आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर विशेष संगोष्ठी का आयोजन
भारतीय जनता पार्टी, पाकुड़ जिला इकाई की ओर से आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर बुधवार की देर शाम एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष अमृत पाण्डेय ने की। संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता राजमहल के पूर्व विधायक अनंत कुमार ओझा एवं भाजपा प्रदेश मंत्री दुर्गा मरांडी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर आपातकाल पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें 1975 की घटनाओं की तस्वीरों के माध्यम से जनमानस को झकझोरने वाली सच्चाई को उजागर किया गया। साथ ही ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत कॉलेज रोड में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
अनंत कुमार ओझा का तीखा हमला: “आपातकाल था लोकतंत्र की हत्या”
पूर्व विधायक अनंत कुमार ओझा ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि 25 जून 1975 की रात को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आंतरिक शांति बनाए रखने का बहाना बनाकर देश पर आपातकाल थोप दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय किसी युद्ध या राष्ट्रीय संकट के कारण नहीं, बल्कि अपनी सत्ता बचाने की हताशा में लिया गया था।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने उस समय लोकतंत्र, संविधान, प्रेस की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की निष्पक्षता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को कुचल डाला। आज भी, उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की मानसिकता नहीं बदली है, केवल तरीके बदल गए हैं लेकिन तानाशाही प्रवृत्ति जस की तस बनी हुई है।
आपातकाल की पृष्ठभूमि पर ऐतिहासिक दृष्टि
अनंत ओझा ने कहा कि 1971 के लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीतने के बावजूद, इंदिरा गांधी की चुनाव वैधता को विपक्षी नेता राज नारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 12 जून 1975 को अदालत ने इंदिरा गांधी को दोषी ठहराया और 6 वर्षों तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी। इससे घबराकर उन्होंने 25 जून को आपातकाल लगाने का निर्णय लिया।
उन्होंने याद दिलाया कि उस दौर में:
- देश की अर्थव्यवस्था संकट से गुजर रही थी
- बिहार और गुजरात में छात्रों द्वारा आंदोलन शुरू हो चुका था
- 1974 की ऐतिहासिक रेल हड़ताल ने सरकार को हिला दिया था
- गुजरात और बिहार में राष्ट्रपति शासन की घटनाएं आपातकाल की प्रस्तावना बन गईं
लोकतांत्रिक संस्थाओं का हुआ था दमन
ओझा ने बताया कि आपातकाल लगते ही:
- प्रेस की बिजली काट दी गई
- नेताओं को रातों-रात गिरफ्तार किया गया
- रेडियो पर सुबह 26 जून को तानाशाही की घोषणा की गई
- संविधान के अनुच्छेद 352 का दुरुपयोग कर लोकतंत्र को रौंदा गया
- न्यायपालिका और संसद को निष्क्रिय कर दिया गया
उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया।
अमृत पाण्डेय का बयान: “कांग्रेस ने संविधान को रौंदा”
भाजपा जिलाध्यक्ष अमृत पाण्डेय ने अपने संबोधन में कहा कि आपातकाल लगाकर कांग्रेस पार्टी ने भारत के संविधान को रौंदने का दुस्साहस किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस निर्णय ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित लोकतंत्र की नींव को हिला कर रख दिया।
उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं को इस दिन को याद रखते हुए लोकतंत्र की रक्षा के लिए सजग रहना चाहिए।
दुर्गा मरांडी का वक्तव्य: “संवैधानिक मूल्यों की रक्षा भाजपा की परंपरा”
भाजपा प्रदेश मंत्री दुर्गा मरांडी ने कहा कि आपातकाल के दौरान कांग्रेस ने संविधान की रक्षा के लिए उठी हर आवाज को कुचलने का काम किया। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि भाजपा उन संघर्षशील परंपराओं से जुड़ी हुई है, जिसने तानाशाही के खिलाफ लड़ाई लड़ी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए बलिदान दिया।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इतिहास से सीख लें और लोकतंत्र को मजबूत करने में अपनी भागीदारी निभाएं।
वृक्षारोपण और चित्र प्रदर्शनी: जनजागरण का माध्यम
कार्यक्रम के दौरान ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण कर पर्यावरण सुरक्षा का संदेश दिया गया। साथ ही आपातकाल पर आधारित चित्र प्रदर्शनी ने सभी को 1975 के काले दिनों की भयावहता का एहसास कराया। प्रदर्शनी ने छात्रों और युवाओं को लोकतंत्र की अहमियत समझने में मदद की।
कार्यक्रम में शामिल प्रमुख नेता और कार्यकर्ता
इस कार्यक्रम में कई भाजपा नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही, जिनमें शामिल थे:
- पूर्व जिलाध्यक्ष विवेकानंद तिवारी
- जिला महामंत्री रूपेश भगत
- जिला उपाध्यक्ष विजय भगत
- धर्मेंद्र त्रिवेदी
- महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष शबरी पाल
- दादपुर मंडल अध्यक्ष सुशांत घोष
- गांधाईपुर मंडल अध्यक्ष मनोरंजन सरकार
- जिला मंत्री बीरबल राय
- युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष दीपक साह
- नगर अध्यक्ष सोहन मंडल
- पवन भगत, सपन दुबे, राणा शुक्ला, जीतू सिंह, श्यामल साहा, पिंकी मंडल सहित कई अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
लोकतंत्र की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध भाजपा
इस संगोष्ठी और कार्यक्रमों के माध्यम से भाजपा ने लोकतंत्र की रक्षा, संवैधानिक मूल्यों की पुनः स्थापना, और जनजागरूकता के प्रति अपने संकल्प को दोहराया। आपातकाल की 50वीं बरसी पर आयोजित यह कार्यक्रम राजनीतिक चेतना और इतिहास के सटीक विश्लेषण का एक प्रेरक उदाहरण बना।