पाकुड़। देश की एकता और अखंडता की नींव को मजबूत करने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर पाकुड़ में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। बैंक कॉलोनी स्थित उनकी आदमकद प्रतिमा के सामने भाजपा कार्यकर्ताओं ने माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान माहौल में राष्ट्रभक्ति और देश के प्रति समर्पण का भाव दिखाई दिया। कार्यकर्ताओं ने सरदार पटेल के आदर्शों पर चलने के साथ राष्ट्र की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने का संकल्प लिया।
जिसने रियासतों को जोड़कर गढ़ा अखंड भारत, उन्हें किया नमन
सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं ने उस महान व्यक्तित्व को याद किया, जिसने आजादी के बाद बिखरी हुई रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर भारत के एकीकरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। उनका दृढ़ संकल्प, अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
कार्यक्रम का नेतृत्व भाजपा नगर अध्यक्ष सोहन मंडल ने किया। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरदार पटेल का जीवन केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रसेवा, अनुशासन और एकजुटता का संदेश है।
‘लौह पुरुष’ का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता: रूपेश कुमार भगत
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा जिला महामंत्री रूपेश कुमार भगत ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण के इतिहास में सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम सदैव सम्मान के साथ लिया जाएगा। वे अदम्य साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति, दूरदर्शिता और कुशल नेतृत्व के प्रतीक थे।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रियासतों का एकीकरण था। सरदार पटेल ने अपनी राजनीतिक कुशलता और दृढ़ नेतृत्व के बल पर सैकड़ों रियासतों का भारतीय संघ में विलय कराया। उनका यह ऐतिहासिक योगदान अखंड भारत के निर्माण की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ।
राष्ट्रीय एकता दिवस देता है एकजुट रहने का संदेश
रूपेश कुमार भगत ने कहा कि सरदार पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को पूरे देश में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि देश की असली ताकत उसकी एकता, अखंडता और आपसी सद्भाव में निहित है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल के विचारों को आत्मसात करना और उनके दिखाए रास्ते पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
किसान परिवार से निकलकर बने देश के पहले उपप्रधानमंत्री
31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में एक किसान परिवार में जन्मे सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी मेहनत और लगन से कानून की शिक्षा प्राप्त की और बैरिस्टर बने। महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए वे देश के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए।
आजादी के बाद स्वतंत्र भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री के रूप में उन्होंने राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान दिया। उनकी दूरदर्शिता और दृढ़ इच्छाशक्ति ने भारत को एक मजबूत संघीय स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी असाधारण योगदान के कारण देश उन्हें सम्मानपूर्वक ‘लौह पुरुष’ के नाम से याद करता है।
प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ लिया राष्ट्रसेवा का संकल्प
इस कार्यक्रम में भाजपा जिला महामंत्री रूपेश कुमार भगत, जिला उपाध्यक्ष हिसाबी राय, पूर्व जिलाध्यक्ष अनुग्राहित प्रसाद साह, अमृत पांडेय, नगर महामंत्री मनीष राज चौबे, कुंदन गोस्वामी, पूर्व मंडल अध्यक्ष पंकज साह और धर्मेंद्र त्रिवेदी सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
एकता की जिस ताकत को सरदार पटेल ने आजाद भारत की पहचान बनाया, उसे बनाए रखना आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पाकुड़ में उनकी जयंती पर दिया गया संदेश भी इसी विचार को आगे बढ़ाता है कि राष्ट्र की मजबूती केवल सीमाओं से नहीं, बल्कि देशवासियों की एकजुटता से तय होती है।


