🏛️ नालसा-झालसा के निर्देश पर आयोजित हुआ 90 दिवसीय गहन विधिक जागरूकता शिविर
पाकुड़। आमजन तक न्याय और कानूनी अधिकारों की जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा), रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पाकुड़ द्वारा जिले में संचालित नब्बे दिवसीय गहन विधिक जागरूकता एवं जनसंपर्क अभियान के तहत शुक्रवार को अमड़ापाड़ा प्रखंड स्थित राजकीयकृत +2 उच्च विद्यालय, अमड़ापाड़ा में एक व्यापक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ दिवाकर पांडेय के निर्देश तथा डालसा सचिव रूपा बंदना किरो के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके संवैधानिक अधिकारों, कानूनी संरक्षण, सामाजिक कुरीतियों के दुष्प्रभावों तथा उपलब्ध निःशुल्क कानूनी सहायता सेवाओं के प्रति जागरूक करना था।
⚖️🎤 कानूनी विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को दी महत्वपूर्ण जानकारी
कार्यक्रम में लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) के डिप्टी चीफ संजीव कुमार मंडल तथा सहायक अधिवक्ता अज़फर हुसैन विश्वास ने संयुक्त रूप से विद्यार्थियों और शिक्षकों को विभिन्न कानूनी विषयों पर विस्तार से जानकारी प्रदान की।
उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार समाज के कमजोर, वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराता है। इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाएं, बच्चे, दिव्यांगजन तथा अन्य पात्र व्यक्तियों को बिना किसी शुल्क के कानूनी सहायता, अधिवक्ता की सेवा तथा न्याय प्राप्त करने में सहयोग प्रदान किया जाता है।
📖🧑⚖️ नालसा की योजनाओं और कानूनी सहायता सेवाओं पर किया गया जागरूक
शिविर के दौरान उपस्थित छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (NALSA) द्वारा संचालित विभिन्न जनहितकारी योजनाओं की भी जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि नालसा का उद्देश्य समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी भी प्रकार की कानूनी समस्या, पारिवारिक विवाद, संपत्ति विवाद, घरेलू हिंसा, बाल संरक्षण, श्रम अधिकार या अन्य कानूनी मामलों में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सहायता प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए विभिन्न स्तरों पर कानूनी सहायता केंद्र और हेल्पलाइन भी उपलब्ध हैं।
👧🚫 बाल विवाह के दुष्परिणामों पर छात्रों को किया गया जागरूक
कार्यक्रम में बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक कुरीति पर विशेष चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य को भी प्रभावित करता है।
छात्र-छात्राओं को बताया गया कि कम उम्र में विवाह होने से विशेष रूप से बालिकाओं के शारीरिक और मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही शिक्षा बाधित होने के कारण उनके जीवन में आगे बढ़ने के अवसर भी सीमित हो जाते हैं। इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ आवाज उठाए।
💰❌ दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता, सामाजिक बदलाव का आह्वान
शिविर में दहेज प्रथा को सामाजिक बुराई बताते हुए इसके खिलाफ जागरूकता फैलाने की अपील की गई। वक्ताओं ने कहा कि दहेज प्रथा आज भी समाज में कई प्रकार की समस्याओं और अपराधों को जन्म देती है।
उन्होंने बताया कि दहेज लेना और देना दोनों ही कानूनन अपराध हैं। दहेज के कारण अनेक परिवार आर्थिक बोझ तले दब जाते हैं तथा कई महिलाओं को विवाह के बाद मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। विद्यार्थियों से आग्रह किया गया कि वे भविष्य में दहेज मुक्त समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
🏠⚠️ घरेलू हिंसा रोकथाम कानून की दी गई जानकारी
कार्यक्रम के दौरान घरेलू हिंसा रोकथाम अधिनियम के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि महिलाओं को घरेलू हिंसा से सुरक्षा प्रदान करने के लिए कानून में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी महिला को शारीरिक, मानसिक, आर्थिक या भावनात्मक रूप से प्रताड़ित करना कानूनन अपराध है। ऐसी स्थिति में पीड़ित महिला कानूनी सहायता प्राप्त कर सकती है तथा न्याय के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सहायता ले सकती है।
🚫 डायन प्रथा को बताया अंधविश्वास, कानून का उल्लंघन करने वालों पर होती है कार्रवाई
शिविर का प्रमुख आकर्षण डायन प्रथा उन्मूलन विषय पर आयोजित विशेष जागरूकता सत्र रहा। वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि डायन प्रथा एक घातक अंधविश्वास और सामाजिक कुप्रथा है, जिसका आधुनिक समाज में कोई स्थान नहीं है।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं को डायन बताकर प्रताड़ित करना, अपमानित करना या हिंसा करना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती है। वक्ताओं ने बताया कि डायन प्रथा के कारण समाज में हिंसा, उत्पीड़न और हत्या जैसी गंभीर घटनाएं सामने आती हैं, जो मानवता और कानून दोनों के विरुद्ध हैं।
🌾⚖️ जमीन विवाद और लालच से जुड़ी होती हैं कई घटनाएं
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि कई बार भूमि विवाद, संपत्ति के लालच या व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण निर्दोष लोगों को डायन घोषित कर उनके खिलाफ अपराध किए जाते हैं। ऐसे मामलों में समाज को सतर्क रहने और अफवाहों पर विश्वास न करने की सलाह दी गई।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि उनके गांव या आसपास किसी व्यक्ति को डायन बताकर प्रताड़ित किया जाता है तो इसकी सूचना तुरंत प्रशासन, पुलिस अथवा विधिक सेवा प्राधिकार को दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
📢👨🎓 छात्र-छात्राओं से गांव-गांव जागरूकता फैलाने की अपील
शिविर के दौरान उपस्थित छात्र-छात्राओं से आह्वान किया गया कि वे केवल स्वयं जागरूक न बनें, बल्कि अपने गांव, टोला और आसपास के क्षेत्रों में भी कानूनी जागरूकता फैलाएं।
वक्ताओं ने कहा कि युवा पीढ़ी सामाजिक परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति होती है। यदि छात्र-छात्राएं बाल विवाह, दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा और डायन प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाएं तो समाज में सकारात्मक बदलाव तेजी से लाया जा सकता है।
🤝📝 सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ विद्यार्थियों ने ली सामूहिक शपथ
कार्यक्रम के अंत में सभी छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और उपस्थित लोगों ने बाल विवाह, दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा तथा डायन प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने की शपथ ली।
सभी ने संकल्प लिया कि वे स्वयं इन कुरीतियों से दूर रहेंगे तथा समाज में इनके खिलाफ जागरूकता फैलाकर एक शिक्षित, जागरूक और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में योगदान देंगे।
🎓🏫 विद्यालय परिवार और पीएलवी की रही सक्रिय भागीदारी
इस महत्वपूर्ण विधिक जागरूकता शिविर में विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं, पारा लीगल वॉलंटियर्स (PLVs) हरेंद्र कुमार मालतो, सौरभ यादव एवं मनोज सोरेन सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए विद्यालय प्रबंधन, विधिक सेवा प्राधिकार की टीम तथा पारा लीगल वॉलंटियर्स की सराहना की गई। उपस्थित लोगों ने कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम समाज में कानूनी चेतना बढ़ाने और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
🌟⚖️ न्याय और जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
अमड़ापाड़ा में आयोजित यह विधिक जागरूकता शिविर केवल कानूनी जानकारी देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों को सामाजिक जिम्मेदारियों, मानवाधिकारों और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने का भी प्रभावी माध्यम बना। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जागरूक नागरिक ही एक सशक्त, न्यायपूर्ण और कुरीतिमुक्त समाज की नींव रख सकते हैं। ✨📚⚖️


