Friday, November 6, 2026
HomePakurछठ की पवित्रता और श्रद्धालुओं की आस्था के सम्मान में उठी मांग!...
एडिटर इन चीफ
धर्मेन्द्र सिंह

छठ की पवित्रता और श्रद्धालुओं की आस्था के सम्मान में उठी मांग! खरना और संध्या अर्घ्य पर पाकुड़ में मीट-मछली की बिक्री पर रोक लगाने की अपील

देश प्रहरी की खबरें अब Google news पर

क्लिक करें
पाकुड़। लोक आस्था, पवित्रता और धार्मिक संवेदना के सम्मान का संदेश

लोक आस्था का महापर्व छठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, तपस्या, त्याग, स्वच्छता और आत्मिक पवित्रता का अनुपम प्रतीक है। इस महापर्व में व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए भगवान सूर्य और छठी मैया की आराधना करते हैं। इसी धार्मिक आस्था और पर्व की पारंपरिक शुचिता को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से सत्य सनातन संस्था ने पाकुड़ नगर परिषद प्रशासन से विशेष पहल करने की मांग की है। संस्था ने छठ महापर्व के खरना और संध्या अर्घ्य के अवसर पर नगर परिषद क्षेत्र में मीट-मछली की बिक्री एवं कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की अपील की है।

श्रद्धालुओं की भावनाओं के सम्मान में प्रशासन से विशेष आग्रह

इस संबंध में संस्था के संयुक्त सचिव अजय भगत ने नगर परिषद पाकुड़ की अध्यक्ष सबरी पाल के नाम औपचारिक आवेदन भेजकर आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। आवेदन में 14 नवंबर को खरना तथा 15 नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को संध्या अर्घ्य अर्पित किए जाने के अवसर पर नगर क्षेत्र में सभी प्रकार के मीट-मछली की बिक्री और कटाई पर रोक लगाने की मांग की गई है। संस्था का कहना है कि छठ जैसे पवित्र अवसर पर श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और आस्था के प्रति संवेदनशीलता दिखाना आवश्यक है।

चार दिनों तक श्रद्धा और संयम में डूबा रहेगा छठमय वातावरण

इस वर्ष छठ महापर्व 14 नवंबर 2026, शनिवार से प्रारंभ होकर 16 नवंबर, सोमवार को उदीयमान सूर्य को प्रातःकालीन अर्घ्य अर्पित करने के साथ संपन्न होगा। 14 नवंबर को खरना, 15 नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को संध्या अर्घ्य और 16 नवंबर को उदीयमान सूर्य को प्रातःकालीन अर्घ्य दिया जाएगा। इन दिनों व्रती पूरी निष्ठा, स्वच्छता, सात्विकता और कठोर नियम-संयम के साथ भगवान सूर्य की उपासना करते हैं। घरों से लेकर घाटों तक भक्ति और आस्था का वातावरण छठ महापर्व की विशिष्ट पहचान बन जाता है।

परंपरा और धार्मिक संवेदनशीलता को लेकर संस्था ने रखी अपनी बात

सत्य सनातन संस्था ने पूर्व के वर्षों की परंपरा का उल्लेख करते हुए नगर परिषद प्रशासन से इस वर्ष भी खरना और संध्या अर्घ्य के अवसर पर विशेष दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है। संस्था के संयुक्त सचिव अजय भगत ने कहा कि छठ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, तपस्या और पवित्रता से जुड़ा महापर्व है। ऐसे अवसर पर धार्मिक भावनाओं का सम्मान और पर्व की मर्यादा बनाए रखना सामूहिक संवेदनशीलता का परिचायक है। उन्होंने प्रशासन से जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए समय रहते उचित निर्णय लेने की अपील की।

धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव का भी संदेश

छठ महापर्व की सबसे सुंदर विशेषता इसकी सामूहिकता और सामाजिक समरसता है। इस पर्व में जाति, वर्ग और आर्थिक भेदभाव से ऊपर उठकर लोग एक साथ घाटों पर पहुंचते हैं और सूर्य उपासना में सहभागी बनते हैं। ऐसे पावन अवसर पर एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संस्था की मांग भी इसी संदर्भ में नगर प्रशासन के समक्ष रखी गई है, ताकि श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन शांतिपूर्ण और श्रद्धापूर्ण वातावरण में कर सकें।

अब नगर परिषद के निर्णय पर टिकी निगाहें

सत्य सनातन संस्था ने नगर परिषद से 14 नवंबर को खरना और 15 नवंबर को संध्या अर्घ्य के अवसर पर पाकुड़ नगर क्षेत्र में मीट-मछली की बिक्री एवं कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए तत्काल आदेश जारी करने की मांग की है। फिलहाल इस मांग पर नगर परिषद प्रशासन की ओर से निर्णय का इंतजार है। अब नगर परिषद अध्यक्ष सबरी पाल और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के रुख पर लोगों की निगाहें टिकी हैं।

छठ महापर्व की पवित्रता, श्रद्धालुओं की आस्था और सामाजिक सद्भाव का सम्मान बना रहे, यही इस मांग के पीछे व्यक्त की गई मूल भावना है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments