Saturday, April 11, 2026
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एडिटर इन चीफ
धर्मेन्द्र सिंह

⚖️ एमएसीटी कार्यशाला: त्वरित न्याय और पीड़ितों को मुआवजा दिलाने पर जोर

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📍 झालसा के निर्देश पर जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन

पाकुड़ में झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) के तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला पाकुड़ व्यवहार न्यायालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित हुई, जिसका मुख्य विषय मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) से संबंधित मामलों की प्रक्रिया और त्वरित निष्पादन रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार दिवाकर पांडे ने की। इस कार्यशाला का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े मामलों में पीड़ितों को समय पर न्याय और मुआवजा सुनिश्चित करना था।


🪔 दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन कई वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। उद्घाटन में प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक, अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संजीत कुमार चंद्र, डीएसपी जितेंद्र कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी साइमन मरांडी, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के चीफ सुबोध कुमार दफादार तथा पैनल अधिवक्ता सिद्धार्थ शंकर प्रमुख रूप से शामिल रहे।

इस अवसर पर न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गंभीरता और महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाया।


🧾 पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता और त्वरित न्याय पर जोर

अपने संबोधन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडे ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे एमएसीटी मामलों में पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि दुर्घटना पीड़ितों की समस्याओं को समझते हुए जांच रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत करना और सभी कानूनी प्रक्रियाओं को सरल एवं सुलभ बनाना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी अधिकारी अपने-अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें, ताकि पीड़ितों को मुआवजा राशि प्राप्त करने में किसी प्रकार की बाधा न आए और उन्हें शीघ्र न्याय मिल सके।


📚 मोटर वाहन अधिनियम और जांच प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी

कार्यशाला में अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद ने मोटर वाहन अधिनियम के विभिन्न पहलुओं पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने लापरवाही की अवधारणा, दुर्घटना मामलों में मुआवजा निर्धारण, परीक्षण प्रक्रिया, और जांच अधिकारियों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों को सरल भाषा में समझाया।

इसके साथ ही उन्होंने डॉक्टरों और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारियों पर भी जोर देते हुए बताया कि सही और समयबद्ध रिपोर्ट न्याय प्रक्रिया को तेज करने में अहम भूमिका निभाती है।


⚖️ कानूनी प्रक्रियाओं और दावों पर गहन चर्चा

प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक ने मुकदमों से संबंधित विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी दी। वहीं अधिवक्ता सिद्धार्थ शंकर ने दावा याचिका से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की।

वक्ताओं ने बताया कि एमएसीटी मामलों में तेजी लाने के लिए आवश्यक है कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और समय-सीमा के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत करें।


🧩 कानूनी सहायता के साथ सामाजिक दायित्व निभाने की अपील

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों को यह भी बताया गया कि वे केवल कानूनी दायित्व ही नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। सक्षम कानूनी सहायता प्रदान करते हुए उन्हें पीड़ितों के प्रति सहानुभूति और सहयोग की भावना रखनी चाहिए, ताकि न्याय प्रक्रिया अधिक मानवीय और प्रभावी बन सके।


🎤 मंच संचालन और धन्यवाद ज्ञापन

इस कार्यशाला का मंच संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव रूपा वंदना किरो द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संजीत कुमार चंद्र ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने और अधिकारियों को अद्यतन जानकारी प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


👥 कार्यक्रम में अधिकारियों और प्रतिभागियों की उपस्थिति

इस अवसर पर अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विशाल मांझी, प्रभारी न्यायाधीश विजय कुमार दास, डीएसपी जितेंद्र कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी साइमन मरांडी, डॉक्टर प्रेम मुर्मू, डिप्टी चीफ संजीव कुमार मंडल, सहायक अज़फर हुसैन, विश्वास गंगाराम टुडू, बीमा कंपनियों के अधिकारी, अधिवक्तागण, पुलिस अधिकारी तथा पैरा लीगल वॉलंटियर्स बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और एमएसीटी मामलों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और त्वरित बनाने की दिशा में अपने विचार साझा किए।

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