पाकुड़। पाकुड़ नगर परिषद क्षेत्र में इन दिनों आवारा पशुओं का बढ़ता जमावड़ा आम लोगों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनता जा रहा है। शहर की मुख्य सड़कों, चौक-चौराहों और गलियों में खुलेआम घूम रहे गोवंश और अन्य आवारा पशु न केवल यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि हर दिन संभावित सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ा रहे हैं। दिन हो या रात, सड़क के बीचों-बीच बैठे पशुओं के कारण वाहन चालकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए पाकुड़ नगर परिषद की वार्ड पार्षद निभा देवी ने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार चौधरी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
हर दिन बढ़ रहा है हादसों का खतरा
शहर के विभिन्न इलाकों में बड़ी संख्या में आवारा पशु खुलेआम घूमते हुए देखे जा रहे हैं। कई बार ये पशु अचानक सड़क पर आ जाते हैं, जबकि कई बार घंटों तक सड़क के बीचों-बीच बैठ जाते हैं। इससे दोपहिया, चारपहिया और बड़े वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगानी पड़ती है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब सड़क पर निकलते समय सबसे बड़ा डर किसी वाहन से नहीं, बल्कि अचानक सामने आ जाने वाले आवारा पशुओं से लगने लगा है।
रात के अंधेरे में और भी खतरनाक हो जाती है स्थिति
दिन के मुकाबले रात्रि के समय यह समस्या और भी भयावह रूप ले लेती है। कई स्थानों पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट नहीं होने के कारण सड़क पर बैठे पशु दूर से दिखाई नहीं देते। तेज गति से आने वाले वाहन चालक जब तक पशुओं को देख पाते हैं, तब तक काफी देर हो चुकी होती है। ऐसे में अचानक ब्रेक लगाने या वाहन मोड़ने के प्रयास में दुर्घटनाएं हो जाती हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं। कई लोग घायल भी हो चुके हैं और भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा गंभीर है समस्या
वार्ड पार्षद निभा देवी ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि नगर परिषद क्षेत्र के कई प्रमुख स्थानों पर आवारा पशुओं की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। इनमें भगत पाड़ा, हाटपाड़ा, अंबेडकर चौक, हरिणडंगा बाजार, रेलवे फाटक, मालगोदाम रोड और विवेकानंद चौक जैसे व्यस्त क्षेत्र शामिल हैं।
इन स्थानों पर दिनभर लोगों और वाहनों की भारी आवाजाही रहती है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पशु सड़क पर बैठे या घूमते रहते हैं, जिससे अक्सर जाम जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। कई बार राहगीरों को लंबा इंतजार करना पड़ता है, जबकि वाहन चालकों को जोखिम उठाकर निकलना पड़ता है।
यातायात व्यवस्था भी हो रही प्रभावित
आवारा पशुओं की वजह से केवल दुर्घटनाओं का खतरा ही नहीं बढ़ रहा, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। सड़क के बीचों-बीच बैठे पशुओं के कारण वाहन धीमी गति से चलते हैं, जिससे पीछे लंबी कतारें लग जाती हैं। कार्यालय जाने वाले कर्मचारी, छात्र-छात्राएं, मरीजों को लेकर जा रहे वाहन और व्यापारिक गतिविधियां भी इससे प्रभावित हो रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार पशु आपस में लड़ने लगते हैं, जिससे राहगीरों में अफरा-तफरी मच जाती है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी अधिक खतरनाक बन जाती है।
वार्ड पार्षद निभा देवी ने उठाई मजबूत आवाज
बढ़ती समस्या को गंभीरता से लेते हुए वार्ड पार्षद निभा देवी ने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार चौधरी को लिखित ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
उन्होंने मांग की है कि नगर परिषद इस दिशा में विशेष अभियान चलाए और शहर की सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर भेजने की व्यवस्था करे। उनका कहना है कि नगर परिषद की प्राथमिक जिम्मेदारी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए।
गौशाला और कांजी हाउस भेजने की मांग
ज्ञापन में वार्ड पार्षद ने मांग की है कि नगर परिषद द्वारा पकड़े गए आवारा पशुओं को सुरक्षित रूप से गौशाला अथवा कांजी हाउस में रखा जाए, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो और शहर की सड़कें भी सुरक्षित बन सकें।
उन्होंने कहा कि पशुओं की सुरक्षा और आम नागरिकों की सुरक्षा दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे पशुओं को भी उचित संरक्षण मिले और सड़क पर चलने वाले लोगों को भी राहत मिले।
लापरवाह पशुपालकों पर कार्रवाई की मांग
वार्ड पार्षद ने यह भी मांग की है कि नगर परिषद ऐसे पशुपालकों की पहचान करे, जो अपने पशुओं को खुला छोड़ देते हैं। ऐसे लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति अपने पशुओं को सड़क पर छोड़ने की हिम्मत न करे।
उन्होंने कहा कि यदि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी तो समस्या स्वतः काफी हद तक नियंत्रित हो जाएगी और शहर की यातायात व्यवस्था भी सुधरेगी।
स्थायी समाधान की उम्मीद
शहरवासियों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से बनी हुई है। कई बार शिकायतें भी की गईं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका। अब जब वार्ड पार्षद निभा देवी ने इस मुद्दे को औपचारिक रूप से नगर परिषद के समक्ष उठाया है, तो लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही ठोस कदम उठाएगा।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि नियमित अभियान चलाकर आवारा पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाए, सड़क पर पशु छोड़ने वालों पर जुर्माना लगाया जाए और निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए, तो इस समस्या का प्रभावी समाधान संभव है।
आम जनता की मांग—सुरक्षित हों पाकुड़ की सड़कें
पाकुड़ के नागरिकों का कहना है कि शहर के विकास के साथ-साथ सुरक्षित और सुचारु यातायात व्यवस्था भी उतनी ही आवश्यक है। आवारा पशुओं के कारण रोजाना होने वाली परेशानियों और संभावित दुर्घटनाओं से लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है।
अब सभी की निगाहें नगर परिषद प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर समस्या पर कितनी शीघ्र कार्रवाई करता है। यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाते हैं, तो न केवल सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था भी अधिक सुरक्षित, सुचारु और व्यवस्थित हो सकेगी।


