Tuesday, July 28, 2026
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एडिटर इन चीफ
धर्मेन्द्र सिंह

रेलवे की इस जमीन पर आखिर क्या हो रहा है? दुर्गंध, आग और बड़े हादसे के खतरे ने बढ़ाई चिंता, भाजपा नेता ने उठाई आवाज

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पाकुड़। शहर के पाकुड़ रेलवे स्टेशन के ईस्ट केबिन के निकट स्थित भूमिगत पथ (अंडरपास) के आसपास रेलवे की खाली भूमि इन दिनों गंभीर चिंता का विषय बन गई है। जहां एक ओर यह स्थान रेलवे की महत्वपूर्ण संपत्ति है, वहीं दूसरी ओर यहां वर्षों से फैली गंदगी, अवैध रूप से फेंका जा रहा कचरा, असहनीय दुर्गंध और आग लगने की घटनाएं स्थानीय लोगों तथा रेल यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन रही हैं। अब इस पूरे मामले को लेकर भाजपा के जिला उपाध्यक्ष हिसाबी राय ने रेलवे प्रशासन के समक्ष गंभीर सवाल खड़े करते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

उन्होंने पूर्व रेलवे, हावड़ा के वरिष्ठ मंडलीय अभियंता (समन्वय) कार्तिक सिंह को एक विस्तृत आवेदन सौंपते हुए अंडरपास के समीप रेलवे की खाली भूमि पर सुदृढ़ चारदीवारी निर्माण कराने की मांग की है। इसके साथ ही आवेदन की प्रतिलिपि वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता (पर्यावरण एवं रखरखाव प्रबंधन) सत्येंद्र तिवारी को भी भेजी गई है, ताकि इस गंभीर समस्या का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जा सके।


वर्षों से कूड़ाघर बनी रेलवे की जमीन

आवेदन में बताया गया है कि पाकुड़ रेलवे स्टेशन के ईस्ट केबिन के समीप स्थित रेलवे की खाली भूमि पिछले कई वर्षों से अवैध रूप से कचरा फेंकने का स्थान बन गई है। आरोप है कि स्थानीय बाजार के कुछ दुकानदारों तथा अन्य लोगों द्वारा यहां प्रतिदिन सड़ा-गला भोजन, घरेलू कचरा, व्यावसायिक अपशिष्ट, प्लास्टिक, गंदगी और अन्य बेकार सामग्री फेंकी जाती है।

धीरे-धीरे यह स्थान एक अस्थायी डंपिंग ग्राउंड का रूप ले चुका है। यहां जमा कचरे के कारण न केवल पूरे क्षेत्र की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि वातावरण भी प्रदूषित होता जा रहा है।


दुर्गंध से राहगीरों और यात्रियों का चलना हुआ मुश्किल

स्थानीय लोगों का कहना है कि कचरे के ढेर से उठने वाली तेज दुर्गंध के कारण अंडरपास से गुजरना बेहद कठिन हो गया है। प्रतिदिन इस मार्ग से रेल यात्री, स्कूली बच्चे, स्थानीय नागरिक, रिक्शा चालक, दोपहिया वाहन चालक तथा पैदल राहगीर गुजरते हैं।

बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। सड़ा हुआ कचरा पानी में मिलकर बदबू को और बढ़ा देता है, जिससे लोगों को नाक बंद कर इस रास्ते से गुजरना पड़ता है। कई लोगों ने इसे जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है।


स्वच्छ भारत मिशन की भावना पर उठे सवाल

भाजपा जिला उपाध्यक्ष हिसाबी राय ने अपने आवेदन में कहा है कि यह स्थिति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन की भावना के बिल्कुल विपरीत है।

उन्होंने कहा कि सरकार देशभर में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन यदि रेलवे की महत्वपूर्ण भूमि पर ही खुलेआम कचरा फेंका जाता रहेगा तो स्वच्छता अभियान का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

उन्होंने रेलवे प्रशासन से अपील की कि इस दिशा में शीघ्र और प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि रेलवे परिसर और उसके आसपास का वातावरण स्वच्छ एवं सुरक्षित बनाया जा सके।


बीमारियों के फैलने का बढ़ रहा खतरा

आवेदन में इस बात पर भी विशेष चिंता व्यक्त की गई है कि लगातार जमा हो रहे कचरे के कारण मच्छर, मक्खी, चूहे तथा अन्य रोग फैलाने वाले जीव तेजी से पनप रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी परिस्थितियां डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, फूड पॉइजनिंग तथा अन्य संक्रामक बीमारियों के प्रसार के लिए अनुकूल मानी जाती हैं।

यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में यह क्षेत्र सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।


सिर्फ गंदगी नहीं, रेलवे सुरक्षा पर भी मंडरा रहा खतरा

इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू रेलवे सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

हिसाबी राय ने आवेदन में उल्लेख किया है कि जिस स्थान पर कचरा फेंका जा रहा है, उसके नीचे रेलवे के सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग के महत्वपूर्ण केबल बिछे हुए हैं। यही केबल रेलवे के सुरक्षित एवं सुचारु परिचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यदि इन केबलों को किसी प्रकार की क्षति पहुंचती है तो इसका सीधा असर रेल परिचालन पर पड़ सकता है।


कचरे में आग लगाने की घटनाएं बढ़ा रहीं चिंता

आवेदन में कहा गया है कि कई बार असामाजिक तत्व या अन्य लोग कचरे के ढेर में आग लगा देते हैं।

ऐसी स्थिति में आग की गर्मी या लपटें नीचे मौजूद महत्वपूर्ण केबलों तक पहुंच सकती हैं। यदि ऐसा हुआ तो रेलवे की संचार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, जिससे ट्रेनों के संचालन में बाधा आने की आशंका बनी रहेगी।

रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार सिग्नल और संचार प्रणाली किसी भी रेल नेटवर्क की रीढ़ होती है। इसमें खराबी आने पर परिचालन प्रभावित होने के साथ-साथ सुरक्षा संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं।


बड़ी दुर्घटना और आर्थिक नुकसान की आशंका

भाजपा नेता ने आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना अथवा भारी आर्थिक क्षति से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने रेलवे प्रशासन से अनुरोध किया है कि संभावित खतरे को केवल सफाई का मामला न मानकर रेलवे सुरक्षा और जनहित के दृष्टिकोण से देखा जाए।


चारदीवारी निर्माण की उठी मांग

हिसाबी राय ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि अंडरपास के समीप स्थित रेलवे की खाली भूमि को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत चारदीवारी का निर्माण कराया जाए।

उनका कहना है कि यदि चारदीवारी बन जाती है तो लोग वहां आसानी से कचरा नहीं फेंक पाएंगे और रेलवे की जमीन भी सुरक्षित रहेगी।


सिर्फ दीवार नहीं, ये कदम भी उठाने की मांग

आवेदन में केवल चारदीवारी निर्माण ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी रखी गई हैं।

इनमें प्रमुख रूप से—

  • रेलवे भूमि की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए।
  • कचरा फेंकने वालों के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
  • स्थल पर ‘यहां कचरा फेंकना मना है’ जैसे चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।
  • रेलवे सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए।
  • पर्यावरण संरक्षण के अनुरूप स्वच्छता अभियान चलाया जाए।

स्थानीय लोगों ने भी जताई चिंता

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

लोगों का मानना है कि यदि रेलवे प्रशासन समय रहते इस ओर ध्यान देता है तो न केवल क्षेत्र की स्वच्छता बेहतर होगी, बल्कि यात्रियों और स्थानीय लोगों को भी राहत मिलेगी।


रेलवे प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद

भाजपा जिला उपाध्यक्ष हिसाबी राय ने विश्वास जताया है कि रेलवे प्रशासन इस गंभीर विषय को संवेदनशीलता के साथ लेते हुए जल्द आवश्यक कदम उठाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि चारदीवारी का निर्माण, नियमित सफाई, निगरानी व्यवस्था और कचरा फेंकने वालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है, तो इससे रेल यात्रियों, स्थानीय नागरिकों, स्कूली बच्चों और राहगीरों को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण मिलेगा। साथ ही रेलवे की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सुरक्षा भी मजबूत होगी और भविष्य में किसी संभावित दुर्घटना की आशंका काफी हद तक कम की जा सकेगी।

जनहित से जुड़ा अहम मुद्दा

यह मामला केवल गंदगी हटाने का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, रेलवे सुरक्षा और सार्वजनिक जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ है। अब निगाहें रेलवे प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर समस्या का समाधान कितनी जल्दी करता है। यदि समय पर प्रभावी कार्रवाई होती है तो पाकुड़ रेलवे स्टेशन के आसपास का यह क्षेत्र स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित बन सकता है, जिससे हजारों यात्रियों और स्थानीय नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

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