Monday, August 17, 2026
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एडिटर इन चीफ
धर्मेन्द्र सिंह

जहां सेवा बनी साधना और शिवभक्ति बनी अनुभूति… सावन के तीसरे सोमवार पाकुड़ के शिवालयों में गूंजा सनातन सेवा का संदेश

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पाकुड़। सावन की सुबह… मंदिरों में गूंजते घंटे-घड़ियाल, वातावरण में तैरता ‘हर-हर महादेव’ का जयघोष, हाथों में बेलपत्र और गंगाजल तथा शिव के दर्शन के लिए उमड़ती श्रद्धा। मानो पूरा वातावरण भक्ति की उस धारा में बह रहा था, जहां आस्था केवल पूजा की क्रिया नहीं, बल्कि भीतर उतर जाने वाली अनुभूति बन जाती है। सावन के तीसरे सोमवार को पाकुड़ के विभिन्न शिवालयों में कुछ ऐसा ही आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला।

इस पावन अवसर पर सत्य सनातन संस्था की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सेवा के लिए जिले के विभिन्न शिवालयों में निःशुल्क सेवा शिविर लगाए गए। शिवभक्तों के बीच बेलपत्र, कच्चा दूध, गंगाजल सहित आवश्यक पूजन सामग्री का निःशुल्क वितरण किया गया। दूर-दूर से भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए यह पहल पूजा की राह को थोड़ा और सहज बनाने वाली साबित हुई।

जब सेवा ने धारण किया साधना का रूप

भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में सेवा को केवल सामाजिक दायित्व नहीं माना गया, बल्कि इसे साधना का एक स्वरूप भी माना गया है। इसी भाव की झलक सावन के तीसरे सोमवार को पाकुड़ के शिवालयों में दिखाई दी।

किसी के हाथ में बेलपत्र था तो किसी को गंगाजल उपलब्ध कराया जा रहा था। कोई श्रद्धालु भगवान शिव के जलाभिषेक की तैयारी कर रहा था तो कोई ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए मंदिर की ओर बढ़ रहा था। इन सबके बीच संस्था के कार्यकर्ता बिना किसी भेदभाव के श्रद्धालुओं की सहायता में जुटे रहे।

भक्ति साहित्य की भाषा में कहें तो यह वह क्षण था, जहां आराधना मंदिर के गर्भगृह से निकलकर सेवा के रूप में समाज के बीच उतर रही थी।

छह वर्षों से सावन में सेवा का संकल्प

सत्य सनातन संस्था के अध्यक्ष रंजीत कुमार चौबे ने बताया कि संस्था की ओर से पिछले छह वर्षों से लगातार सावन माह में इस तरह के सेवा अभियान का आयोजन किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सावन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु विभिन्न शिवालयों में पहुंचते हैं। कई बार भीड़ और अन्य परिस्थितियों के कारण श्रद्धालुओं को पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जुटाने में परेशानी होती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए संस्था के कार्यकर्ताओं द्वारा अलग-अलग शिवालयों में सेवा शिविर लगाकर पूजन सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।

छह वर्षों से जारी यह प्रयास अब केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सावन की सेवा-परंपरा का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।

भगतपाड़ा शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की सेवा

सेवा अभियान के तहत भगतपाड़ा शिव मंदिर में रवि भगत, नवीन सिंह, वरीय अधिवक्ता निपेन्द्र उपाध्याय, राहुल चौरसिया और मिंटू गिरी ने श्रद्धालुओं की सेवा की।

सुबह से ही मंदिर परिसर में शिवभक्तों की आवाजाही बनी रही। भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को आवश्यक पूजन सामग्री उपलब्ध कराई गई। सेवा में जुटे कार्यकर्ताओं ने श्रद्धालुओं को सुविधा प्रदान करने के साथ धार्मिक वातावरण की गरिमा बनाए रखने में भी सहयोग किया।

नागेश्वरनाथ मंदिर में भी दिखा सेवा भाव

कूड़ापाड़ा स्थित नागेश्वरनाथ शिव मंदिर में गौतम कुमार और अरुण कुमार सरदार ने सेवा शिविर का संचालन किया। यहां भी शिवभक्तों के बीच पूजन सामग्री का निःशुल्क वितरण किया गया।

सावन के सोमवार का धार्मिक महत्व श्रद्धालुओं के लिए विशेष होता है। ऐसे में भगवान शिव के दर्शन से पहले या बाद में आवश्यक पूजन सामग्री सहज रूप से उपलब्ध होना भक्तों के लिए सुविधा के साथ-साथ संस्था की सेवा भावना का भी अनुभव बना।

दूधनाथ मंदिर से रेलवे कॉलोनी तक सेवा की कड़ी

इसी क्रम में दूधनाथ मंदिर में आयुष कुमार, वीर कुमार और अंश कुमार ने सेवा कार्य में योगदान दिया। वहीं रेलवे कॉलोनी स्थित शिव मंदिर में शिवम सिंह और निखिल सिंह ने सेवा शिविर संचालित करते हुए शिवभक्तों के बीच पूजन सामग्री वितरित की।

अलग-अलग शिवालयों में चल रहे इन सेवा केंद्रों को देखने पर एक ही भाव उभरता रहा—भक्ति केवल भगवान के सामने हाथ जोड़ने का नाम नहीं, बल्कि किसी दूसरे भक्त की राह आसान करने का नाम भी है।

शिव-दर्शन से सेवा-दर्शन तक

शिव की आराधना भारतीय दर्शन में केवल बाहरी अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। भगवान शिव का स्वरूप ही त्याग, करुणा, वैराग्य और समभाव का संदेश देता है। ऐसे में शिवभक्तों की सेवा को उसी व्यापक आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जा सकता है।

सावन में जब श्रद्धालु जल, बेलपत्र और दूध लेकर महादेव के दरबार पहुंचते हैं, तब सेवा करने वाला व्यक्ति भी उसी यात्रा का एक हिस्सा बन जाता है। एक ओर भक्त शिवलिंग पर जल अर्पित करता है, दूसरी ओर सेवाभावी हाथ किसी भक्त की पूजा पूरी कराने में सहयोग करता है।

यही वह भाव है जहां पूजा और सेवा के बीच की दूरी मिट जाती है।

जब सावन ने रच दिया भक्ति का जीवंत काव्य

सावन का तीसरा सोमवार पाकुड़ के शिवालयों में किसी जीवंत भक्ति-काव्य की तरह दिखाई दिया। मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़, वातावरण में शिवनाम का उच्चारण, पूजा की सामग्री से सजे हाथ और सेवा में जुटे कार्यकर्ता—हर दृश्य अपने भीतर एक अलग कथा कह रहा था।

कहीं कोई वृद्ध श्रद्धालु श्रद्धा से बेलपत्र चुन रहा था, तो कहीं युवा सेवक दूसरे भक्त को पूजा की सामग्री उपलब्ध करा रहा था। कहीं जलाभिषेक के लिए कतार थी तो कहीं ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से वातावरण गूंज रहा था।

मानो सावन स्वयं कह रहा हो—
जहां श्रद्धा है, वहां शिव हैं; और जहां निःस्वार्थ सेवा है, वहां शिवत्व की अनुभूति है।

रोहित दास की देखरेख में चला अभियान

पूरे सेवा अभियान का संचालन संस्था के संपर्क प्रमुख पुरोहित रोहित दास की देखरेख में किया गया। विभिन्न शिवालयों में संस्था के सदस्यों ने व्यवस्थित तरीके से सेवा कार्य को आगे बढ़ाया।

श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए पूजन सामग्री का वितरण किया गया, ताकि भक्त बिना किसी अतिरिक्त परेशानी के अपनी आराधना पूरी कर सकें।

छह वर्षों की परंपरा, सेवा का निरंतर संकल्प

सत्य सनातन संस्था की ओर से लगातार छह वर्षों से चलाया जा रहा यह अभियान सावन के दौरान धार्मिक आस्था और सामाजिक सेवा के बीच एक सुंदर सेतु का निर्माण करता नजर आ रहा है।

शिवभक्ति में जहां मंत्र है, वहीं सेवा में उसका अर्थ दिखाई देता है। पूजा में जहां समर्पण है, वहीं सेवा में उस समर्पण की अभिव्यक्ति दिखाई देती है। इसी भाव के साथ संस्था के कार्यकर्ताओं ने सावन के तीसरे सोमवार को श्रद्धालुओं की सहायता की।

संस्था के कार्यकर्ताओं ने बताया कि सावन माह में आगे भी श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सेवा कार्य जारी रखा जाएगा।

और शायद यही इस पूरे अभियान की सबसे सुंदर पंक्ति है—महादेव के दरबार में पहुंचने वाले हर भक्त के लिए जब कोई हाथ सहायता के लिए आगे बढ़ता है, तो वह हाथ केवल सेवा नहीं करता, बल्कि भक्ति को जीवन में उतारता है।

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