इतिहास के उस विचारक को नमन, जिसने राजनीति को समाजसेवा से जोड़ने की राह दिखाई
पाकुड़। राजनीति केवल सत्ता तक पहुंचने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास और सम्मान पहुंचाने का संकल्प भी हो सकती है—इसी विचार को केंद्र में रखते हुए पाकुड़ नगर के बूथ नंबर 427 में भारतीय जनसंघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती श्रद्धा और स्मरण के साथ मनाई गई। बूथ अध्यक्ष लव रजक के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।
एक तस्वीर के सामने झुके सिर, पीछे खड़ा एक विचार
कार्यक्रम के दौरान पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित करते हुए उपस्थित सदस्यों ने उनके जीवन, संघर्ष और विचारों को याद किया। उनके लिए यह अवसर केवल जयंती मनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उस विचारधारा को स्मरण करने का अवसर बना, जिसने समाज के गरीब, पिछड़े और वंचित वर्ग को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया।
एकात्म मानववाद से अंत्योदय तक—विचारों की ऐतिहासिक विरासत
पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय राजनीतिक चिंतन में एकात्म मानववाद के प्रमुख विचारक के रूप में जाने जाते हैं। उनके विचारों में व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़े हुए रूप में देखने की दृष्टि दिखाई देती है। यही कारण है कि उनकी जयंती आज भी उनके समर्थकों के लिए केवल अतीत को याद करने का दिन नहीं, बल्कि वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक कार्यों को उनके विचारों से जोड़कर देखने का अवसर बनती है।
समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की बात फिर केंद्र में
कार्यक्रम में वार्ड पार्षद निभा देवी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज के गरीबों, पिछड़ों और वंचित वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि उनके विचार और एकात्म मानववाद का सिद्धांत आज भी सामाजिक तथा राष्ट्र निर्माण के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है।
श्रद्धांजलि के साथ संगठनात्मक संकल्प का संदेश
बूथ स्तर पर आयोजित यह कार्यक्रम इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा कि राजनीतिक विचारों की बड़ी तस्वीर अक्सर ऐसे ही छोटे-छोटे संगठनात्मक आयोजनों के माध्यम से समाज तक पहुंचती है। बूथ किसी भी राजनीतिक संगठन की जमीनी संरचना की महत्वपूर्ण इकाई माना जाता है। ऐसे आयोजनों के जरिए ऐतिहासिक विचारों को कार्यकर्ताओं और स्थानीय समाज के बीच संवाद का विषय बनाने की कोशिश दिखाई देती है।
पाकुड़ में जुटे कार्यकर्ता, साझा की विचारों की विरासत
कार्यक्रम में वार्ड पार्षद निभा देवी, पूर्व वार्ड पार्षद श्यामल साहा, भाजपा जिला उपाध्यक्ष हिसाबी राय सहित कन्हैया रजक, अशोक राय, दीपक ठाकुर, बाबन घोष, मंगल बागती, सुदर्शन राय, संजय राय, सुखनंदन कर्मकार समेत अन्य कार्यकर्ता और सदस्य मौजूद रहे।
दीनदयाल को याद करने का अर्थ—विचार को समाज से जोड़ना
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर बूथ 427 में हुआ आयोजन एक ऐसे विचार की स्मृति बनकर सामने आया, जिसमें राष्ट्र की प्रगति का अर्थ केवल बड़े विकास कार्यों से नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के जीवन में बदलाव से भी जुड़ा है जो समाज की अंतिम पंक्ति में खड़ा है। कार्यक्रम में श्रद्धांजलि के साथ उनके विचारों को सामाजिक सरोकार और राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ाने का संदेश भी सामने आया।


