पाकुड़। अमड़ापाड़ा प्रखंड सभागार में शनिवार को बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। झारखंड विकास परिषद द्वारा संचालित “सुरक्षित बचपन के लिए दामिन पहल” परियोजना के तहत आयोजित इस बैठक में ग्राम एवं प्रखंड स्तरीय बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों के सदस्यों को बाल संरक्षण की जिम्मेदारियों और चुनौतियों से अवगत कराया गया। बैठक का मुख्य फोकस बाल विवाह, बाल श्रम, बाल तस्करी, यौन शोषण और बच्चों के साथ होने वाली उपेक्षा को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर मजबूत तंत्र तैयार करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रखंड प्रमुख प्रिया मरांडी, अंचल अधिकारी औसफ़ अहमद खां, प्रखंड शिक्षा कार्यक्रम पदाधिकारी मोहम्मद ए हसमत, एएसआई काली प्रसाद साह, डीपीसी पीसीआई यूनिसेफ पाकुड़ मोहम्मद अनीस, जिला बाल संरक्षण इकाई/CHL से अभिजीत चंद्र दा और परियोजना समन्वयक मनोरंजन सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
समितियां केवल कागज पर नहीं, जमीन पर दिखाएं सक्रियता
बैठक को संबोधित करते हुए प्रखंड प्रमुख जूहीप्रिया मरांडी ने कहा कि मिशन वात्सल्य के तहत प्रखंड और पंचायत स्तर पर बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों का गठन बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों में स्थानीय स्तर पर त्वरित हस्तक्षेप और संवेदनशीलता बेहद महत्वपूर्ण है।
वहीं अंचल अधिकारी औसफ़ अहमद खां ने कहा कि इन समितियों का उद्देश्य केवल बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि उनके समुचित विकास के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना भी है। बच्चों को शोषण, उपेक्षा और हिंसा से बचाने के लिए प्रशासन के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
बाल विवाह और तस्करी के खिलाफ गांव स्तर पर निगरानी पर जोर
जिला बाल संरक्षण इकाई के अभिजीत चंद्र दा ने कहा कि बाल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर समितियां पूरी सक्रियता के साथ काम करें तो बाल विवाह, बाल श्रम, बाल तस्करी और यौन शोषण जैसी गंभीर समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीण स्तर पर कार्य करने वाले लोगों से बच्चों से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की।
बच्चों को ‘सुरक्षित-असुरक्षित स्पर्श’ की जानकारी देना जरूरी
डीपीसी पीसीआई यूनिसेफ पाकुड़ मोहम्मद अनीस ने जनप्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी सेविकाओं और सभी हितधारकों से बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या बच्चे से संबंधित गंभीर मामले की सूचना तत्काल संबंधित विभाग को दी जानी चाहिए।
उन्होंने बच्चों को ‘सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श’ के प्रति जागरूक करने पर भी विशेष जोर दिया। इसके लिए कॉमिक्स और सरल माध्यमों का उपयोग कर बच्चों तक जरूरी जानकारी पहुंचाने की बात कही गई, ताकि बच्चे स्वयं भी खतरे को पहचान सकें और जरूरत पड़ने पर मदद मांग सकें।
PPT के जरिए बताए गए बाल अधिकार और संरक्षण के तरीके
बैठक के दौरान पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से बाल अधिकार, बाल यौन शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि बच्चों के संरक्षण के लिए सरकारी तंत्र के साथ-साथ पंचायत, विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र और समुदाय की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि बच्चों से संबंधित किसी भी मामले में देरी न हो और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध बाल संरक्षण तंत्र को सक्रिय करते हुए जरूरतमंद बच्चे तक समय पर सहायता पहुंचाई जाए।
पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर आंगनबाड़ी सेविकाओं तक की रही भागीदारी
कार्यक्रम में अमड़ापाड़ा प्रखंड की विभिन्न पंचायतों के मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, ग्राम प्रधान, आंगनबाड़ी सेविकाएं, पैरा लीगल वॉलंटियर्स, ग्राम बाल संरक्षण समिति के सदस्य तथा जेएसएलपीएस के जेंडर रिसोर्स पर्सन शामिल हुए।
परियोजना समन्वयक मनोरंजन सिंह ने कहा कि कार्यक्रम का मूल उद्देश्य स्थानीय स्तर पर बाल संरक्षण समितियों का गठन कर उन्हें सशक्त और सक्रिय बनाना है। उन्होंने कहा कि जब पंचायत और गांव स्तर पर बाल संरक्षण का तंत्र मजबूत होगा, तभी बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों और शोषण की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।
बैठक से एक स्पष्ट संदेश सामने आया कि बच्चों की सुरक्षा केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रह सकती। इसके लिए गांव, पंचायत, स्कूल, आंगनबाड़ी और समाज के हर जिम्मेदार व्यक्ति को मिलकर सक्रिय भूमिका निभानी होगी। यही सामूहिक प्रयास बाल विवाह, बाल श्रम, तस्करी और यौन शोषण जैसी चुनौतियों के खिलाफ बच्चों के लिए सुरक्षित बचपन की मजबूत नींव तैयार कर सकता है।


