कुछ विदाइयां केवल किसी एक परिवार के आंगन को सूना नहीं करतीं, बल्कि अपने पीछे एक ऐसा खालीपन छोड़ जाती हैं, जिसकी भरपाई लंबे समय तक संभव नहीं होती। सियासत में भी कुछ चेहरे केवल पद और पहचान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अपने संघर्ष, समर्पण और सहज व्यवहार से लोगों के दिलों में जगह बना लेते हैं। दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का आकस्मिक निधन भी झारखंड की राजनीति के लिए ऐसी ही एक पीड़ादायक घटना बनकर सामने आया है।
इसी दुख की घड़ी में लिट्टीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक हेमलाल मुर्मू सपरिवार गिरिडीह स्थित दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के आवास पहुंचे। उनके साथ उनकी धर्मपत्नी मीरु सोरेन तथा युवा नेता सह केंद्रीय सदस्य विकास मुर्मू भी मौजूद रहे। आवास पहुंचकर सभी ने दिवंगत नेता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
तस्वीर के सामने खामोश थी आंखें, शब्दों में था गहरा दर्द
श्रद्धांजलि के इस क्षण में माहौल गमगीन रहा। सामने सुदिव्य कुमार सोनू की तस्वीर थी और आसपास उनकी स्मृतियों से जुड़ा परिवार। ऐसे क्षणों में शब्द अक्सर छोटे पड़ जाते हैं और भावनाएं आंखों के रास्ते अपनी भाषा तलाशती हैं।
विधायक हेमलाल मुर्मू ने दिवंगत मंत्री के निधन को अत्यंत पीड़ादायक और अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू ने पार्टी और झारखंड की जनता के लिए पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ काम किया। उनका राजनीतिक जीवन संघर्ष, संगठन के प्रति प्रतिबद्धता और जनसेवा की भावना से जुड़ा रहा।
उन्होंने कहा कि दिवंगत सुदिव्य कुमार सोनू का आदरणीय दिशोम गुरु, झारखंड राज्य के निर्माता श्रद्धेय गुरुजी के साथ भी बेहद करीबी और आत्मीय संबंध रहा। पार्टी के महत्वपूर्ण कार्यों और कठिन परिस्थितियों में उन्होंने मजबूती के साथ गुरुजी का साथ निभाया।
“हमने पार्टी का एक मजबूत स्तंभ और समर्पित साथी खो दिया”
हेमलाल मुर्मू ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े, संघर्षशील और जनप्रिय नेता थे। आम लोगों के बीच उनकी गहरी पकड़ थी और समाज के हर वर्ग के लोगों के साथ उनका आत्मीय संबंध रहा।
उनका सहज और सरल व्यक्तित्व, हर व्यक्ति के प्रति सम्मान तथा सभी को साथ लेकर चलने की सोच उनकी पहचान थी। यही कारण है कि उनका जाना केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व का जाना नहीं, बल्कि उन तमाम लोगों के लिए व्यक्तिगत क्षति जैसा है, जिनके जीवन को उन्होंने अपने व्यवहार और संपर्क से छुआ था।
हेमलाल मुर्मू ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा परिवार ने एक मजबूत स्तंभ और एक समर्पित साथी खो दिया है। उनके जाने से पार्टी के भीतर जो रिक्तता पैदा हुई है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा।
गिरिडीह ने खोया अपना जमीनी और जनप्रिय चेहरा
दिवंगत मंत्री के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए हेमलाल मुर्मू ने कहा कि यह क्षति केवल झारखंड मुक्ति मोर्चा की नहीं है, बल्कि पूरे झारखंड की है। विशेष रूप से गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र ने एक ऐसे जमीनी, संघर्षशील और जनप्रिय नेता को खो दिया है, जिनकी कमी आने वाले समय में भी महसूस होती रहेगी।
राजनीति में पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन जनता के बीच बनाई गई जगह लंबे समय तक जीवित रहती है। सुदिव्य कुमार सोनू की राजनीतिक विरासत भी उनके काम, संघर्ष और लोगों से जुड़े आत्मीय रिश्तों के माध्यम से याद की जाती रहेगी।
शोकाकुल परिवार के साथ खड़ा हुआ सियासी परिवार
श्रद्धांजलि देने पहुंचे हेमलाल मुर्मू ने शोक-संतप्त परिजनों को ढांढस बंधाया और इस कठिन समय में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिया। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार, शुभचिंतकों और समर्थकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
गिरिडीह के उस घर में जहां कभी राजनीतिक चर्चाओं और जनसरोकार की आवाजें गूंजती थीं, आज स्मृतियों का सन्नाटा है। तस्वीर पर चढ़े फूल बहुत कुछ कह रहे हैं—एक ऐसे साथी की याद, जिसने संघर्ष की राह पर चलते हुए अपने पीछे रिश्तों और समर्पण की एक लंबी कहानी छोड़ दी।
सुदिव्य कुमार सोनू को विनम्र श्रद्धांजलि।


