पाकुड़। उम्र बढ़ने के साथ जब शरीर को सहारे की जरूरत होती है, तब सम्मान, अधिकार और देखभाल किसी बुजुर्ग के लिए सबसे बड़ी जरूरत बन जाती है। इसी सोच के साथ पाकुड़ के इशाकपुर पंचायत भवन में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार और सम्मान को लेकर विशेष विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यहां करीब 300 वृद्धजन एवं आम नागरिकों को वरिष्ठ नागरिकों के कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान बुजुर्गों के स्वास्थ्य की चिंता करते हुए मेडिकल कैंप भी लगाया गया, जहां बीपी, शुगर समेत अन्य स्वास्थ्य जांच की गई।
कानून की जानकारी से सम्मान और अधिकार तक हुई चर्चा
झालसा, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडेय के निर्देश पर तथा डालसा सचिव रूपा बंदना किरो के मार्गदर्शन में किया गया।
डीएसपी ने बताया वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार जानना जरूरी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीएसपी जिला मुख्यालय उज्जवल कुमार साहा ने वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और उनके कानूनी अधिकारों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बुजुर्गों के हित में मौजूद कानूनी सुरक्षा और उनके अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक किया।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। उनके अनुभव और योगदान को सम्मान देना तथा जरूरत के समय उनकी सहायता करना समाज की जिम्मेदारी है।
भरण-पोषण कानून के प्रावधानों की दी गई जानकारी
लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के डिप्टी चीफ मो. नुकुमुद्दीन शेख और एलएडीसीएस सहायक गंगाराम टुडू ने वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।
उन्होंने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के विभिन्न प्रावधानों को सरल भाषा में समझाया। साथ ही बुजुर्गों के प्रति परिवार और समाज के दायित्व, उनके अधिकारों की रक्षा, देखभाल, चिकित्सा एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी चर्चा की।
“बुजुर्गों का अनुभव हमारी धरोहर है”
इंडियन नेशनल एसोसिएशन के अध्यक्ष जेड. एच. विश्वास ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
उन्होंने कहा कि बुजुर्गों का अनुभव समाज की धरोहर है और उनकी सेवा एवं देखभाल हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य और सम्मान को लेकर भी लोगों को जागरूक किया।
कानून के साथ स्वास्थ्य की भी चिंता
इस जागरूकता शिविर की खास बात यह रही कि यहां केवल कानूनी जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य की भी जांच की गई।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित मेडिकल कैंप में बुजुर्गों का बीपी, शुगर समेत अन्य स्वास्थ्य संबंधी जांच की गई। स्वास्थ्य जांच के माध्यम से बुजुर्गों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने का संदेश भी दिया गया।
बड़ी संख्या में पहुंचे बुजुर्ग और ग्रामीण
कार्यक्रम में इशाकपुर मुखिया मिनाती देवी, डॉ. शेखावत शेख, मो. इमरान आलम, आनंद कुमार, नजरूल शेख, शाफिकुल शेख, कैमुद्दीन विश्वास, अंजारुल शेख, मोताकब्बर शेख, नूरभानु बीबी, नेकाइल शेख, सैफुल शेख, फजर शेख, ज्ञान गंगोत्री विकास संस्था के महावीर चौधरी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
इसके अलावा बड़ी संख्या में ग्रामीण, वरिष्ठ नागरिक और आम नागरिक कार्यक्रम में शामिल हुए। करीब 300 वृद्धजन एवं आम नागरिकों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को व्यापक जन-जागरूकता का रूप दिया।
पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने भी निभाई भूमिका
कार्यक्रम में पैरा लीगल वॉलंटियर्स मोकमाउल शेख, एजारुल शेख और याकूब अली भी मौजूद रहे। उन्होंने कार्यक्रम में आए लोगों को विधिक सहायता और जागरूकता से जुड़े विषयों की जानकारी देने में सहयोग किया।
संदेश सिर्फ कानून का नहीं, जिम्मेदारी का भी
इशाकपुर में आयोजित यह कार्यक्रम केवल कानूनी जानकारी देने तक सीमित नहीं रहा। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की जानकारी जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी उनके प्रति सम्मान, संवेदना, देखभाल और जिम्मेदारी का भाव रखना भी है।
कानून की जानकारी और स्वास्थ्य जांच को एक ही मंच पर जोड़कर आयोजित इस शिविर ने बुजुर्गों के लिए अधिकार और स्वास्थ्य दोनों पहलुओं को एक साथ सामने रखा।


