पाकुड़ व्यवहार न्यायालय में न्याय सुलभता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा), रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), पाकुड़ के तत्वावधान में शनिवार को पाकुड़ व्यवहार न्यायालय परिसर में मासिक लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण निपटारे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ दिवाकर पांडेय ने की, जबकि आयोजन की संपूर्ण व्यवस्था एवं संचालन प्रभारी सचिव विशाल मांझी की देखरेख में संपन्न हुआ।
लोक अदालत के माध्यम से सुलह-समझौते की भावना को मिला बढ़ावा
मासिक लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों का आपसी सहमति और समझौते के आधार पर त्वरित निपटारा करना था। लोक अदालत की विशेषता यह है कि इसमें पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलती है तथा कम समय और कम खर्च में विवादों का समाधान संभव हो पाता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पाकुड़ व्यवहार न्यायालय में विभिन्न प्रकार के समझौता योग्य मामलों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
समझौते योग्य अपराध, बैंक वसूली और वैवाहिक विवादों का हुआ निपटारा
इस मासिक लोक अदालत में समझौते योग्य आपराधिक मामले, एनआई एक्ट (परक्राम्य लिखत अधिनियम) से संबंधित मामले, बैंक ऋण वसूली से जुड़े विवाद, बिजली बिल संबंधी मामले, वैवाहिक विवाद, राजस्व संबंधी मामले तथा अन्य सुलह योग्य मामलों की सुनवाई की गई। संबंधित पक्षों को आपसी सहमति के आधार पर विवाद समाप्त करने के लिए प्रेरित किया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले।
लोक अदालत में उपस्थित न्यायिक पदाधिकारियों एवं अधिवक्ताओं के प्रयास से अनेक मामलों का सौहार्दपूर्ण वातावरण में समाधान कराया गया। इससे न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम हुई, बल्कि पक्षकारों को भी मानसिक एवं आर्थिक राहत मिली।
नौ बेंचों का गठन, 150 मामलों का हुआ निष्पादन
मासिक लोक अदालत के सफल संचालन के लिए कुल नौ बेंचों का गठन किया गया था। प्रत्येक बेंच में न्यायिक पदाधिकारी एवं अधिवक्ताओं को शामिल किया गया, जिन्होंने विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई कर उनका निष्पादन सुनिश्चित किया।
आयोजित लोक अदालत में कुल 150 वादों का सफल निष्पादन किया गया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि पक्षकारों ने आपसी सहमति एवं संवाद के माध्यम से विवादों को समाप्त करने में रुचि दिखाई। न्यायिक अधिकारियों ने भी पक्षकारों को समझाकर मामलों का समाधान कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
20 लाख 82 हजार 874 रुपये का हुआ समझौता
लोक अदालत की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि यह रही कि विभिन्न मामलों में कुल 20 लाख 82 हजार 874 रुपये की राशि का समझौता कराया गया। बैंक वसूली, वित्तीय विवाद एवं अन्य आर्थिक मामलों में पक्षकारों के बीच सहमति बनने से बड़ी संख्या में लंबित मामलों का समाधान संभव हो सका।
इस समझौते से संबंधित पक्षों को न केवल न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिली, बल्कि आर्थिक मामलों में भी स्थायी समाधान प्राप्त हुआ। लोक अदालत की यह सफलता न्यायिक प्रणाली में वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
न्यायिक अधिकारियों की रही सक्रिय भागीदारी
मासिक लोक अदालत के सफल आयोजन में न्यायपालिका के कई वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार दिवाकर पांडेय, प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक, अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संजीत कुमार चंद्र, प्रभारी सचिव सह अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विशाल मांझी, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी सदिश उज्ज्वल बेक तथा प्रभारी न्यायाधीश विजय कुमार दास सहित अन्य न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
अधिवक्ताओं एवं न्यायालय कर्मियों का रहा महत्वपूर्ण योगदान
लोक अदालत के आयोजन को सफल बनाने में अधिवक्ताओं, न्यायालय कर्मियों, वादी-प्रतिवादियों तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार की टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सभी ने समन्वित प्रयास करते हुए मामलों के त्वरित निपटारे में सहयोग प्रदान किया। न्यायालय परिसर में दिनभर सकारात्मक माहौल बना रहा और पक्षकारों ने भी समझौते की प्रक्रिया में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
लोक अदालत से लोगों को मिल रही त्वरित न्याय की सुविधा
जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा आयोजित लोक अदालतें आम नागरिकों को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम बन रही हैं। इन अदालतों के माध्यम से वर्षों से लंबित मामलों का समाधान संभव हो रहा है, जिससे न्यायालयों पर भार कम होने के साथ-साथ लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत हो रहा है।
पाकुड़ में आयोजित इस मासिक लोक अदालत की सफलता ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि संवाद, सहमति और आपसी समझदारी के माध्यम से विवादों का समाधान अधिक प्रभावी और स्थायी रूप से किया जा सकता है। ⚖️✨


