Thursday, June 11, 2026
HomePakur⚖️👧 बाल विवाह उन्मूलन और विधिक जागरूकता का बड़ा अभियान: पाकुड़िया में...
एडिटर इन चीफ
धर्मेन्द्र सिंह

⚖️👧 बाल विवाह उन्मूलन और विधिक जागरूकता का बड़ा अभियान: पाकुड़िया में दिलाई गई शपथ, कानून और बच्चों के अधिकारों पर हुआ व्यापक संवाद

देश प्रहरी की खबरें अब Google news पर

क्लिक करें

📍 पाकुड़िया प्रखंड सभागार में आयोजित हुआ नब्बे दिवसीय गहन विधिक जागरूकता एवं जनसंपर्क अभियान

पाकुड़। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा रांची) के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) पाकुड़ के तत्वावधान में नब्बे दिवसीय गहन विधिक जागरूकता एवं जनसंपर्क अभियान के अंतर्गत गुरुवार को पाकुड़िया प्रखंड सभागार में एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण एवं दूर-दराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक कानून की जानकारी पहुंचाना, सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूकता फैलाना तथा लोगों को उनके अधिकारों और कानूनी सहायता के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराना था।

यह कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडेय के निर्देश पर आयोजित किया गया, जिसमें डालसा सचिव रूपा बंदना किरो विशेष रूप से उपस्थित रहीं।


🕯️ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर डालसा सचिव रूपा बंदना किरो, प्रखंड विकास पदाधिकारी सोमनाथ बनर्जी, स्थायी लोक अदालत के सदस्य राजीव कुमार झा, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के सहायक गंगाराम टुडू तथा पीसीआई-यूनिसेफ के जिला परियोजना समन्वयक मोहम्मद अनीस ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, प्रखंड कर्मियों, पैरा लीगल वॉलंटियर्स एवं विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।


⚖️ कानून की जानकारी हर नागरिक तक पहुंचाना अभियान का मुख्य उद्देश्य

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सचिव रूपा बंदना किरो ने कहा कि इस 90 दिवसीय गहन विधिक जागरूकता अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक कानून की जानकारी पहुंचाना है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं तथा उपलब्ध कानूनी सहायता के संबंध में जागरूक करना इस अभियान की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि समाज में आज भी बाल विवाह, बाल श्रम, डायन प्रथा, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा तथा अन्य सामाजिक कुरीतियां मौजूद हैं। इन बुराइयों को समाप्त करने के लिए सामूहिक जागरूकता और कानूनी समझ बेहद जरूरी है।


📞 कानूनी समस्या होने पर निःशुल्क सहायता लेने की दी जानकारी

रूपा बंदना किरो ने उपस्थित लोगों को बताया कि कोई भी व्यक्ति जानबूझकर कानूनी विवाद में नहीं पड़ना चाहता, लेकिन यदि किसी भी प्रकार की कानूनी समस्या उत्पन्न होती है तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ से संपर्क कर सकता है।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के टोल फ्री नंबर 15100 पर संपर्क कर लोग निःशुल्क कानूनी सलाह और सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने पारिवारिक विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता (Mediation) की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी और कहा कि कई विवाद आपसी संवाद और समझौते के माध्यम से आसानी से सुलझाए जा सकते हैं।


👧 बाल विवाह बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय : बीडीओ

कार्यक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी सोमनाथ बनर्जी ने बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है। कम उम्र में विवाह बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर गंभीर प्रभाव डालता है।

उन्होंने कहा कि माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को शिक्षा प्रदान करें ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने जीवन के बारे में सही निर्णय लेने में सक्षम हों। उन्होंने बाल विवाह से संबंधित कठोर कानूनी प्रावधानों और दंडात्मक व्यवस्थाओं की भी जानकारी दी।


📚 अधिकारों की जानकारी से ही होगा सशक्त समाज का निर्माण

लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के सहायक गंगाराम टुडू ने कहा कि आज के समय में प्रत्येक नागरिक के लिए कानून की बुनियादी जानकारी आवश्यक है। यदि लोग अपने अधिकारों और कानूनी व्यवस्थाओं से परिचित होंगे तो वे न केवल स्वयं को सुरक्षित रख पाएंगे बल्कि समाज में व्याप्त अन्याय और कुरीतियों के खिलाफ भी आवाज उठा सकेंगे।

उन्होंने लोगों को सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एकजुट होकर कार्य करने और जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।


⚠️ बाल विवाह रोकने के लिए समाज को आगे आने की जरूरत

स्थायी लोक अदालत के सदस्य राजीव कुमार झा ने बाल विवाह विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कानून द्वारा विवाह की न्यूनतम आयु निर्धारित की गई है और उससे पहले होने वाला विवाह गैरकानूनी माना जाता है।

उन्होंने लड़कियों के शिक्षा के अधिकार, स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों, बाल विवाह निषेध अधिनियम तथा इसके उल्लंघन पर मिलने वाली सजा की जानकारी दी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने आसपास होने वाले बाल विवाह की सूचना समय रहते संबंधित विभागों को दें ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।


✋ बाल विवाह मुक्त भारत के निर्माण की दिलाई गई शपथ

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह रहा जब डालसा सचिव रूपा बंदना किरो ने उपस्थित सभी लोगों को बाल विवाह उन्मूलन एवं बाल संरक्षण की सामूहिक शपथ दिलाई।

शपथ के दौरान लोगों ने संकल्प लिया कि वे अपने परिवार, पड़ोस और समुदाय में किसी भी बालिका का बाल विवाह नहीं होने देंगे। साथ ही बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा आवाज उठाएंगे तथा बाल विवाह मुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।


🌍 यूनिसेफ प्रतिनिधि ने साझा किए बाल विवाह के चिंताजनक पहलू

कार्यक्रम के दौरान पीसीआई-यूनिसेफ के जिला परियोजना समन्वयक मोहम्मद अनीस ने बाल विवाह की वर्तमान स्थिति, इसके कारणों तथा इसके सामाजिक प्रभावों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

उन्होंने कहा कि बाल विवाह केवल एक कानूनी अपराध नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य, शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ गंभीर अन्याय है। इसके कारण लड़कियों की पढ़ाई बाधित होती है, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं और उनका समग्र विकास प्रभावित होता है।


☎️ बाल विवाह की सूचना समय रहते देने की अपील

मोहम्मद अनीस ने उपस्थित लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि कहीं भी बाल विवाह की तैयारी या चर्चा चल रही हो तो इसकी जानकारी तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या संबंधित प्रशासनिक विभाग को दें।

उन्होंने कहा कि अक्सर विवाह के दिन सूचना मिलने पर कार्रवाई करना कठिन हो जाता है, जबकि पहले से सूचना मिलने पर बाल विवाह को रोका जा सकता है और संबंधित परिवार को सामाजिक एवं आर्थिक नुकसान से भी बचाया जा सकता है।


👨‍👩‍👧 सकारात्मक पेरेंटिंग की आवश्यकता पर दिया गया जोर

अपने संबोधन में मोहम्मद अनीस ने सकारात्मक पेरेंटिंग (Positive Parenting) और पेरेंटिंग माह के महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अभिभावकों और बच्चों के बीच संवाद लगातार कम होता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अधिकांश माता-पिता बच्चों की पढ़ाई और जरूरतों का ध्यान तो रखते हैं, लेकिन उनके मन की बात, भावनाओं और समस्याओं को समझने के लिए पर्याप्त समय नहीं देते। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है कि माता-पिता नियमित रूप से उनके साथ बैठें, उनकी बातें सुनें और उन्हें सही दिशा प्रदान करें।


📱 मोबाइल फोन का गलत उपयोग बन रहा कई समस्याओं की जड़

मोहम्मद अनीस ने कहा कि आज के दौर में बच्चों से जुड़ी अनेक समस्याओं और घटनाओं के पीछे मोबाइल फोन का अनियंत्रित और अनुचित उपयोग एक प्रमुख कारण बनकर सामने आ रहा है।

उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित, संतुलित और सकारात्मक उपयोग करना सिखाएं। साथ ही उन्हें इंटरनेट और सोशल मीडिया के संभावित खतरों के बारे में भी जागरूक करें।


🌟 बच्चों के सपनों को समझने और उनका साथ देने का आह्वान

कार्यक्रम के अंत में मोहम्मद अनीस ने सभी अभिभावकों से एक विशेष संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि घर लौटने के बाद वे अपने बच्चों के साथ बैठें, उनके सपनों, पढ़ाई, भविष्य और जीवन के लक्ष्यों पर सकारात्मक चर्चा करें।

उन्होंने कहा कि बच्चों की सफलता केवल स्कूल और शिक्षकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार का सहयोग और प्रोत्साहन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि अभिभावक बच्चों के साथ संवाद बढ़ाएं और उनका मनोबल मजबूत करें, तो वे जीवन में बड़ी सफलताएं प्राप्त कर सकते हैं।


🤝 बड़ी संख्या में ग्रामीणों और स्वयंसेवकों की रही सहभागिता

इस जागरूकता कार्यक्रम में बीपीओ, प्रखंड कर्मी, आंगनबाड़ी सेविकाएं, पैरा लीगल वॉलंटियर्स सीमा साहा, प्रियंका झा, मल्लिका सरकार, किंग्सुक नाग, सुनेमी मरांडी, नीरज कुमार राउत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान लोगों ने बाल विवाह, बाल संरक्षण, कानूनी सहायता, शिक्षा के अधिकार तथा सकारात्मक पेरेंटिंग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। उपस्थित लोगों ने समाज को कुरीतियों से मुक्त बनाने और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प भी लिया।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments