पाकुड़। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष अमृत पांडेय ने पाकुड़ नगर के ऐतिहासिक सिंहवाहिनी मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और भारतीय संस्कृति की सबसे महान परंपराओं में से एक गुरु-शिष्य परंपरा को नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर के पुरोहित तरुण पांडेय को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हुए देश, समाज और समस्त मानवता के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।
इस कार्यक्रम के दौरान भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र त्रिवेदी, आईटी सेल के जिला संयोजक पार्थ रक्षित तथा राहुल साहा सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे। पूरे आयोजन का माहौल श्रद्धा, सम्मान और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति समर्पण से ओत-प्रोत दिखाई दिया।
गुरु पूर्णिमा पर गुरु सम्मान बना आकर्षण का केंद्र
गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति की उस अमूल्य परंपरा का प्रतीक है, जिसमें गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है। इसी भावना को साकार करते हुए अमृत पांडेय ने मंदिर के पुरोहित का सम्मान कर यह संदेश दिया कि समाज में गुरु का सम्मान केवल परंपरा नहीं बल्कि संस्कारों की पहचान है।
उन्होंने कहा कि जिस समाज में गुरु का सम्मान होता है, वहां ज्ञान, नैतिकता और चरित्र का विकास स्वतः होता है। गुरु ही वह शक्ति हैं जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर व्यक्ति को सही मार्ग दिखाते हैं।
“राष्ट्र निर्माण की पहली सीढ़ी है गुरु का सम्मान”
कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में अमृत पांडेय ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर के समान माना गया है। गुरु केवल शिक्षा देने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे व्यक्ति के चरित्र, संस्कार और व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि समाज को मजबूत बनाना है, युवाओं को सही दिशा देनी है और राष्ट्र को विकास के पथ पर आगे बढ़ाना है, तो सबसे पहले गुरुजनों का सम्मान और उनके आदर्शों का पालन करना होगा।
उन्होंने कहा कि—
“गुरु ही वह दीपक हैं जो जीवन के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। राष्ट्र निर्माण का आधार अच्छे नागरिक होते हैं और अच्छे नागरिकों का निर्माण गुरु ही करते हैं।”
गुरु पूर्णिमा केवल पर्व नहीं, कृतज्ञता का अवसर
अमृत पांडेय ने कहा कि गुरु पूर्णिमा हमें यह याद दिलाती है कि जीवन में जो भी उपलब्धियां हमें प्राप्त होती हैं, उनके पीछे किसी न किसी गुरु का मार्गदर्शन अवश्य होता है। चाहे माता-पिता हों, शिक्षक हों, आध्यात्मिक गुरु हों या जीवन में सही दिशा दिखाने वाले अन्य मार्गदर्शक—सभी सम्मान के पात्र हैं।
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को भी अपनी भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा को समझना चाहिए तथा अपने गुरुजनों के प्रति सदैव सम्मान और कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए।
भारतीय संस्कृति पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा
उन्होंने कहा कि भारत की पहचान केवल आर्थिक या तकनीकी विकास से नहीं बल्कि उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी है। सदियों से भारत ने पूरी दुनिया को ज्ञान, आध्यात्म और मानवता का संदेश दिया है।
उन्होंने कहा कि आज भी भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति उसकी गुरु-शिष्य परंपरा है, जिसने अनगिनत महापुरुषों, संतों, विद्वानों और राष्ट्रनिर्माताओं को जन्म दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक विरासत को मिल रहा नया सम्मान
अमृत पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि आज भारत अपनी जड़ों से जुड़ते हुए आधुनिकता की ओर अग्रसर है। सरकार द्वारा प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इससे नई पीढ़ी अपनी संस्कृति से जुड़ रही है और भारतीय परंपराओं के प्रति गर्व का भाव विकसित हो रहा है।
समरसता, सेवा और संस्कार का दिया संदेश
उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा जैसे पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं हैं बल्कि समाज में सेवा, समरसता, भाईचारे, नैतिकता और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने का माध्यम भी हैं।
ऐसे आयोजन लोगों को जोड़ते हैं, सामाजिक सौहार्द बढ़ाते हैं और यह संदेश देते हैं कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार सम्मान, सेवा और संस्कार है।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी लिया प्रेरणा का संदेश
कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी गुरुजनों का सम्मान कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। सभी ने समाज में शिक्षा, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि गुरु के मार्गदर्शन में चलकर ही व्यक्ति अपने जीवन में सफलता प्राप्त करता है और समाज के लिए उपयोगी बनता है। उन्होंने युवाओं से भी अपने गुरुजनों का सम्मान करने और भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने की अपील की।
सिंहवाहिनी मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का दिखा विशेष वातावरण
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सिंहवाहिनी मंदिर में श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ रही। सुबह से ही लोग पूजा-अर्चना, दर्शन और गुरुजनों का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर पहुंचते रहे। मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने देश, समाज तथा अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
भारतीय संस्कृति का संदेश हुआ पुनः जीवंत
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और सामाजिक मूल्यों को पुनः स्मरण कराने वाला प्रेरणादायी अवसर बन गया। अमृत पांडेय द्वारा पुरोहित का सम्मान और गुरु के महत्व पर दिए गए विचारों ने उपस्थित लोगों को यह संदेश दिया कि जब तक समाज अपने गुरुजनों का सम्मान करता रहेगा, तब तक उसकी संस्कृति, संस्कार और राष्ट्र की आत्मा सदैव जीवित रहेगी।
गुरु पूर्णिमा के इस अवसर पर दिया गया यह संदेश निश्चित रूप से समाज में ज्ञान, संस्कार, सेवा, समरसता और राष्ट्र निर्माण के प्रति नई प्रेरणा प्रदान करने वाला साबित हुआ।


