पाकुड़। जब आस्था दीप बनकर जलती है और भक्ति स्वर बनकर वातावरण में घुलती है, तब शहर केवल सजता नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक उत्सव में बदल जाता है। कुछ ऐसा ही दृश्य इन दिनों पाकुड़ में देखने को मिल रहा है। विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश के स्वागत की तैयारियों के साथ पूरा शहर भक्ति और उल्लास के रंग में रंगने लगा है।
गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर 14 से 17 सितंबर 2026 तक पाकुड़ रेलवे मैदान में आयोजित होने वाले 28वें गणपति महोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर है। सार्वजनिक गणेश पूजा समिति, रेलवे मैदान पाकुड़ की ओर से महोत्सव को भव्य और आकर्षक स्वरूप देने के लिए तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं।
रेलवे मैदान में कहीं पंडाल को आकार दिया जा रहा है, तो कहीं विद्युत सज्जा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। रंग-बिरंगी रोशनी, आकर्षक सजावट और पूजा स्थल की व्यवस्था को लेकर समिति के सदस्य और युवा दिन-रात जुटे हुए हैं। जैसे-जैसे महोत्सव की तारीख करीब आ रही है, वैसे-वैसे शहर की धड़कनों में ‘गणपति बप्पा मोरया’ का स्वर और गहरा होता जा रहा है।
विघ्नहर्ता के स्वागत को सज रहा आस्था का दरबार
गणेश चतुर्थी के दिन रेलवे मैदान में भगवान श्री गणेश की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। वैदिक मंत्रोच्चार और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना होगी। माना जाता है कि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और शुभारंभ के देवता हैं। किसी भी शुभ कार्य से पहले प्रथम पूज्य गणपति का स्मरण भारतीय धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखता है।
इसी आस्था के साथ श्रद्धालु बप्पा के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पूजा स्थल पर साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है।
आयोजकों को उम्मीद है कि पाकुड़ नगर के साथ आसपास के गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु रेलवे मैदान पहुंचेंगे।
युवाओं के कंधों पर उत्सव की जिम्मेदारी
इस महोत्सव की तैयारियों में बच्चों और युवाओं की भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। कोई पंडाल को आकार देने में जुटा है, तो कोई विद्युत सज्जा और साफ-सफाई की जिम्मेदारी संभाल रहा है।
युवाओं का यह उत्साह बताता है कि गणपति महोत्सव केवल पूजा की परंपरा नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को संस्कृति, सेवा और सामूहिकता से जोड़ने वाला उत्सव भी बन चुका है।
पूजा के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विभिन्न सांस्कृतिक एवं भक्तिमय कार्यक्रमों की भी तैयारी की जा रही है। शाम ढलते ही जब रेलवे मैदान रोशनी से जगमगाएगा, तब पूजा पंडाल और उसका आसपास का क्षेत्र श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।
27 वर्षों की परंपरा, 28वें पड़ाव की आस्था
सार्वजनिक गणेश पूजा समिति के संस्थापक हिसाबी राय ने कहा कि रेलवे मैदान पाकुड़ में पिछले 27 वर्षों से भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना निरंतर होती आ रही है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय से धार्मिक परंपरा का लगातार जारी रहना पाकुड़वासियों की आस्था और सहभागिता का प्रतीक है।
उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना महामारी जैसी कठिन परिस्थितियों में भी गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना की परंपरा को यथासंभव जारी रखा गया।
27 वर्षों की इस यात्रा के बाद अब 28वां गणपति महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही आस्था की जीवंत विरासत बन चुका है।
गणपति महोत्सव में दिखेगा सामाजिक एकता का रंग
समिति के राणा शुक्ला ने कहा कि वर्ष 2026 में 28वें गणपति महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गणपति महोत्सव अब केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक एकता, भाईचारे और आपसी सद्भाव का प्रतीक बन चुका है।
उन्होंने नगरवासियों और श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में महोत्सव में शामिल होकर भगवान गणपति का आशीर्वाद प्राप्त करने तथा आयोजन को सफल बनाने की अपील की।
बाजारों में भी बढ़ी चहल-पहल
गणेश चतुर्थी की आहट के साथ पाकुड़ के बाजारों में भी उत्सव का रंग दिखाई देने लगा है। पूजा सामग्री, सजावटी सामान और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी को लेकर लोगों की आवाजाही बढ़ गई है।
शहर की गलियों से लेकर बाजारों तक उत्सव की तैयारी महसूस की जा रही है। कहीं पूजा सामग्री की खरीदारी हो रही है, तो कहीं घरों और प्रतिष्ठानों को सजाने की तैयारी। हर ओर एक ही प्रतीक्षा है—कब आएंगे बप्पा और कब गूंजेगा ‘गणपति बप्पा मोरया’।
14 सितंबर से गूंजेगा ‘गणपति बप्पा मोरया’
14 सितंबर को जब रेलवे मैदान में गणपति बप्पा विराजेंगे, तब उनके साथ केवल एक प्रतिमा नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और मंगलकामना का भाव भी शहर में प्रवेश करेगा।
आरती की लौ, मंत्रोच्चार की ध्वनि, भक्ति गीतों की गूंज और श्रद्धालुओं के जयकारों के बीच रेलवे मैदान कुछ दिनों के लिए पाकुड़ की आध्यात्मिक धड़कन बन जाएगा।
बप्पा के स्वागत में सज रहा रेलवे मैदान अब केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि आस्था और उत्सव का वह केंद्र बनने जा रहा है, जहां भक्ति में शहर की धड़कनें एक साथ सुनाई देंगी। 14 सितंबर से ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष के साथ पाकुड़ एक बार फिर भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आएगा।


