जब इलाज के लिए रक्त जरूरी हुआ, तब उम्मीद ने इंसानियत का दरवाजा खटखटाया
पाकुड़। जिंदगी और मौत के बीच कभी-कभी फासला बहुत छोटा रह जाता है। ऐसे ही एक कठिन क्षण में 27 वर्षीय मगफुरा बीबी, निवासी ईशाकपुर, की जिंदगी इलाज के दौरान रक्त की कमी के कारण ठहर-सी गई थी। पाकुड़ स्थित खुशी नर्सिंग होम में इलाजरत मगफुरा बीबी के लिए चिकित्सक ने दो यूनिट बी पॉजिटिव रक्त की तत्काल व्यवस्था करने को कहा। रक्त उपलब्ध होने के बाद ही इलाज को आगे बढ़ाया जा सकता था। ऐसे वक्त में परिजनों की चिंता बढ़ गई और उनकी निगाहें मदद की तलाश में उठने लगीं।
परिजनों की चिंता के बीच इंसानियत फाउंडेशन तक पहुंची पुकार
मुश्किल की इस घड़ी में परिजनों ने मदद के लिए इंसानियत फाउंडेशन के एक्टिव सदस्य नवाब शेख एवं सलीम शेख से संपर्क किया। मामले की जानकारी समूह में साझा की गई। एक जरूरतमंद की जिंदगी बचाने के लिए रक्त की आवश्यकता की सूचना जैसे ही सामने आई, ईशाकपुर के दो नौजवानों ने बिना देर किए आगे आने का फैसला किया।
दो युवाओं ने कहा रक्त हमारा है, तो किसी की जिंदगी के काम क्यों न आए
रक्त की जरूरत महज एक चिकित्सकीय आवश्यकता थी, लेकिन मोजाम्मेल और मेहबूब के लिए यह किसी अनजान व्यक्ति की जिंदगी से जुड़ा सवाल बन गया। दोनों युवाओं ने रक्तदान करने का निर्णय लिया। उनके इस फैसले में न कोई स्वार्थ था, न किसी प्रतिफल की अपेक्षा सिर्फ यह भावना थी कि उनके शरीर का रक्त किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने में काम आ सके।
समय के साथ दौड़े कदम, पाकुड़ रक्त अधिकोष पहुंचकर किया रक्तदान
दोनों युवाओं ने समय गंवाए बिना पाकुड़ रक्त अधिकोष पहुंचकर अपना बी पॉजिटिव रक्तदान किया। आवश्यक रक्त की व्यवस्था होने के बाद मगफुरा बीबी का इलाज संभव हो सका। जिस समय परिवार चिंता और अनिश्चितता के बीच खड़ा था, उसी समय इन दो युवाओं का रक्तदान उम्मीद की वह कड़ी बना, जिसने इलाज को आगे बढ़ाने का रास्ता खोल दिया।
दो यूनिट रक्त ने केवल कमी नहीं पूरी की, परिवार की उम्मीद लौटा दी
रक्त की दो यूनिट मात्रा आंकड़ों में भले ही छोटी लगे, लेकिन किसी मरीज और उसके परिवार के लिए इसका महत्व जीवन से कम नहीं होता। मगफुरा बीबी के मामले में भी यही दो यूनिट रक्त इलाज की राह में जरूरी सहारा बना। परिजनों के लिए यह केवल रक्त मिल जाने की खबर नहीं थी, बल्कि उस बेचैनी के बीच राहत की सांस थी, जहां हर गुजरता पल भारी लग रहा था।
रक्तदान का असली अर्थ तभी है, जब रक्त किसी अनजान की नसों में जिंदगी बनकर दौड़े
रक्तदान को अक्सर सामाजिक सेवा कहा जाता है, लेकिन इसकी गहराई इससे कहीं अधिक है। रक्त किसी जाति, धर्म, भाषा या पहचान का भेद नहीं करता। जिस शरीर से रक्त निकलता है, वहां से वह दूसरे शरीर में पहुंचकर जीवन का हिस्सा बन जाता है। मोजाम्मेल और मेहबूब का रक्तदान इसी मानवीय सत्य का उदाहरण बना—इंसानियत की कोई पहचान नहीं होती, उसकी सिर्फ एक पहचान होती है कि वह जरूरत के समय किसी के काम आए।
परिजनों की आंखों में राहत, जुबां पर निकलीं दुआएं
रक्त की व्यवस्था होने और इलाज संभव होने के बाद मगफुरा बीबी के परिजनों ने राहत महसूस की। उन्होंने रक्तदाताओं और मददगारों का आभार व्यक्त करते हुए ढेरों दुआएं दीं। उनके लिए यह मदद किसी औपचारिक सहयोग से कहीं बढ़कर थी। संकट की घड़ी में मिला यह साथ उन्हें यह भरोसा दे गया कि कठिन समय में समाज के भीतर अब भी ऐसे लोग मौजूद हैं, जो किसी की जिंदगी बचाने के लिए आगे आ सकते हैं।
इंसानियत फाउंडेशन की पहल बनी मदद की कड़ी
इस पूरे घटनाक्रम में इंसानियत फाउंडेशन के सदस्यों की सक्रियता भी महत्वपूर्ण रही। जरूरत की सूचना को सामने लाने से लेकर रक्तदाताओं तक पहुंच बनाने की प्रक्रिया ने यह साबित किया कि संगठित प्रयास संकट की घड़ी में किसी परिवार के लिए बड़ा सहारा बन सकता है। संस्था की पहल और युवाओं की तत्परता ने मिलकर रक्त की जरूरत को समय पर पूरा करने में भूमिका निभाई।
मौके पर मौजूद रहे फाउंडेशन के सदस्य
इस अवसर पर इंसानियत फाउंडेशन के एक्टिव सदस्य नूर इस्लाम, नवाब शेख, सलीम शेख, सचिव बानिज शेख, कर्मचारी नवीन कुमार एवं पियूष दास मौजूद रहे। सभी ने इस मानवीय प्रयास में अपनी भूमिका निभाई और रक्तदान की इस पहल को सफल बनाने में सहयोग किया।
दो यूनिट रक्त नहीं, जीवन की पूरी कहानी है रक्तदान
रक्तदान की एक बूंद की कीमत तब समझ आती है, जब किसी अस्पताल में किसी परिवार की सांसें उम्मीद से बंधी हों। उस समय रक्त केवल शरीर में बहने वाला द्रव नहीं रहता, वह जिंदगी को आगे बढ़ाने वाला माध्यम बन जाता है। मोजाम्मेल और मेहबूब ने रक्तदान कर यह संदेश दिया कि समाज में बदलाव हमेशा बड़े कामों से नहीं आता कभी किसी जरूरतमंद के लिए समय पर बढ़ाया गया हाथ भी मानवता की सबसे बड़ी मिसाल बन जाता है।
अंततः जब इंसानियत जागती है, तो जिंदगी हारती नहीं
मगफुरा बीबी के इलाज के दौरान आई रक्त की जरूरत ने एक परिवार को चिंता में डाल दिया था, लेकिन दो युवाओं के आगे आने से वही चिंता उम्मीद में बदल गई। इंसानियत फाउंडेशन की पहल, परिजनों की पुकार और मोजाम्मेल-मेहबूब के रक्तदान ने मिलकर इस घटना को मानवता की एक ऐसी तस्वीर बना दिया, जिसमें कोई किसी का अपना होकर नहीं, इंसान होकर दूसरे इंसान के काम आया।
शायद रक्तदान का सबसे सुंदर अर्थ यही है आपका रक्त किसी ऐसे व्यक्ति की जिंदगी में दौड़ता है, जिसे आप जानते तक नहीं; लेकिन उसी अनजान जिंदगी की धड़कन में कहीं न कहीं आपकी इंसानियत हमेशा के लिए दर्ज हो जाती है।


