता है, लेकिन वास्तव में इसकी अहमियत उससे कहीं अधिक होती है। एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद मरीज के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और उसके परिवार को उस कठिन समय में उम्मीद दे सकता है।
मुरतूज आलम का रक्तदान इसी भावना को दर्शाता है। उन्होंने अपने व्यस्त समय से कुछ पल निकालकर ऐसा काम किया, जिसकी कीमत किसी परिवार के लिए शायद शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है।
जरूरत के वक्त काम आई इंसानियत
पाकुड़ की यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि समाज की असली ताकत सिर्फ बड़े आयोजनों या बड़े दावों में नहीं, बल्कि जरूरत के वक्त एक-दूसरे के लिए खड़े होने में है।
एक फोन कॉल हुआ। जरूरत बताई गई। कुछ ही समय में फैसला लिया गया और मुरतूज आलम ब्लड बैंक पहुंच गए। उन्होंने रक्तदान किया और किसी की जिंदगी के लिए उम्मीद की एक नई किरण बन गए।
यही वह छोटी-सी पहल है, जो समाज में बड़े बदलाव की नींव रखती है।
आज जब रक्त की जरूरत पड़ने पर कई परिवार परेशान हो जाते हैं, ऐसे में मुरतूज आलम जैसे रक्तदाता और इंसानियत फाउंडेशन जैसी संस्थाएं समाज के लिए प्रेरणा का काम कर रही हैं।
क्योंकि रक्तदान सिर्फ खून देना नहीं है… यह किसी अनजान इंसान को जिंदगी की एक और उम्मीद देना है।
मुरतूज आलम के इस मानवीय कदम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसानियत जिंदा है तो किसी की जिंदगी के लिए उम्मीद भी जिंदा रहती है।


