📌 अभियान की पृष्ठभूमि
नालसा, नई दिल्ली एवं झालसा, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पाकुड़ के तत्वावधान में चल रहे “मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” अभियान के अंतर्गत आज एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य विवादों का शांतिपूर्ण समाधान, परिवारों को टूटने से बचाना और न्यायिक बोझ को कम करना है।
⚖️ नेतृत्व और मार्गदर्शन
इस सफल मध्यस्थता कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ – दिवाकर पांडे की अध्यक्षता में हुआ। कार्यक्रम को प्रभावी दिशा देने में डालसा सचिव – रूपा बंदना किरो का मार्गदर्शन अहम रहा।
📂 सुलह से निपटे तीन महत्वपूर्ण मामले
आज पाकुड़ व्यवहार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय में लंबित तीन मामलों का सफलतापूर्वक सुलह-समझौता कराया गया, जिनमें—
- मूल भरण-पोषण वाद संख्या 294/2025 – उर्मिला खातून बनाम सत्तारूल शेख
- मूल भरण-पोषण वाद संख्या 298/2025 – मुनीजा बीबी बनाम बाबेर अली
- ओरिजनल सूट संख्या 130/2025 – फारूक शेख बनाम सहनारा खातून
ये सभी दंपति कई वर्षों से अलग-अलग रह रहे थे और उनके बीच गहरे आपसी मतभेद थे।
🤝 अथक प्रयास से सुलह की राह
प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय – रजनीकांत पाठक के अथक प्रयास, संवेदनशील दृष्टिकोण और प्रभावी मध्यस्थता के माध्यम से दंपतियों के बीच चल रहे मतभेदों को समाप्त कराया गया। लंबी बातचीत और समझाइश के बाद तीनों मामलों में पति-पत्नी ने पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक साथ रहने का निर्णय लिया।
💞 साथ रहने का संकल्प
सुलह के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने, संसारिक जीवन को प्रेम और समझदारी से जीने तथा भविष्य में किसी भी प्रकार के वाद-विवाद से बचने का संकल्प लिया। इस निर्णय से न केवल न्यायालयीन विवाद समाप्त हुआ, बल्कि तीन परिवारों में फिर से खुशियां लौट आईं।
🏠 टूटते रिश्तों को मिला नया जीवन
इस सफल मध्यस्थता से यह स्पष्ट हुआ कि संवाद और समझदारी से टूटते रिश्तों को बचाया जा सकता है। मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0 अभियान ने यह साबित किया कि न्याय केवल दंड नहीं, बल्कि समाधान और पुनर्मिलन का माध्यम भी है।
👩⚖️ संदेश और प्रेरणा
इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय – रजनीकांत पाठक ने दंपतियों को मिलजुल कर रहने, आपसी मतभेदों को संवाद से सुलझाने और परिवार की एकता बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि परिवार समाज की सबसे छोटी लेकिन सबसे मजबूत इकाई है, जिसे बचाना सभी की जिम्मेदारी है।
👥 उपस्थिति
कार्यक्रम के दौरान दंपतियों के परिजन, अधिवक्ता, न्यायालय कर्मी एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायक कदम बताया।
“मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” अभियान के तहत पाकुड़ में हुआ यह प्रयास न केवल न्यायिक सफलता है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक मूल्यों की जीत भी है।


