पाकुड़। बचपन केवल जीवन की एक अवस्था नहीं, बल्कि सपनों के निर्माण, व्यक्तित्व के विकास और सुनहरे भविष्य की नींव रखने का समय होता है। इस उम्र में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ अपने अधिकारों, सुरक्षा और आत्मसम्मान के प्रति जागरूक करना भी समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए झालसा, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पाकुड़ के तत्वावधान में सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस गर्ल्स, पाकुड़ में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ कुमार क्रांति प्रसाद के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम में डालसा सचिव रूपा बंदना किरो की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष अशोक कुमार शुक्ला, एसडीपीओ कुमार गौरव, जिला शिक्षा पदाधिकारी अनीता पूर्ति तथा विद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनीष गुप्ता मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मूल संदेश स्पष्ट था कि बच्चों का बचपन सुरक्षित होगा, तभी समाज का भविष्य मजबूत होगा। जागरूकता ही वह पहली शक्ति है, जो बच्चों को शोषण, उत्पीड़न, बाल विवाह, बाल श्रम और साइबर अपराध जैसी सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध सचेत एवं सक्षम बनाती है।
अधिकारों की जानकारी ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी : रूपा बंदना किरो
डालसा सचिव रूपा बंदना किरो ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में जीने, शिक्षा प्राप्त करने और सम्मान के साथ जीवन बिताने का अधिकार है। उन्होंने बाल विवाह के दुष्परिणामों, बाल मजदूरी तथा लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने विशेष रूप से स्पष्ट किया कि POCSO कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को संरक्षण प्राप्त है। यह कानून लड़के और लड़की, दोनों पर समान रूप से लागू होता है। बच्चों को यह समझना आवश्यक है कि उनकी इच्छा, गरिमा और शारीरिक सुरक्षा का सम्मान किया जाना चाहिए।
उन्होंने अच्छे स्पर्श और बुरे स्पर्श के बीच अंतर समझाते हुए छात्राओं को संदेश दिया कि यदि किसी का व्यवहार असहज, अनुचित या भयभीत करने वाला महसूस हो, तो उसे किसी भी परिस्थिति में चुपचाप सहन न करें। अपने माता-पिता, अभिभावक, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी अवश्य दें।
उन्होंने कहा कि डर और संकोच के कारण चुप रहना समस्या को बढ़ा सकता है। इसलिए बच्चों को अपनी बात कहने का साहस विकसित करना चाहिए। किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में बाल सहायता हेल्पलाइन नंबर 1098 पर संपर्क करने की जानकारी भी दी गई। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से मिलने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से बताया गया।
बचपन को श्रम नहीं, शिक्षा और सपनों का अधिकार मिलना चाहिए : अशोक कुमार शुक्ला
स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष अशोक कुमार शुक्ला ने बचपन बचाओ अभियान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के संरक्षण के लिए कानून में अनेक अधिकारों एवं प्रावधानों की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक बच्चे को जीवन जीने, शिक्षा प्राप्त करने और गरिमापूर्ण वातावरण में विकसित होने का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने बाल एवं किशोर श्रम से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से काम कराना, कानून द्वारा निर्धारित सीमित अपवादों को छोड़कर, प्रतिबंधित है। वहीं 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों को खतरनाक व्यवसायों एवं प्रक्रियाओं में नियोजित करना भी कानूनन अपराध है।
उन्होंने कहा कि जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और आंखों में भविष्य के सपने होने चाहिए, उस उम्र में उनसे मजदूरी कराना उनके बचपन और अधिकारों के साथ अन्याय है।
उन्होंने शिक्षकों से भी अपील की कि वे समय निकालकर विद्यार्थियों को भारतीय संविधान की प्रस्तावना और उसके महत्वपूर्ण अनुच्छेदों की जानकारी दें। संविधान केवल कानून की पुस्तक नहीं, बल्कि समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व पर आधारित एक बेहतर समाज के निर्माण का मार्गदर्शक है।
डिजिटल दुनिया में सावधानी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच : कुमार गौरव
एसडीपीओ कुमार गौरव ने साइबर अपराध के बढ़ते स्वरूप और उससे बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने छात्राओं को आगाह किया कि डिजिटल दुनिया जितनी सुविधाजनक है, उतनी ही सावधानी की भी मांग करती है।
उन्होंने कहा कि किसी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए और अज्ञात स्रोतों से फोटो या वीडियो डाउनलोड करने से बचना चाहिए। अपना बैंक खाता संबंधी विवरण, पासवर्ड और OTP किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। उन्होंने डिजिटल अरेस्ट जैसी साइबर ठगी की घटनाओं के बारे में भी जानकारी दी और बताया कि साइबर अपराधी भय एवं भ्रम का वातावरण बनाकर लोगों को अपना शिकार बनाते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि इंटरनेट का इस्तेमाल विवेक और सतर्कता के साथ करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी अभिभावकों या संबंधित अधिकारियों को दें। डिजिटल सुरक्षा केवल तकनीकी जानकारी नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जिम्मेदारी और जागरूक नागरिकता का भी हिस्सा है।
जागरूकता से ही बनेगा सुरक्षित और सशक्त समाज : अनीता पूर्ति
जिला शिक्षा पदाधिकारी अनीता पूर्ति ने कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य बच्चों और छात्राओं को बाल विवाह, बाल श्रम, साइबर अपराध तथा अन्य सामाजिक कुरीतियों से बचाव के प्रति सजग बनाना है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन की वास्तविक चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार करना आवश्यक है। जब बच्चे अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझेंगे, तभी वे स्वयं को सुरक्षित रखने के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक बन सकेंगे।
उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि जागरूक रहें, मजबूत बनें और गलत के विरुद्ध आवाज उठाने का साहस रखें। समाज से बाल शोषण एवं अन्य अपराधों को समाप्त करने के लिए शिक्षा, जागरूकता और सामूहिक सहभागिता बेहद जरूरी है।
शिक्षा के साथ अधिकारों की समझ भी जरूरी
कार्यक्रम का मंच संचालन इंडियन नेशनल एसोसिएशन के अध्यक्ष जेड. एच. विश्वास ने किया। उन्होंने सुरक्षित बचपन अभियान के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को उनके अधिकारों एवं संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को यह समझाने का प्रयास किया गया कि कानून की जानकारी केवल अपराध होने के बाद न्याय पाने का माध्यम नहीं है, बल्कि अपराध को रोकने और स्वयं को सुरक्षित रखने का भी एक प्रभावी साधन है। बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने के साथ दूसरों के अधिकारों का सम्मान करने की सीख भी दी गई।
पौधरोपण के साथ दिया सुरक्षित भविष्य का संदेश
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अधिकारियों एवं अतिथियों ने विद्यालय परिसर में पौधरोपण किया। यह पहल केवल पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक नहीं रही, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतर भविष्य तैयार करने का संदेश भी बनी।
विद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनीष गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक बताया और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की उपयोगिता पर अपने विचार रखे।
इस अवसर पर विद्यालय की शिक्षिकाएं दीपानिता चटर्जी एवं मधु रानी, शिक्षक हीरालाल साहा, छात्राएं राधिका कुमारी, रिचा सिन्हा, प्रियांशी गुप्ता, गुलरोशन अली, अनिका नाज, तानिया मंडल, आकृति सिंह एवं अनाया भगत सहित पैरा लीगल वॉलंटियर्स मिलन कुमार मंडल, पिंकी मंडल, खुदू राजवंशी, नीरज कुमार राउत, दीपा कुमारी, नसरुद्दीन शेख तथा बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
एक सुरक्षित बचपन, हजारों उज्ज्वल भविष्य
वास्तव में किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसकी इमारतों, सड़कों या आर्थिक समृद्धि से ही नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि वहां के बच्चे कितने सुरक्षित, स्वतंत्र और सम्मानित हैं। बच्चों को भयमुक्त वातावरण देना केवल सरकार या प्रशासन का दायित्व नहीं, बल्कि परिवार, विद्यालय और समाज की साझा जिम्मेदारी है।
बाल विवाह रोकना, बाल श्रम के विरुद्ध आवाज उठाना, बच्चों को यौन शोषण से बचाना और उन्हें साइबर अपराध के प्रति जागरूक बनाना किसी एक अभियान की सीमित उपलब्धि नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे सामाजिक संस्कार का हिस्सा बनाना होगा।
क्योंकि बच्चों को सुरक्षित बचपन देना उन पर कोई उपकार नहीं, बल्कि उनके मौलिक अधिकारों और मानवीय गरिमा का सम्मान है। जिस समाज में बच्चे अपने अधिकारों को जानते हैं, अपनी बात कहने का साहस रखते हैं और बिना भय के अपने सपनों को जी सकते हैं, वही समाज वास्तव में विकसित, संवेदनशील और सभ्य कहलाने का अधिकारी है।


